
यूपी के कानपुर में मंडलायुक्त के. विजयेन्द्र पांडियन ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने और पद के दुरुपयोग के गंभीर आरोपों में घिरे चर्चित लेखपाल आलोक दुबे को राजकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया है. मंडलायुक्त ने जिलाधिकारी के मूल आदेश के विरुद्ध दायर उनकी अपील को पूर्णतः खारिज करते हुए यह कठोर कार्रवाई की है.
कानपुर में तैनात आलोक दुबे राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) के पद पर तैनात रहते हुए भूमि क्रय-विक्रय के कारोबार में संलिप्त पाए गए थे. विभागीय जांच में यह स्पष्ट हुआ कि उन्होंने अपने पदीय कर्तव्यों का उचित निर्वहन नहीं किया तथा निजी लाभ के लिए पद का गलत इस्तेमाल किया. जांच में आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप भी प्रमाणित हुए. जांच में पता चला था कि उनके नाम पर करोड़ों रुपये की अवैध संपत्ति है, जिसने पूरे मामले को सनसनीखेज बना दिया था. डीएम ने डिमोशन करते हुए उनको कानूनगो से लेखपाल बना दिया था जिसके खिलाफ अपील आलोक दुबे ने मंडलायुक्त के यहां की थी।.
मंडलायुक्त ने अपील की विस्तृत सुनवाई के उपरांत अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अपीलकर्ता आलोक दुबे ने राजस्व निरीक्षक के रूप में पद और अधिकारों का दुरुपयोग कर निजी स्वार्थ सिद्ध किया. उन्होंने भूमि सौदों में अनुचित हस्तक्षेप किया और आय से असंगत संपत्ति अर्जित की. यह कृत्य अत्यंत गंभीर प्रकृति का है तथा उत्तर प्रदेश सरकारी सेवा (आचरण) नियमावली, 1956 के नियम 15, 21(1) तथा 24(1) का स्पष्ट उल्लंघन है. उन्होंने यह भी कहा कि आलोक दुबे ने एक रियल एस्टेट कारोबारी की तरह संपत्ति अर्जित की है.
भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन का संदेश
आदेश में मंडलायुक्त ने कहा- ऐसे कर्मचारी को राजकीय सेवा में बनाए रखना जनहित, प्रशासनिक नैतिकता तथा विभागीय अनुशासन के विरुद्ध है. भ्रष्टाचार के ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई अनिवार्य है ताकि अन्य कर्मचारियों के लिए भी यह चेतावनी बने. उन्होंने अपील को निरस्त करते हुए आलोक दुबे (तत्कालीन राजस्व निरीक्षक, वर्तमान लेखपाल) को तत्काल प्रभाव से पदच्युत कर राजकीय सेवा से बर्खास्त करने का आदेश दिया. आदेश की प्रति जिलाधिकारी कानपुर नगर तथा संबंधित कर्मचारी को तुरंत प्रेषित कर दी गई है.
यह मामला वर्ष 2025 में तब सुर्खियों में आया था जब आलोक दुबे को पहले कानूनगो से पदावनत कर लेखपाल बनाया गया था. उसके बाद भी विभागीय जांच और अपील प्रक्रिया चलती रही. अब मंडलायुक्त के इस अंतिम फैसले से विभाग में साफ-सफाई की मुहिम को नई गति मिली है. प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि ऐसे मामलों में भविष्य में भी कोई ढील नहीं बरती जाएगी.
ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं।




