उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उधम सिंह नगर के एक युवक के खिलाफ दर्ज पॉक्सो मामले की कार्यवाही रद्द कर दी है. अदालत ने कहा कि यह मामला वासना का नहीं, बल्कि आपसी प्रेम का था और अब दोनों कानूनी रूप से शादीशुदा हैं.

Udham Singh Nagar News: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उधम सिंह नगर के एक 21 साल के युवक के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) मामले की कार्यवाही को रद्द कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि यह मामला ‘वासना नहीं, बल्कि प्रेम से जुड़ा’ था और अब दोनों कानूनी रूप से शादीशुदा हैं और बच्चा होने वाला है.
न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकल पीठ ने 20 फरवरी को यह आदेश दिया. अदालत ने उधम सिंह नगर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की फास्ट ट्रैक कोर्ट में लंबित कार्यवाही को खत्म करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने कहा कि अगर अभियोजन या सजा जारी रहती है तो इससे परिवार की एकता प्रभावित होगी.
क्या है पूरा मामला?
इस मामले में लड़की के पिता ने 17 अक्टूबर 2022 को एफआईआर दर्ज कराई थी. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसमें आईपीसी की धारा 376 (बलात्कार) और 363 (अपहरण) के साथ पॉक्सो एक्ट की धाराएं लगाई गई थीं. उस समय युवक की उम्र 19 साल और लड़की की उम्र 17 साल थी. युवक को दिसंबर 2022 में गिरफ्तार किया गया था और कई महीनों तक हिरासत में रहने के बाद उसे 2023 में जमानत मिली थी.
आवेदक के वकील ने अदालत में कहा कि एफआईआर दर्ज होने के वक्त लड़की 17 साल से ज्यादा की थी और अपने फैसलों के नेचर और नतीजों को समझने में सक्षम थी.
- उन्होंने यह भी कहा कि दोनों के बीच संबंध आपसी सहमति से था. एफआईआर के बाद दोनों ने अपनी मर्जी से शादी कर ली और अब पति-पत्नी के रूप में साथ रह रहे हैं.
- बचाव पक्ष ने अदालत को यह भी बताया कि लड़की गर्भवती है.
- उनका कहना था कि अगर आपराधिक कार्यवाही जारी रहती है तो इससे उनकी शादीशुदा ज़िंदगी और होने वाले बच्चे की हेल्थ पर बुरा असर पड़ेगा.
- राज्य पक्ष के वकील ने इस याचिका का विरोध किया और उन्होंने कहा कि पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध गंभीर होते हैं और केवल समझौते के आधार पर इन्हें रद्द नहीं किया जा सकता.
- राज्य पक्ष के वकील ने इस दौरान सुप्रीम कोर्ट की हाल की टिप्पणियों का हवाला भी दिया
- हालांकि, हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि दोनों शांतिपूर्वक साथ रह रहे हैं और स्थिर वैवाहिक जीवन जी रहे हैं.
- अदालत ने कहा कि इन परिस्थितियों में कार्यवाही जारी रहने दी जाती है, तो यह न्याय से वंचित करने जैसा होगा. इसलिए यह अदालत सही और मीनिंगफुल जस्टिस करने के लिए अपनी ताकत का इस्तेमाल करती है.
- पिटीशन को कबूल करते हुए अदालत ने ट्रायल कोर्ट में लंबित पूरी कार्यवाही को रद्द कर दिया.


