सीबीआई के पूर्व कार्यवाहक निदेशक एम नागेश्वर राव अब ज्योतिर्मठ पीठ के शंकराचार्च अविमुक्तेश्वरानंद विवाद की परतें खोलने में जुटे हैं. माघ मेला 2026 की घटना और प्रशासनिक भूमिका पर स्वतंत्र जांच से लगातार सुर्खियों में है.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ा शंकराचार्य विवाद इन दिनों नया मोड़ लेता दिख रहा है, और इसकी एक बड़ी वजह बनकर सामने आए हैं एम नागेश्वर राव. पूर्व CBI अंतरिम निदेशक रहे राव अब इस पूरे मामले की परतें खोलने में जुटे बताए जा रहे हैं, जिसे “विवाद की पूरी कुंडली” तैयार करना कहा जा रहा है. माघ मेला 2026 के घटनाक्रम, प्रशासनिक फैसलों और धार्मिक परंपराओं के टकराव के बीच यह मामला सिर्फ आस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जांच, दावे और सवालों का जटिल संगम बन गया है. ऐसे में यह जानना अहम हो जाता है कि आखिर एम नागेश्वर राव कौन हैं और इस विवाद में उनकी भूमिका क्यों चर्चा में है.
कौन हैं एम नागेश्वर राव?
एम नागेश्वर राव एक पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं, जो केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के अंतरिम निदेशक रह चुके हैं और अपनी सख्त कार्यशैली व बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं. वे 1986 बैच के ओडिशा कैडर के अधिकारी रहे हैं और कई हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच से जुड़े रहे हैं.
क्यों चर्चा में आए IPS राव?
हाल के दिनों में उनका नाम स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद में सामने आया है. कहा जा रहा है कि वे इस पूरे मामले की “कुंडली” यानी बैकग्राउंड, दस्तावेज़ और घटनाक्रम को व्यवस्थित तरीके से समझने और प्रस्तुत करने में लगे हैं.
क्या है अविमुक्तेश्वरानंद विवाद?
यह विवाद ज्योतिर्मठ (बद्रीनाथ पीठ) के शंकराचार्य पद को लेकर है, जहां लंबे समय से अलग-अलग पक्ष अपनी वैधता का दावा करते रहे हैं. हालिया आरोपों और घटनाओं के बाद यह मामला और ज्यादा गहरा गया है.
वाराणसी में बंद कमरे की बैठक में क्या हुआ?
वाराणसी के श्री विद्या मठ में एम नागेश्वर राव और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच करीब 25 मिनट तक मुलाकात हुई. शुरुआत में इसे सामान्य भेंट बताया गया, लेकिन बाद में सामने आया कि यह मुलाकात एक स्वतंत्र जांच से जुड़ी हो सकती है.
माघ मेला 2026 विवाद क्या है?
प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन हुए घटनाक्रम में शंकराचार्य की पारंपरिक पालकी यात्रा को रोके जाने का आरोप लगा. इससे धार्मिक परंपरा और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बनी.
जांच किस मुद्दे पर केंद्रित है?
जांच का फोकस 18 जनवरी 2026 की घटनाओं पर है. इसमें यह देखा जा रहा है कि उस दिन परिस्थितियां क्या थीं, प्रशासन की भूमिका क्या रही और विवाद किन कारणों से बढ़ा.
क्या यह धार्मिक बनाम प्रशासनिक टकराव है?
इस पूरे मामले को अब धार्मिक परंपरा और प्रशासनिक फैसलों के बीच टकराव के रूप में भी देखा जा रहा है, जहां दोनों पक्षों के अपने-अपने तर्क हैं.
राव की भूमिका क्या है?
एम नागेश्वर राव किसी आधिकारिक जांच एजेंसी की ओर से जांच नहीं कर रहे हैं, बल्कि एक पूर्व जांच अधिकारी के रूप में सिविल सोसाइटी के साथ मिलकर इस पूरे विवाद को तथ्यों और विश्लेषण के जरिए समझने की कोशिश कर रहे हैं.
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