
Digital Desk: रत्न शास्त्र (Gemology) के अनुसार, रत्नों में ग्रहों की ऊर्जा को नियंत्रित करने की अद्भुत शक्ति होती है। यदि सही रत्न को विधि-विधान से धारण किया जाए, तो यह न केवल व्यक्ति के भाग्य को चमका सकता है, बल्कि जीवन में आ रही बाधाओं को भी दूर कर सकता है। ज्योतिष शास्त्र में तीन ऐसे रत्नों का वर्णन किया गया है जिन्हें ‘बेहद असरदार’ माना जाता है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। आइए जानते हैं किन लोगों के लिए ये रत्न वरदान साबित हो सकते हैं।
पुखराज (Yellow Sapphire): सुख-समृद्धि और बुद्धि का कारक
पुखराज को देवगुरु बृहस्पति (Jupiter) का रत्न माना जाता है। बृहस्पति ग्रह को भाग्य, धन और ज्ञान का स्वामी माना जाता है।
किसे पहनना चाहिए: धनु और मीन राशि के जातकों के लिए यह अत्यंत शुभ है।
मुख्य लाभ: इसे धारण करने से विवाह में आ रही अड़चनें दूर होती हैं और करियर में उच्च पद की प्राप्ति होती है।
धारण करने की विधि: इसे गुरुवार के दिन सोने की अंगूठी में जड़वाकर तर्जनी उंगली (Index Finger) में पहनना श्रेष्ठ रहता है।
नीलम (Blue Sapphire): रातों-रात भाग्य पलटने की ताकत
नीलम को न्याय के देवता शनि देव (Saturn) का रत्न माना जाता है। यह सबसे तेजी से असर दिखाने वाला रत्न माना जाता है।
किसे पहनना चाहिए: मकर और कुंभ राशि वालों के लिए यह लाभकारी है, लेकिन इसे बिना अनुभवी ज्योतिषीय सलाह के कभी न पहनें।
मुख्य लाभ: यदि नीलम अनुकूल हो, तो यह व्यक्ति को अचानक धन लाभ, मानसिक स्पष्टता और स्वास्थ्य में सुधार प्रदान करता है।
धारण करने की विधि: इसे शनिवार के दिन पंचधातु या चांदी में मध्यमा उंगली (Middle Finger) में पहनना चाहिए।
माणिक्य (Ruby): मान-सम्मान और आत्मविश्वास का प्रतीक
माणिक्य ग्रहों के राजा सूर्य (Sun) का रत्न है। सूर्य का संबंध सत्ता, तेज और नेतृत्व क्षमता से है।
किसे पहनना चाहिए: सिंह राशि के जातकों के लिए माणिक्य धारण करना सर्वोत्तम माना जाता है।
मुख्य लाभ: इसे पहनने से समाज में मान-प्रतिष्ठा बढ़ती है, इच्छाशक्ति मजबूत होती है और सरकारी कार्यों में सफलता मिलती है।
धारण करने की विधि: रविवार की सुबह तांबे या सोने की अंगूठी में इसे अनामिका उंगली (Ring Finger) में पहनना शुभ होता है।
रत्न पहनने से पहले इन 3 बातों का रखें विशेष ध्यान
रत्नों का सकारात्मक प्रभाव तभी मिलता है जब वे शुद्ध हों और सही तरीके से धारण किए जाएं:
प्राकृतिक रत्न: हमेशा लैब सर्टिफाइड और असली रत्न ही चुनें। कांच या नकली पत्थर लाभ के बजाय नुकसान पहुंचा सकते हैं।
प्राण प्रतिष्ठा: रत्न धारण करने से पहले उसे कच्चे दूध और गंगाजल से शुद्ध कर संबंधित ग्रह के मंत्रों से अभिमंत्रित जरूर करना चाहिए।
व्यक्तिगत कुंडली: आपकी कुंडली में ग्रहों की स्थिति (योगकारक या मारक) के आधार पर ही रत्न का चुनाव करें।




