
भारत की मिट्टी में प्राचीन काल से ही प्रकृति के अनमोल खजाने छिपे हैं। यहाँ के पेड़-पौधे न सिर्फ ऑक्सीजन और छाया देते हैं बल्कि बीमारियों से लड़ने की ताकत भी प्रदान करते हैं।आयुर्वेद और चरक संहिता जैसे ग्रंथों में इन वनस्पतियों के औषधीय गुणों का विस्तार से ज्ञान मिलता है।इन्हीं में से एक है सत्यानाशी का पौधा। इसे देसी दवाइयों की फैक्ट्री कहना गलत नहीं होगा। इसके फूल, पत्ते, तना और जड़ हर हिस्सा स्वास्थ्य के लिए वरदान साबित हो सकता है। आधुनिक विज्ञान भी अब इसकी ताकत को पहचान रहा है। तो आइए इस चमत्कारी पौधे की कहानी को करीब से जानते हैं।
सत्यानाशी को अंग्रेजी में ‘मेक्सिकन प्रिकली पॉपी’ कहते हैं। भारत में सदियों से औषधि के रूप में इस्तेमाल होता रहा है। यूएस नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस पौधे में शक्तिशाली औषधीय गुण मौजूद हैं। ये न सिर्फ संक्रमणों से लड़ने में मदद करता है बल्कि मेटाबॉलिक डिसऑर्डर जैसी समस्याओं को भी दूर करने की क्षमता रखता है। प्राचीन काल में तो इसका इस्तेमाल कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के इलाज के लिए भी किया जाता था। इसके तने और पत्तियों से तैयार मेथेनॉलिक अर्क को संजीवनी बूटी की संज्ञा दी जा सकती है, जो शरीर को नई ऊर्जा देता है।
इस पौधे के गुणों की लिस्ट इतनी लंबी है कि इसे प्रकृति का चमत्कार कहना बनता है। शोध बताते हैं कि इसमें एंटी-डायबिटिक, एंटी-इनफर्टिलिटी और एंटी-फंगल गुण मौजूद हैं। माना जाता है कि इसके पत्तों का अर्क बांझपन की समस्या को दूर करने में कारगर हो सकता है। आयुर्वेद में करीब 2000 सालों से यह पौधा पुरानी बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होता रहा है। ये नापुंसकता भी दूर कर सकता है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसके सेवन से नया जोश और जवानी जैसी ताकत नजर आने लगती है।
satyanashi leaves benefits: भारत की मिट्टी में प्राचीन काल से ही प्रकृति के अनमोल खजाने छिपे हैं। यहाँ के पेड़-पौधे न सिर्फ ऑक्सीजन और छाया देते हैं बल्कि बीमारियों से लड़ने की ताकत भी प्रदान करते हैं। आयुर्वेद और चरक संहिता जैसे ग्रंथों में इन वनस्पतियों के औषधीय गुणों का विस्तार से ज्ञान मिलता है।



