कोरियाई प्रायद्वीप में एक बार फिर युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। एक तरफ अमेरिका और दक्षिण कोरिया अपना अब तक का सबसे बड़ा संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘फ्रीडम शील्ड’ (Freedom Shield 2026) शुरू कर चुके हैं, तो दूसरी तरफ उत्तर कोरियाई तानाशाह किम जोंग उन ने इसे “हमले की रिहर्सल” करार देते हुए अपनी परमाणु ताकतों को अलर्ट पर रहने का संकेत दिया है। आइए समझते हैं कि आखिर इस सैन्य अभ्यास की आड़ में कौन सा खेल रचा जा रहा है और क्या वास्तव में अमेरिका किम जोंग उन से ‘पंगा’ लेने की तैयारी में है?
पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच अमेरिका ने सोमवार को दक्षिण कोरिया के साथ मिलकर एक बड़ा सैन्य अभ्यास शुरू किया, जिसमें हजारों सैनिकों के हिस्सा ले रहे हैं।
दक्षिण कोरिया के ‘ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ’ ने कहा कि लगभग 18,000 कोरियाई सैनिक इस ‘फ्रीडम शील्ड’ अभ्यास में हिस्सा लेंगे, जो 19 मार्च तक चलेगा। अमेरिकी सेना ने दक्षिण कोरिया में इस अभ्यास में शामिल अपने सैनिकों की संख्या नहीं बतायी है।
इन दोनों सहयोगी देशों का यह संयुक्त अभ्यास ऐसे समय में हो रहा है जब दक्षिण कोरियाई मीडिया में अटकलें लगाई जा रही हैं कि अमेरिका कुछ सैन्य संसाधनों को दक्षिण कोरिया से हटा कर ईरान के खिलाफ लड़ाई में ले जा रहा है।
‘यूएस फोर्सेज कोरिया’ ने पिछले सप्ताह कहा था कि सुरक्षा कारणों से वह सैन्य संसाधनों की विशिष्ट गतिविधियों पर टिप्पणी नहीं करेगी।
दक्षिण कोरियाई अधिकारियों ने भी इस खबर पर टिप्पणी करने से इनकार किया कि कुछ अमेरिकी पैट्रियट मिसाइल सिस्टम और अन्य उपकरण पश्चिम एशिया भेजे जा रहे हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि इससे सहयोगी देशों की संयुक्त रक्षा रणनीति पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।
‘फ्रीडम शील्ड’ अभ्यास को लेकर उत्तर कोरिया की ओर से तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। उत्तर कोरिया लंबे समय से सहयोगी देशों के संयुक्त अभ्यासों को आक्रमण का पूर्वाभ्यास बताता रहा है और इसे अपने सैन्य प्रदर्शनों और हथियार परीक्षणों को बढ़ाने का बहाना बनाता रहा है। अमेरिका एवं दक्षिण कोरिया का कहना है कि ये अभ्यास रक्षा उद्देश्य के लिए होते हैं।
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