Monday, March 9, 2026
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तेहरान बना ‘गैस चैंबर’, इजरायली हमले के बाद आसमान से बरस रही ‘काली मौत’!..

तेहरान बना ‘गैस चैंबर’, इजरायली हमले के बाद आसमान से बरस रही ‘काली मौत’!..
तेहरान बना ‘गैस चैंबर’, इजरायली हमले के बाद आसमान से बरस रही ‘काली मौत’!..

Iran Tehran Acid Rain: ईरान की राजधानी तेहरान में रविवार सुबह चटक लाल रंगों वाली नहीं, बल्कि बिल्कुल काली दिखी. सरकार की ओर से लोगों को घर के अंदर रहने के लिए कहा गया, क्योंकि आसमान से काले बादल बरस रहे थे. ये ऐसी पानी की बूंदे हैं, जो सिरदर्द, सांस लेने में समस्या पैदा कर रही है. इससे भी अधिक यह बारिश लोगों के लिए कैंसर का कारण भी बन सकती है. यह सब कुछ इसलिए हो रहा है, क्योंकि अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों के बाद ईरान के कुछ हिस्सों में काली बारिश हुई है. कुछ रिपोर्ट्स में इसे ‘अम्लीय वर्षा’ भी बताया जा रहा है.

सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल की वायु सेना ने ईरान की तेल रिफाइनरियों और तेल से जुड़े अन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए बड़ा हवाई हमला किया. राजधानी के दक्षिण और पश्चिम हिस्सों में स्थित तेल प्रतिष्ठान मुख्य रूप से निशाने पर थे. ईरानी फारस समाचार एजेंसी के अनुसार, शनिवार को इजरायली सेना द्वारा किए गए हमलों में तेहरान और अल्बोर्ज प्रांत में चार तेल भंडारण सुविधाएँ और तेल उत्पादन ट्रांसफर केंद्र निशाना बनाए गए.

अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, इन हमलों में तेहरान और अल्बोर्ज प्रांत के चार तेल भंडारण केंद्र और एक तेल उत्पादन एवं ट्रांसफर केंद्र प्रभावित हुए. इन केंद्रों में अघदासिये तेल गोदाम (उत्तर-पूर्व), शहरान तेल डिपो (पश्चिम), तेहरान रिफाइनरी (दक्षिण) और कराज का एक और तेल डिपो शामिल था. सबसे नाटकीय दृश्य शहरान डिपो से आए, जहां तेल सड़कों पर फैल गया और आग शहर में फैली.

भयानक था ऑयल डिपो पर हमला
ईरान की राजधानी तेहरान में रातभर भयानक दृश्य देखने को मिले. अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों के बाद शहर के कई तेल भंडारण केंद्रों में आग लगी. आग और धुएँ के कारण सड़कें जलती हुई नजर आईं और आसमान में धुएँ के विशाल गुबार उठे. स्थानीय लोगों और वीडियो फुटेज से पता चला कि आग के गोले शहर की सड़कों तक फैल गए और पूरे इलाके में लाल रोशनी फैल गई. स्थानीय लोगों ने बताया कि विस्फोट इतने तेज थे कि रात का आकाश कुछ समय के लिए दिन जैसा लग रहा था. कराज के एक निवासी ने कहा कि हमला एक चमक और उसके बाद शॉकवेव के साथ शुरू हुआ. आग और धुएँ की वजह से अगले दिन शहर धुएँ की चादर में उठा, हवा में जलते ईंधन की गंध फैली और सूरज दिखाई नहीं दे रहा था.

आसमान में फैला धुएं का गुबार
इसके बाद पूरे शहर में काले अवशेषों के साथ तेल मिश्रित बारिश की खबरें आईं. ईरानी अधिकारियों ने बताया कि वे वायु गुणवत्ता पर नजर रख रहे हैं और लोगों से घर के अंदर रहने की अपील की है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माईल बकाई ने कहा कि इन हमलों से हवा में खतरनाक पदार्थ फैल रहे हैं, जो लोगों की जान के लिए जोखिम पैदा कर रहे हैं. द कन्वर्सेशन की रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय लोग शिकायत कर रहे हैं कि इस बारिश के पानी से सिरदर्द हो रहा है, सांस लेने में तकलीफ हो रही है और इमारतों और गाड़ियों पर तेल जैसी गंदगी जम गई है.

एसिड रेन से भी कहीं ज्यादा है यह घटना
ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने चेतावनी दी है कि इस तरह की बारिश ‘बहुत खतरनाक और अम्लीय’ हो सकती है. वायु प्रदूषण के विशेषज्ञों की नजर में ये खबरें और भी चिंताजनक हैं. द कन्वर्सेशन की रिपोर्ट के अनुसार, इस बारिश में सिर्फ अम्ल ही नहीं हो सकता, बल्कि इसमें कई तरह के जहरीले रसायन और प्रदूषक भी हो सकते हैं, जो इंसानों और पर्यावरण दोनों के लिए खतरनाक हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसे सिर्फ ‘अम्लीय वर्षा’ कहना कम ही है. असल में, ईरान के घनी आबादी वाले इलाकों में छाए काले धुएँ के बादल हवा में सांस लेने वाले हर इंसान के लिए बहुत बड़ा खतरा हैं.

काली बारिश कैसे बनती है?
वायु में मौजूद प्रदूषक जब बहुत अधिक हो जाते हैं, तो बारिश की बूंदें उन्हें अपने साथ गिराती हैं और वायुमंडल से बाहर ले आती हैं. यही कारण है कि तेल भंडारों पर हमलों के बाद आसमान से काली बारिश हुई. इस काली बारिश में हाइड्रोकार्बन, PM2.5 (अतिसूक्ष्म कण) और PAH (कैंसर पैदा करने वाले रसायन) जैसे जहरीले तत्व शामिल हो सकते हैं. इसके अलावा, भारी धातुएं और अन्य रसायन भी इसमें मिल सकते हैं, जो आग और विस्फोट से फैल चुके हैं. तेल भंडारों से निकले धुएँ में सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड भी होते हैं. ये एसिड (सल्फ्यूरिक एसिड और नाइट्रिक एसिड) बनाते हैं, जो बारिश के पानी में मिल जाते हैं. इस कारण इसे आमतौर पर अम्लीय वर्षा कहा जाता है.

स्वास्थ्य पर असर
थोड़े से समय में ही काले धुएँ और अम्लीय बारिश से सिरदर्द, खांसी, सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं हो सकती हैं, खासकर अस्थमा या फेफड़ों की बीमारी वाले लोगों में. इसकी वजह से बुजुर्ग, बच्चे और गर्भवती महिलाएं सबसे ज्यादा जोखिम में हैं. लंबे समय में, इन प्रदूषकों के संपर्क से कैंसर, हृदय और नसों की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. PM2.5 कण फेफड़ों से रक्त में जा सकते हैं और दिमाग व शरीर पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं. बारिश से ये जहरीले पदार्थ नदियों, तालाबों और पेयजल स्रोतों में भी जा सकते हैं. इसके अलावा, ये कण इमारतों और सड़कों पर जमा होकर हवा में वापस फैल सकते हैं.

me.sumitji@gmail.com

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