
Who Is Susan Rice: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मांग की है कि नेटफ्लिक्स अपने बोर्ड से सुसान राइस को हटा दे. यह मांग ऐसे समय पर आई है जब नेटफ्लिक्स एक बड़े मर्जर के लिए मंजूरी लेने की कोशिश कर रहा है. कंपनी Warner Bros. Discovery के साथ डील प्लान कर रही है, जिस पर रेगुलेटर्स कड़ी नजर रखे हुए हैं. ट्रंप की यह टिप्पणी सिर्फ एक कॉरपोरेट फैसला नहीं, बल्कि अब एक खुला राजनीतिक विवाद बन चुकी है. इससे नेटफ्लिक्स पर पॉलिटिकल प्रेशर भी बढ़ गया है.
कौन हैं सुसान राइस?
सुसान राइस अमेरिका की जानी-मानी डेमोक्रेटिक नेता और फॉरेन पॉलिसी एक्सपर्ट रही हैं. उन्होंने तीन अमेरिकी राष्ट्रपतियों- बिल क्लिंटन, बराक ओबामा और जो बाइडन के साथ काम किया है. Obama के कार्यकाल में वे अमेरिका की संयुक्त राष्ट्र में राजदूत बनीं और इस पद पर पहुंचने वाली पहली अश्वेत महिला थीं. बाद में वे नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर भी रहीं. Biden सरकार में उन्होंने Domestic Policy Council की जिम्मेदारी संभाली. उनका जन्म वॉशिंगटन डी.सी. में हुआ और उन्होंने Stanford University से इतिहास की पढ़ाई की. सरकारी सेवा में आने से पहले वे McKinsey & Company में मैनेजमेंट कंसल्टेंट भी रह चुकी हैं.
विवाद क्यों बढ़ा?
हाल ही में एक पॉडकास्ट में सुसान राइस ने कंपनियों को चेतावनी दी कि वे ट्रंप के साथ बहुत ज्यादा झुककर न चलें और कानून तोड़कर उनका पक्ष लेने की कोशिश न करें. उन्होंने कहा कि अगर भविष्य में सत्ता बदली, तो ऐसी कंपनियों को जवाबदेह ठहराया जा सकता है. उनकी यह टिप्पणी ट्रंप और उनके समर्थकों को पसंद नहीं आई. इसके बाद ट्रंप ने नेटफ्लिक्स पर निशाना साधते हुए कहा कि कंपनी को Rice को बोर्ड से हटाना चाहिए.
नेटफ्लिक्स के लिए मुश्किल समय
यह पूरा विवाद ऐसे वक्त सामने आया है जब नेटफ्लिक्स एक बड़े मर्जर के लिए मंजूरी चाहता है. अमेरिका में एंटीट्रस्ट कानूनों के तहत बड़ी डील्स की गहन जांच होती है. ऐसे में अगर कंपनी राजनीतिक विवाद में फंसती है, तो मंजूरी की प्रक्रिया और संवेदनशील हो सकती है. यह सिर्फ “किसी को नौकरी से निकालो” वाली बात नहीं है. यहां मामला पॉलिटिक्स, कॉरपोरेट गवर्नेंस और बिजनेस डील तीनों का मिक्स है.
क्या पहले भी रही हैं विवादों में?
सुसान राइस पहले भी राजनीतिक आलोचनाओं का सामना कर चुकी हैं. 2012 के Benghazi हमले के बाद उनके बयान को लेकर सवाल उठे थे. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। 2016 चुनाव के दौरान इंटेलिजेंस “अनमास्किंग” मामले में भी उनका नाम चर्चा में आया था. हालांकि बाद में कई जांचों में उन्हें किसी गलत काम से क्लियर कर दिया गया.






