Monday, March 9, 2026
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4 साल की उम्र में खोया, चीन से पहुंचा कनाडा, अब 24 साल बाद पिता से मिला, ऐसे हुई पहचान!

4 साल की उम्र में खोया, चीन से पहुंचा कनाडा, अब 24 साल बाद पिता से मिला, ऐसे हुई पहचान!

Viral: चीन का एक शख्स इन दिनों काफी चर्चा में है, जो महज 4 साल की उम्र में खो गया था और उसके बाद वो कनाडा पहुंच गया था. फिर जब वो 28 साल का हुआ तो उसने अपने असली माता-पिता को ढूंढने का फैसला किया और आखिरकार 24 साल बाद वो अपने असली पिता से मिल पाया.

4 साल की उम्र में खोया, चीन से पहुंचा कनाडा, अब 24 साल बाद पिता से मिला, ऐसे हुई पहचान!

कभी-कभी इंसान के जीवन में कुछ ऐसी घटनाएं घट जाती हैं, जो उसका जीवन ही बदल कर रख देती हैं. चीन में एक ऐसी ही घटना इन दिनों काफी चर्चा में है, जिसने लोगों को हैरान भी किया है और खुश भी. दरअसल, एक शख्स जो बचपन में ही अपने परिवार से बिछड़ गया था,दो दशकों से अधिक समय बाद आखिरकार अपने पिता से मिल गया है. ये भावुक मिलन पूर्वोत्तर चीन में हुआ और इसके साथ ही उस लंबी और कठिन यात्रा का अंत हुआ जो तब शुरू हुई थी जब वो महज 4 साल की उम्र में एक रेलवे स्टेशन पर खो गया था.

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, इस शख्स का नाम झांग युनपेंग है, जो अब 28 साल का हो चुका है. झांग की मुलाकात 24 साल बाद अपने पिता झांग जिउचेंग से 2 मार्च को चीन के जिलिन प्रांत के हुआइनान काउंटी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हुई. कई सालों बाद आमने-सामने मिलने पर दोनों पिता-पुत्र गले मिले और इस दौरान उनकी आंखों में आंसू भर आए. मुलाकात के दौरान जिउचेंग ने कहा कि दो दशकों से अधिक समय के बाद आखिरकार उन्हें अपने बेटे से मिलने का मौका मिला. विदेश में लंबे समय तक रहने के कारण उनकी चीनी भाषा कुछ कमजोर हो गई थी, लेकिन फिर भी झांग युनपेंग ने अपने पिता से कहा कि वह उनसे बहुत प्यार करते हैं.

रेलवे स्टेशन पर हो गए थे लापता

झांग युनपेंग साल 2001 में लियाओनिंग प्रांत के शेनयांग रेलवे स्टेशन से लापता हो गए थे. उस समय वो सिर्फ 4 साल के थे. खबरों के मुताबिक, उनके चाचा आइसक्रीम खरीदने के लिए उन्हें कुछ देर के लिए स्टेशन पर छोड़कर गए थे और तभी बच्चा गायब हो गया. बाद में जब वो मिला, तो उसे एक नगरपालिका कल्याण केंद्र में भेज दिया गया, जहां उसका नाम बदलकर शेन हुआइबाई रख दिया गया.

गोद लेने के बाद विदेश में एक कठिन जीवन

साल 2005 में एक कनाडाई दंपति ने उसे गोद लिया और वो उनके साथ कनाडा चले गए. हालांकि दंपति का महज तीन महीने बाद तलाक हो गया और उनमें से किसी ने भी उनकी जिम्मेदारी लेने की इच्छा व्यक्त नहीं की. फिर स्थानीय अधिकारियों ने झांग को एक होमस्टे परिवार के साथ रहने के लिए भेज दिया. हालांकि उस परिवार में पहले से ही 9 बच्चे थे, इसलिए उसे ज्यादा ध्यान और देखभाल नहीं मिल पाई. झांग युनपेंग बताते हैं कि माध्यमिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्हें अपना भरण-पोषण करने के लिए काम भी करना पड़ा.

असली माता-पिता की खोज

पिछले साल सोशल मीडिया पर कई लोगों के मिलने की कहानियां देखने के बादझांग ने अपने असली माता-पिता को खोजने का फैसला किया. इसके लिए उन्होंने ‘बेबी रिटर्निंग होम’ नामक एक संगठन से संपर्क किया, जो लोगों को उनके जैविक परिवारों से मिलाने में मदद करता है. संगठन ने कनाडा में रहने वाले चीनी पीएचडी छात्र गाओ यांग से झांग की मदद के लिए स्वेच्छा से आगे आने का अनुरोध किया. गाओ यांग ने कहा कि जब उन्होंने पहली बार झांग युनपेंग को देखा, तो वह बहुत दुबले-पतले और परेशान दिख रहे थे.

डीएनए टेस्ट से हो गई पुष्टि

रिपोर्ट्स के मुताबिक, डीएनए टेस्ट के लिए झांग युनपेंग ने अपने खून का नमूना दिया, जिसे चीन के नेशनल डीएनए डेटाबेस में भेजा गया और कुछ ही दिनों में टेस्ट ने उनके जैविक माता-पिता की पहचान की पुष्टि कर दी. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। अपने बेटे की तस्वीर देखने के बाद झांग जिउचेंग ने कहा कि उन्होंने उसे तुरंत पहचान लिया. उनके अनुसार, वो बिल्कुल उन्हीं की तरह दिखता था और उन्हें किसी और पुष्टि की जरूरत नहीं थी.

बेटे से मिलने के बाद पिता का संकल्प

अपने बेटे से आमने-सामने मिलने से पहले झांग जिउचेंग ने उसे 10,000 युआन भेजे, जो लगभग 1,400 अमेरिकी डॉलर के बराबर है. उन्होंने कहा कि वो बीते सालों की खाई को पाटने और अपने बेटे को जीवन की सबसे अच्छी चीजें देने के लिए अपनी पूरी कोशिश करेंगे.

me.sumitji@gmail.com

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