प्रसिद्ध फिल्म वेलकम में फिरोज खान का एक डायलॉग बड़ा फेमस हुआ था ‘अभी हम जिंदा है…उसी तर्ज पर ईरान के सुप्रीम लीडर को लेकर भी कई तरह की कांस्प्रेसी थ्योरी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामनेई को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में बड़ी और सनसनीखेज रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं। दावा किया जा रहा है कि संयुक्त राष्ट्र अमेरिका, इजराइल हमले में उनकी मौत हो गई। लेकिन 48 घंटे से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी ना तो उनके शव की कोई आधिकारिक तस्वीर सामने आई है ना ही अंतिम संस्कार को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी दी गई है। सवाल उठ रहा है अगर यह खबर सच है तो उनका शव आखिर कहां है? कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिक हमले के वक्त खामने अपने सरकारी आवास पर बैठक कर रहे थे। बताया जा रहा है कि हमले में मौके पर ही उनकी मौत हो गई। हालांकि ईरान की ओर से अब तक इस दावे की औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि ऐसी घटनाओं में आधिकारिक बयान सबसे महत्वपूर्ण होते हैं और फिलहाल तेहरान की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
शव को लेकर क्या कहा जा रहा है?
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा भी सामने आया है कि हमले के बाद मलबे से शव को निकाला गया और उसकी तस्वीर ली गई। रिपोर्ट्स में यहां तक कहा गया कि अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतननियाहू को यह तस्वीर दिखाई गई। लेकिन इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है। ना तो अमेरिका ने आधिकारिक रूप से तस्वीर जारी की है और ना ही इजराइल ने कोई स्पष्ट बयान दिया है। यानी फिलहाल यह सब दावों और कयासों के दायरे में है।
ईरान की चुप्पी, रणनीति या मजबूरी
ईरान के लिए सुप्रीम लीडर सिर्फ राजनीतिक प्रमुख नहीं बल्कि धार्मिक और वैचारिक प्रतीक भी हैं। अगर वाकई ऐसी घटना हुई है तो क्या सुरक्षा कारणों से जानकारी रोकी जा रही है या उत्तराधिकार की प्रक्रिया पूरी होने तक घोषणा टाली जा रही है या फिर यह पूरी खबर ही गलत है। यह भी संभव है कि जंग के हालात में अंतिम संस्कार को सार्वजनिक रूप से आयोजित करना जोखिम भरा हो। गैर आधिकारिक चर्चाओं में दो जगहों का नाम सामने आ रहा है। पहला तेहरान ईरान के पहले सुप्रीम लीडर रूहुल्ला खाम नई को भी तेहरान में दफनाया गया था। दूसरा मशहद। यह शहर शिया समुदाय के लिए पवित्र माना जाता है। लेकिन अभी तक ईरानी सरकार ने कोई तारीख स्थान या कार्यक्रम घोषित नहीं किया है। कुछ विश्लेषक यह भी मान रहे हैं कि जंग की स्थिति सामान्य होने तक अंतिम संस्कार टाला जा सकता है। मिडिल ईस्ट में कई बार बड़े नेताओं के अंतिम संस्कार सुरक्षा कारणों से देरी से हुए हैं। उदाहरण के तौर पर हिजबुल्लाह प्रमुख हसन नसरुल्लाह के मामले में भी अंतिम संस्कार को लेकर समय और स्थान को लेकर सख्त सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। ऐसे में ईरान अगर देरी करता है तो इसे असामान्य नहीं कहा जा सकता।
खामनेई के अंतिम संस्कार को लेकर इस समय तीन संभावनाएं हैं। ईरान आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट करें। उत्तराधिकार की घोषणा के साथ अंतिम संस्कार की तारीख सामने आए या फिर यह पूरी कहानी किसी बड़े मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा निकले। जब तक ठोस आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आती तब तक हर रिपोर्ट को सावधानी से देखना होगा। खामई के कथित निधन और उनके शव को लेकर रहस्य ने पूरे मिडिल ईस्ट की राजनीति को और जटिल बना दिया है। क्या सच में उनकी मौत हुई है? ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। अगर हुई है तो अंतिम संस्कार कब और कहां होगा?




