Wednesday, March 11, 2026
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नोएडा में जेवर एयरपोर्ट कनेक्टिविटी को मिलेंगे पंख, 30 किमी लंबे सिक्स लेन एलिवेटेड एक्सप्रेसवे को हरी झंडी!

नोएडा में जेवर एयरपोर्ट कनेक्टिविटी को मिलेंगे पंख, 30 किमी लंबे सिक्स लेन एलिवेटेड एक्सप्रेसवे को हरी झंडी!
नोएडा में जेवर एयरपोर्ट कनेक्टिविटी को मिलेंगे पंख, 30 किमी लंबे सिक्स लेन एलिवेटेड एक्सप्रेसवे को हरी झंडी!

UPEIDA: नोएडा और आसपास के इलाकों में बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए एक बड़ी योजना पर काम शुरू होने जा रहा है. उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) यमुना तटबंध के किनारे करीब 30 किलोमीटर लंबा छह लेन का एलिवेटेड एक्सप्रेसवे बनाने की तैयारी कर रही है. इस प्रोजेक्ट को नोएडा प्राधिकरण के बोर्ड से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है. अब इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए यूपीडा की कंसल्टेंट कंपनी ऑलमंड्ज ग्लोबल इंफ्रा के प्रतिनिधि की ओर से मंगलवार को मौके का भौतिक निरीक्षण शुरू किया गया है.

4 हजार करोड़ की होगी लागत

इस दौरान कंपनी के विशेषज्ञ पूरे प्रस्तावित रूट का जायजा लेंगे और नोएडा प्राधिकरण तथा यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ बैठक भी करेंगे. निरीक्षण के बाद परियोजना की तकनीकी और डिजाइन संबंधी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा. यह एलिवेटेड एक्सप्रेसवे करीब 4000 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा.

क्या है परियोजना की खासियत?

इस परियोजना की खास बात यह है कि इससे दिल्ली से जेवर में बन रहे नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक सीधी और तेज कनेक्टिविटी मिल सकेगी. अभी दिल्ली और नोएडा से एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए लोगों को लंबा रास्ता तय करना पड़ता है, लेकिन इस एक्सप्रेसवे के बनने के बाद सफर काफी आसान और तेज हो जाएगा.

ट्रैफिक का बड़ा हिस्सा नए रास्ते पर होगा शिफ्ट

एक और बड़ा फायदा इस परियोजना का यह होगा कि नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर बढ़ रहे यातायात के दबाव को काफी हद तक कम किया जा सकेगा. रोजाना हजारों वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं, जिससे कई बार जाम की स्थिति बन जाती है. नया एलिवेटेड एक्सप्रेसवे बनने के बाद ट्रैफिक का बड़ा हिस्सा इस नए रास्ते पर शिफ्ट हो सकेगा.

कौन वहन करेगा खर्च?

इस परियोजना के खर्च को नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण मिलकर वहन करेंगे. इस एक्सप्रेसवे के निर्माण में सबसे ज्यादा हिस्सा नोएडा प्राधिकरण का होगा. कुल 30 किलोमीटर लंबे इस ट्रैक में करीब 23 किलोमीटर हिस्सा नोएडा क्षेत्र में पड़ेगा.

कैसी होगी कनेक्टिविटी?

यह एक्सप्रेसवे पूरी तरह छह लेन का एलिवेटेड रोड होगा और इसमें तीन प्रमुख लूप बनाए जाएंगे, ताकि अलग-अलग मार्गों से आने वाले वाहनों को आसानी से प्रवेश और निकास मिल सके. पहला लूप सेक्टर-168 में फरीदाबाद-नोएडा-गाजियाबाद (एफएनजी) मार्ग को जोड़ेगा. दूसरा लूप सेक्टर-150 के पास सेक्टर-149ए और सेक्टर-150 के बीच 75 मीटर चौड़ी सड़क से कनेक्टिविटी देगा. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। वहीं तीसरा लूप ग्रेटर नोएडा के परी चौक से इस एक्सप्रेसवे को जोड़ेगा.

यह एलिवेटेड रोड ओखला बैराज से शुरू होकर हरनंदी और यमुना के किनारे होते हुए गौतमबुद्धनगर विश्वविद्यालय के सामने घरबरा गांव के पास यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा. इस तरह दिल्ली से जेवर एयरपोर्ट तक सीधे और तेज रास्ते की सुविधा मिल सकेगी.

नोएडा एयरपोर्ट जाने वाला ट्रैफिक होगा सुगम

नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश ने दैनिक जागरण को बताया कि इस एलिवेटेड एक्सप्रेसवे के बनने से आने वाले समय में नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की ओर जाने वाला ट्रैफिक काफी सुगम हो जाएगा. आगरा और लखनऊ की ओर जाने वाले यात्रियों को भी इससे बड़ी राहत मिलेगी.  इसके अलावा यह एक्सप्रेसवे प्रदूषण को कम करने में भी मदद करेगा.

शहर के अंदर नहीं करना पड़ेगा प्रवेश

दिल्ली, हरियाणा और अन्य शहरों की ओर जाने वाले वाहन नोएडा शहर के अंदर प्रवेश किए बिना सीधे यमुना तटबंध एलिवेटेड एक्सप्रेसवे से गुजर सकेंगे. इससे शहर के अंदर ट्रैफिक और प्रदूषण दोनों में कमी आएगी. कुल मिलाकर यह परियोजना नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र के विकास में अहम भूमिका निभाएगी और भविष्य में बढ़ते ट्रैफिक की समस्या को कम करने में मदद करेगी.

me.sumitji@gmail.com

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