ट्रंप के बयान के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, पहले 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं कीमतें

मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई। इससे पहले सोमवार को तेल की कीमतें तीन साल से भी ज्यादा के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थीं। कीमतों में गिरावट इसलिए आई क्योंकि अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहा युद्ध जल्द खत्म हो सकता है। इससे दुनिया में तेल की सप्लाई लंबे समय तक प्रभावित होने की चिंता कुछ कम हुई।
मंगलवार को शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 6.51 डॉलर यानी 6.6 प्रतिशत गिरकर 92.45 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। वहीं अमेरिकी डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल 6.12 डॉलर यानी 6.5 प्रतिशत गिरकर 88.65 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
सोमवार को तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई और यह 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई थीं। उस दिन ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई दोनों की कीमत करीब 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। यह 2022 के मध्य के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। कीमतों में यह बढ़ोतरी इसलिए हुई क्योंकि सऊदी अरब और दूसरे तेल उत्पादक देशों ने उत्पादन कम किया है। साथ ही अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण दुनिया में तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
पुतिन-ट्रंप बातचीत के बाद कम हुई चिंता
बाद में तेल की कीमतों में गिरावट आ गई। इसकी वजह यह रही कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने डॉनल्ड ट्रंप से फोन पर बात की और ईरान के साथ चल रहे युद्ध को जल्द खत्म करने के लिए कुछ सुझाव दिए। यह जानकारी क्रेमलिन के एक सहयोगी ने दी। ट्रंप ने सोमवार को सीबीएस न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध लगभग खत्म होने वाला है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका उनकी बताई गई 4 से 5 हफ्तों की समयसीमा से आगे बढ़ चुका है।
ईरान की चेतावनी: तेल निर्यात रोक सकते हैं
ट्रंप के बयान पर ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने कहा कि युद्ध कब खत्म होगा, यह वे तय करेंगे। साथ ही चेतावनी दी कि अगर अमेरिका और इजराइल के हमले जारी रहे, तो क्षेत्र से एक लीटर तेल भी निर्यात नहीं होने दिया जाएगा।
हालांकि इस बयान के बावजूद तेल की कीमतों को ज्यादा सहारा नहीं मिला। इसकी एक वजह यह भी है कि ट्रंप रूस पर लगे तेल प्रतिबंधों में ढील देने और आपातकालीन तेल भंडार जारी करने जैसे कदमों पर विचार कर रहे हैं, ताकि दुनिया में बढ़ती तेल कीमतों को काबू में किया जा सके।
आगे कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव की संभावना
आईजी मार्केट के विश्लेषक टोनी साइकामोर के मुताबिक, हाल की घटनाओं को देखते हुए आने वाले दिनों में तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव हो सकता है। उनके अनुसार कीमतें करीब 75 डॉलर से 105 डॉलर प्रति बैरल के बीच रह सकती हैं। इस बीच अमेरिका-इजराइल और ईरान के युद्ध के कारण क्षेत्र में तेल की ढुलाई भी प्रभावित होने लगी है और कुछ खाड़ी देशों ने उत्पादन कम करना शुरू कर दिया है। इराक ने अपने दक्षिणी तेल क्षेत्रों में उत्पादन 70 प्रतिशत घटाकर 1.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन कर दिया है। वहीं कुवैत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन ने भी उत्पादन कम करना शुरू कर दिया है और फोर्स मेज्योर घोषित किया है।
इसके अलावा सऊदी अरब भी उत्पादन घटाने की तैयारी कर रहा है।
जी-7 देशों ने उठाए कदमों का संकेत दिया
इस बीच जी-7 देशों ने कहा है कि अगर वैश्विक तेल कीमतें तेजी से बढ़ती हैं तो वे जरूरी कदम उठाने के लिए तैयार हैं। हालांकि अभी तक आपातकालीन तेल भंडार जारी करने का कोई फैसला नहीं किया गया है।
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