
लद्दाख में जारी आंदोलन ने एक बार फिर जोर पकड़ा है। कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की रिहाई के महज 2 दिन बाद सोमवार को लेह और कारगिल शहरों में बड़े पैमाने पर रैलियां निकाली गईं। लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (KDA) के आह्वान पर ये प्रदर्शन आयोजित किए गए। इनका मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार से लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने, छठी अनुसूची लागू करने की लंबित मांगों पर शीघ्र वार्ता शुरू करने की अपील करना था। पिछले 5 वर्षों से इन दोनों संगठनों के नेतृत्व में यह आंदोलन चल रहा है। कारगिल और आसपास के द्रास क्षेत्र में पूर्ण बंद रहा, जबकि पूरे लद्दाख संघ शासित प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया था। अधिकारियों ने बताया कि कहीं से भी कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।
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यह रैली एलएबी की ओर से सितंबर महीने में हुई हिंसक घटनाओं के बाद पहली बड़ी जनसभा थी, जिसमें पुलिस कार्रवाई के बाद प्रशासन ने सख्ती बरती थी। वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत लगभग 6 महीने तक हिरासत में रखा गया था। केंद्र सरकार ने शनिवार को उनकी हिरासत समाप्त करने की घोषणा की, जिसे सभी पक्षों के साथ रचनात्मक संवाद सुगम बनाने के उद्देश्य से बताया गया। एलएबी और केडीए ने वांगचुक की रिहाई से पहले ही अगली दौर की बातचीत की मांग को लेकर प्रदर्शन का ऐलान किया था। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। फरवरी में हाई-पावर्ड कमिटी की बैठक में दोनों संगठनों ने वांगचुक सहित 70 अन्य बंदियों की बिना शर्त रिहाई की मांग की थी।
लेह में सिंगे नामग्याल चौक से शुरू हुई रैली का नेतृत्व एलएबी के सह-अध्यक्ष चेरिंग डोरजे ने किया। प्रदर्शनकारी लेह पोलो ग्राउंड तक पहुंचे, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल थीं। उन्होंने राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग के समर्थन में जोरदार नारे लगाए। कुछ लोगों ने पिछले साल सितंबर में हुई हिंसा में मारे गए चार व्यक्तियों की तस्वीरें भी साथ रखीं। कारगिल में भी समान रैली निकाली गई, जहां केडीए के सह-अध्यक्ष असगर अली करबली, सांसद हनीफा जन और कार्यकर्ता सज्जाद कारगिली ने संबोधित किया। उन्होंने राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची, दो बंद कार्यकर्ताओं की रिहाई व पिछले साल की घटनाओं से जुड़े मामलों को वापस लेने की मांग दोहराई।
चेरिंग डोरजे ने पत्रकारों से बातचीत में लोगों का धन्यवाद किया कि वे सड़कों पर बैरिकेडिंग और प्रशासनिक पाबंदियों के बावजूद बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरे। उन्होंने कहा कि लद्दाख की जनता ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी ताकत दिखाई है और यह रैली आंदोलन की व्यापक लोकप्रियता का प्रमाण है। उन्होंने दावा किया कि जनता पूरी तरह एलएबी और केडीए के साथ खड़ी है, जिससे आंदोलन विरोधियों के दावों पर पानी फिर गया है। वांगचुक की रिहाई को संवाद का सकारात्मक कदम माना जा रहा है, लेकिन आंदोलनकारी अपनी मूल मांगों पर अडिग हैं।






