
Maulana Salim Controversy: सीएम योगी की मां पर अभद्र टिप्पणी करने वाले मौलाना पर पुलिसिया एक्शन शुरू हो गया है। हाल में मौलाना के भड़काऊ लहजे पर यूपी पुलिस ने एक्शन लिया है। जानिए अबतक क्या हुआ।
फोटो डिजाइन- नवभारत
FIR Against Maulana Salim: उत्तर प्रदेश की धरती पर राजनीतिक मतभेद और वैचारिक टकराव कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब यह विरोध मर्यादाओं की सीमा लांघकर किसी के परिवार और विशेषकर एक मां तक पहुंच जाए, तो मामला केवल राजनीति तक सीमित नहीं रह जाता। बिहार के मौलाना अब्दुल्ला सलीम द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की माता जी के खिलाफ की गई अमर्यादित टिप्पणी ने इस समय पूरे प्रदेश के माहौल को गरमा दिया है।
सोशल मीडिया के दौर में बातें जंगल की आग की तरह फैलती हैं और मौलाना सलीम का वीडियो भी इसी तरह वायरल हुआ। इस वीडियो में मौलाना उत्तर प्रदेश में गोकशी के खिलाफ लागू सख्त कानूनों की आलोचना कर रहे थे। हालांकि, विरोध जताते हुए उन्होंने जो शब्दावली चुनी, वह बेहद आपत्तिजनक थी। मौलाना ने भड़काऊ लहजे में यहां तक कह दिया कि उत्तर प्रदेश में ऐसा कानून है कि यदि किसी के पास मुख्यमंत्री की मां का मांस भी मिल जाए, तो पुलिस उसका एनकाउंटर कर देती है या पैरों में छेद कर देती है।
बयान पर बयान, अब आया सियासी उफान
मौलाना यहीं नहीं रुके; उन्होंने ‘योगी की अम्मा का गोश्त खाकर दिखाओ’ जैसे बेहद शर्मनाक वाक्यों को अपनी तकरीर में बार-बार दोहराया। बिहार, बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में प्रभावशाली माने जाने वाले एक धर्मगुरु के मंच से इस तरह की व्यक्तिगत नफरत और वैमनस्य फैलाने वाली बातें सुन हर कोई दंग रह गया। सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे लोगों ने इस बयान को स्पष्ट रूप से कानून-व्यवस्था को चुनौती देने और एक विशेष समुदाय को उकसाने के उद्देश्य से दिया गया प्रतीत होता बताया। मामले ने अब सियासी उफान ले लिया है।
बलरामपुर से लेकर 84 थानों तक एक्शन की तैयारी
जैसे ही यह वीडियो सार्वजनिक हुआ, प्रदेश भर में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। सबसे पहले बलरामपुर में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की। वहां के बीजेपी जिलाध्यक्ष की तहरीर पर मौलाना सलीम के खिलाफ औपचारिक रूप से एफआईआर दर्ज की गई। लेकिन पुलिसिया कार्रवाई केवल एक जिले तक सीमित नहीं रही। मुख्यमंत्री की माता जी के सम्मान में लोगों का गुस्सा इस कदर फूटा कि उत्तर प्रदेश के लगभग 84 अलग-अलग थानों में मौलाना के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई गई हैं।
हिंदू संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बीजेपी के पदाधिकारियों के साथ-साथ छात्र संगठनों ने भी पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। शिकायतकर्ताओं का स्पष्ट कहना है कि यदि मौलाना की जल्द से जल्द गिरफ्तारी नहीं हुई, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। पुलिस अब इन सभी शिकायतों के आधार पर कानूनी कार्यवाही को आगे बढ़ा रही है, जिससे मौलाना सलीम की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।
सड़कों पर उतरा जनआक्रोश
इस विवाद की गूंज राजधानी लखनऊ की सड़कों पर भी साफ सुनाई दी। शहर के प्रमुख इलाके हजरतगंज में जगह-जगह विरोध स्वरूप होर्डिंग्स लगा दिए गए हैं, जिन पर बड़े अक्षरों में लिखा है- “योगी जी की मां का अपमान नहीं सहेगा हिंदू समाज।” 7 मार्च को लखनऊ के अटल चौक पर युवाओं का हुजूम उमड़ पड़ा, जिन्होंने मौलाना अब्दुल्ला सलीम के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उनका पुतला भी फूंका।
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि मौलाना को तुरंत गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा जाए। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। आम जनता के नजरिए से देखें तो यह मुद्दा अब केवल सीएम योगी आदित्यनाथ का व्यक्तिगत मामला नहीं रहा, बल्कि इसे मातृशक्ति के अपमान और सामाजिक समरसता को बिगाड़ने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। धार्मिक मंच और सामाजिक जिम्मेदारी: क्या यह केवल एक राजनीतिक बयान था?



