Tuesday, March 3, 2026
Crime

Google से बनाई हाईब्रिड फोटो, किसी और से दिलवाया रेलवे का पेपर, तीन जगह नौकरी भी की… 1.5 साल बाद कैसे फंसा बिहार का ‘मुन्नाभाई’?!

Google से बनाई हाईब्रिड फोटो, किसी और से दिलवाया रेलवे का पेपर, तीन जगह नौकरी भी की… 1.5 साल बाद कैसे फंसा बिहार का ‘मुन्नाभाई’?!
Google से बनाई हाईब्रिड फोटो, किसी और से दिलवाया रेलवे का पेपर, तीन जगह नौकरी भी की… 1.5 साल बाद कैसे फंसा बिहार का ‘मुन्नाभाई’?

बिहार के मुंगेर में सरकारी नौकरी की चाहत में दो युवकों ने ऐसा फर्जीवाड़ा किया कि जेल ही पहुंच गए. रेलवे में टेक्नीशियन बनने के लिए मुकेश कुमार और उसके पड़ोसी रंजीत कुमार ने जालसाजी का ऐसा ताना-बाना बुना कि एक साल तक सिस्टम को गुमराह किए रखा. लेकिन अंततः आधुनिक बायोमेट्रिक तकनीक के आगे उनकी चालाकी फेल हो गई और दोनों अब सलाखों के पीछे हैं.

कहानी शुरू होती है 2024 की रेलवे भर्ती से. मुंगेर के मुकेश कुमार ने टेक्नीशियन पद के लिए आवेदन किया, लेकिन उसे अपनी काबिलियत पर शक था. उसने अपने पड़ोसी और कोचिंग चलाने वाले रंजीत कुमार से संपर्क किया. सौदा तय हुआ- 6 लाख कैश के बदले रंजीत, मुकेश की जगह परीक्षा देगा.

गूगल और एडिटिंग से बनाई हाइब्रिड फोटो

इस फ्रॉड की सबसे हैरान करने वाली बात थी हाइब्रिड फोटो. पकड़े जाने के डर से दोनों ने गूगल और एडिटिंग टूल्स का इस्तेमाल करके मुकेश और रंजीत के चेहरों को आपस में मिला दिया. ऐसी फोटो तैयार की गई जो दोनों से थोड़ी-थोड़ी मेल खाती थी. अगर कभी सवाल उठता, तो वे इसे उम्र के साथ चेहरे में बदलाव का नाम दे देते. इसी फोटो के सहारे रंजीत ने पटना में कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) दी और फिर भोपाल में मेडिकल टेस्ट भी पास कर लिया.

ड्यूटी पर तैनात और ट्रेनिंग तक पहुंचा सफर

जुलाई 2025 में मुकेश का चयन हो गया. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। उसने दमोह, सागर और जबलपुर जैसे महत्वपूर्ण रेल मंडलों में काम भी किया. अक्टूबर 2025 में उसे ट्रेनिंग के लिए प्रयागराज भेजा गया. आरोपियों को लगा कि वे सुरक्षित हैं, लेकिन उन्हें रेलवे के कुछ नियम पता नहीं थे, जिसने वो पकड़े गए.

बायोमेट्रिक्स ने कैसे बिगाड़ा खेल?

रेलवे के नियमों के तहत नए कर्मचारियों का एक साल के भीतर रैंडम बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन अनिवार्य है. 14 नवंबर 2025 को जब मुकेश का अंगूठा और चेहरे का स्कैन किया गया, तो वह भर्ती के समय दर्ज किए गए डेटा (जो रंजीत का था) से मैच नहीं हुआ. पोल खुलते ही मुकेश मौके से फरार होकर बिहार भाग गया.

CBI का शिकंजा और गिरफ्तारी

जबलपुर सीबीआई (CBI) की टीम ने मुंगेर में छापेमारी कर मुकेश को दबोच लिया. उसकी निशानदेही पर कोचिंग संचालक रंजीत कुमार को भी गिरफ्तार किया गया. अब जांच इस ओर मुड़ गई है कि क्या रंजीत ने पहले भी कई मुन्नाभाइयों को सिस्टम में घुसाया है.

आधार और बायोमेट्रिक्स का सुरक्षा कवच

इस घटना ने आधार और बायोमेट्रिक डेटा की मजबूती को फिर से साबित किया है. सरकारी डेटाबेस में सेंध लगाना अब नामुमकिन सा है. UIDAI के नियमों के मुताबिक, पता ऑनलाइन या सेंटर पर कितनी भी बार अपडेट किया जा सकता है (₹100 शुल्क). फोटो अपडेट की कोई सीमा नहीं है, लेकिन इसके लिए आधार सेंटर जाकर लाइव बायोमेट्रिक देना अनिवार्य है. हर बड़े बदलाव या नौकरी के वेरिफिकेशन के समय बायोमेट्रिक मिलान ही असली और नकली के बीच का अंतर स्पष्ट करता है.

me.sumitji@gmail.com

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