Tuesday, March 3, 2026
Politics

US Global Dominance |13 राज्यों वाला अमेरिका कैसे बना 50 स्टेट वाला देश?|Teh Tak Chapter 3

US Global Dominance |13 राज्यों वाला अमेरिका कैसे बना 50 स्टेट वाला देश?|Teh Tak Chapter 3
करीब ढाई हजार साल पहले प्राचीन ग्रीस में दो महाशक्तियों के बीच एक भयानक युद्ध छिड़ गया। एक तरफ था एथेंस, जो उस समय की समुद्री महाशक्ति माना जाता था। दूसरी ओर था स्पार्टा, जो ज़मीनी ताकत और सैन्य शक्ति के लिए प्रसिद्ध था। उस दौर में कई अन्य छोटे-छोटे नगर-राज्य भी थे, लेकिन शक्ति और प्रभाव के मामले में वे एथेंस और स्पार्टा से काफी पीछे थे। इसलिए कुछ राज्यों ने एथेंस का साथ दिया, तो कुछ ने स्पार्टा का समर्थन किया। इन्हीं के बीच एक छोटा-सा द्वीप राज्य था — मिलोस। मिलोस ने फैसला किया कि वह इस युद्ध में हिस्सा नहीं लेगा। उसने घोषणा की कि वह किसी भी पक्ष का समर्थन नहीं करेगा और पूरी तरह तटस्थ रहेगा। समय के साथ युद्ध और भी भीषण होता गया। दोनों महाशक्तियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा, लेकिन कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं था। इसी दौरान एथेंस की सेना मिलोस के दरवाजे पर पहुंच गई। मिलोस को संदेश दिया गया या तो आत्मसमर्पण करो और एथेंस का साथ दो, या फिर हम तुम्हें बलपूर्वक अपने अधीन कर लेंगे। मिलोस ने हैरानी से पूछा कि जब हमने तटस्थ रहने की घोषणा की है और किसी का साथ नहीं दिया, तो हमारे खिलाफ यह ज़बरदस्ती क्यों?
इस पर एथेंस की ओर से एक पंक्ति में जवाब मिला शक्तिशाली वही करता है जो वह चाहता है, और कमजोर को वही सहना पड़ता है। आज भी, ढाई हजार साल बाद भी अंतरराष्ट्रीय राजनीति में वही नियम लागू होता दिखाई देता है। जहाँ एक या दो महाशक्तियाँ मिलकर दुनिया को अपने तरीके से चलाती हैं, और बाकी देशों के पास उनके इशारों पर चलने के अलावा कोई विकल्प बचता नहीं है। जैसा कि हाल ही में अमेरिका ने डोनाल्ड ट्रंप की सरकार के तहत वेनेज़ुएला के नेतृत्व पर क़ब्ज़ा किया और वहाँ के कच्चे तेल की सप्लाई पर नियंत्रण जमा लिया। फिर अमेरिका और इजरायल ने ईरान के सुप्रीम ली़डर अयातुल्लाह अली खामनेई को मार दिया। दुनिया एक बार फिर से बर्बादी के दरवाजे पर खड़ी कर दी गई है। दुनियाभर के ग्लोबल लीडर लोकल लीडर की तरह ट्रंप और नेतन्याहू के आगे बीन बजाते नजर आ रहे हैं। 

ट्रंप के खौफ से सब चुप

ट्रंप ने खामनेई की मौत के बादल दुनिया को संबोधित नहीं किया। हमले के वक्त वो व्हाइट हाउस में भी नहीं थे। अपने प्राइवेट आवास मारा-लागो के क्लब में पार्टी में व्यस्त थे और गॉ़ड ब्लेस अमेरिका की धुन पर नाच रहे थे। उसके बीच से ट्रंप ने खामनेई को मारे जाने की जानकारी सोशल मीडिया के जरिए दी। ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, फ्रांस, कनाडा, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात तुर्की के राष्ट्रपति के बयान पर नजर डालें। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी जिनके वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में दिए एक बयान ट्रंप के विरोध में और दुनिया में व्यवस्थाओं के खत्म होने की चिंता से भरा था। वही कार्नी अब ईरान पर ट्रंप के हमले का समर्थन कर रहे हैं। ईरान पर हमला अमेरिका और इजरायल ने किया लेकिन अलग अलग देशों के प्रमुखों ने ईरान की निंदा कर दी। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम दुनिया की शांति के लिए खतरा है। कनाडा के पीएम कार्नी भी परमाणु कार्यक्रम के नाम पर अमेरिका का सपोर्ट कर रहे हैं। कुल मिलाकर देखें तो ट्रंप अब हर हफ्ते साबित करते हैं कि दुनिया के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री केवल वही हैं। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। बाकी अलग अलग देशों में तो राष्ट्र प्रमुखों की फ्रेंचाइजी अलग अलग नेताओं ने उनसे ही ले रखी है।

ईरान के सहारे ट्रंप ने चीन को उसकी जगह दिखा दी

इन सब के बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग पर गौर करें। अमेरिका की निंदा करने में तो चीन का जवाब नहीं। लेकिन जब बात अमेरिका की आती है, चीन नजर नहीं आता है। चीन की उभरती आर्थिक और सैनिक ताकत से दुनिया हर दिन हैरान होती है। लेकिन चीन का कोई रोल इस वक्त नजर नहीं आ रहा है। किसी भी बड़े युद्ध के समय चीन पीछे ही नजर आता है। उसके पास अपनी सुरक्षा के लिए जंग लड़ने के लिए अपार क्षमता होगी। उसके पास रोबोट बहुत सारे होंगे। लेकिन चीन के पास इसकी क्षमता नहीं कि अपनी ताकत के इस्तेमाल से अमेरिका को रोक दे। शी जिनपिंग के शासन में चीन इतना शक्तिशाली नजर आता है, जितना इससे पहले इतिहास में कभी नहीं नजर आया। लेकिन इसी समय चीन प्रभावहीन भी नजर आता है। शी जिनपिंग बीजिंग में अपने हथियारों-सैनिकों का शानदार प्रदर्शन दुनिया को दिखाते रहे। लेकिन उनकी सेना और रोबोट टीम की सेना में कोई फर्क नहीं जो दुनिया को हैरान तो करती है। लेकिन जंग के मोर्च पर नजर नहीं आती है। खामनेई की हत्या से उत्साहित अमेरिका चीन के लिए अच्छी खबर नहीं। मध्यपूर्व में उसके विस्तार की नीति को गहरा झटका पहुंचेगा। ट्रंप ने ईरान के सहारे चीन को उसकी जगह भी दिखा दी। चीन की ताकत को लेकर ग्लोबल ऑर्डर के बदल  जाने के बहुत सारे लेख आपको दिख जाएंगे।

सेना भेज कर राज्यों पर किया कब्जा

अमेरिका धीरे-धीरे ताकतवर होता जा रहा था। यही वजह रही कि कई छोटे-छोटे प्रांतों ने अमेरिका के साथ जुड़ना पसंद किया। इनमें इलिनोइस, ओहायो और फ्लोरिडा जैसे नाम शामिल थे। जो प्रांत अमेरिका के साथ जुड़ना पसंद नहीं करते थे, वहां वो अपनी सेना भेजकर उस पर कब्जा कर लेता था। इसका उदाहरण कैलिफोर्निया नरसंहार है, जहां अमेरिकी सरकार के इशारे पर हजारों लोगों को मार डाला गया। वजह सिर्फ इतनी थी कि उन्होंने अमेरिका के आगे घुटने नहीं टेके थे। रूस से खरीदा अलास्का अमेरिका ने 1867 में रूस से 72 लाख डॉलर में अलास्का को भी खरीद लिया। उसके बाद किंगडम ऑफ हवाई, प्यूर्टो रिको और गुआम पर कब्जा कर लिया। आगे चलकर उसने स्पेन को दो करोड़ डॉलर देकर फिलीपींस खरीद लिया। लेकिन 1946 में फिलीपींस को अमेरिका से आजादी मिल गई।

अमेरिका का नक्शा बदलने वाले पांच बड़े फैसले

1803 में अमेरिका ने फ्रांस से खरीदा लुइसियाना
1819 में स्पेन से फ्लोरिडा 50 लाख डालर में खरीदा
1845 में अमेरिका ने टेक्सास को अपने साथ मिला लिया
1848 के युद्ध में अमेरिका ने मेक्सिको पर कब्जा कर लिया
1867 में अलास्का को 72 लाख डालर में रूस से खरीदा
me.sumitji@gmail.com

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