
चूहों को मारने के लिए बाजार में तमाम प्रोडक्ट्स उपलब्ध हैं लेकिन ऐसे लोगों की बड़ी संख्या है जो चूहों को मारना नहीं भगाना चाहते हैं। कानपुर की मंडियों में चूहे भगाने के इंतजाम पर हर महीने 20 से 25 हजार रुपये खर्च होंगे। एजेंसी केमिकल छिड़ककर चूहों को मंडी से भगा देगी।
चूहे न केवल नुकसान बल्कि बीमारियों की वजह भी बनते हैं। घर-परिवारों में तो लोग इनसे परेशान होते ही हैं किसानों-व्यापारियों के लिए भी ये बड़ी परेशानी का सबब हैं। चूहों को मारने के लिए बाजार में तमाम प्रोडक्ट्स उपलब्ध हैं लेकिन ऐसे लोगों की बड़ी संख्या है जो चूहों को मारना नहीं भगाना चाहते हैं। उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर की मंडियों में चूहों के आतंक का मुद्दा शुक्रवार को उद्योग-व्यापार बंधु की बैठक में छाया रहा। उद्यमियों ने करोड़ों के नुकसान की पीड़ा बताई तो डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने चूहों से जल्द राहत दिलाने को कहा। नौबस्ता गल्ला मंडी सचिव विजयन बलियान ने बताया कि चूहे भगाने के लिए एजेंसी रखी जाएगी। यह एजेंसी केमिकल छिड़ककर चूहों को भगाएगी।
एजेंसी चुनने के लिए टेंडर प्रक्रिया दो-तीन दिन में शुरू होगी। चूहे भगाने के इस इंतजाम पर हर महीने 20 से 25 हजार रुपये खर्च होंगे। एजेंसी केमिकल छिड़ककर चूहों को मंडी से भगा देगी। ज्ञानेश मिश्रा ने बताया कि मंडी में सालाना दो करोड़ रुपये का नुकसान चूहे कर रहे हैं। सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में हुई बैठक में डीएम ने कहा कि औद्योगिक और व्यापारिक क्षेत्रों की समस्याएं किसी भी स्थिति में लंबित नहीं रहनी चाहिए। फीटा के महासचिव उमंग अग्रवाल और अन्य उद्यमियों ने एलएलआर तिराहे के पास अंडरपास की ग्रीन बेल्ट में दोबारा अतिक्रमण का मुद्दा उठाया। गोविंदपुरी रेलवे स्टेशन मार्ग पर बीच सड़क लगे ट्रांसफार्मर से अवरुद्ध आवागमन का मामला प्रमुखता से उठा। बैठक में डीसीपी ट्रैफिक रविंद्र कुमार, प्रभारी एडीएम सिटी आलोक कुमार गुप्ता, उपायुक्त उद्योग अंजनीश प्रताप सिंह, उपायुक्त जीएसटी अफसर हुसैन आदि मौजूद रहे।
तीन सदस्यीय टीम करेगी निगरानी
डीएम ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/ एसडीएम सदर की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की। प्रत्येक परियोजना की आवश्यकता और उपयोगिता की समीक्षा करेगी। समिति की संस्तुति के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। झकरकटी बस अड्डे के सामने क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत के निर्देश दिए गए।
घरों-इमारतों और फसलों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं चूहे
चूहे सिर्फ मंडी में व्यापारियों को ही परेशान नहीं कर रहे बल्कि ये घरों, इमारतों और फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचाते हैं। चूहों अपने दांतों से लकड़ी, कंक्रीट, स्टील और प्लास्टिक तक काट सकते हैं। इससे घर के स्ट्रक्चर और वायरिंग को नुकसान पहुंचता है। खेतों में ये बड़े पैमाने पर फसलों को बर्बाद कर डालते हैं। कुतरने की अपनी आदत के चलते चूहे बिजली के तार, पाइप, फर्नीचर, दस्तावेज और कपड़े बर्बाद कर डालते हैं। आग लगने का खतरा भी बढ़ जाता है। चूहे, स्वास्थ्य के लिए भी बेहद खतरनाक हैं। इनके मल-मूत्र से कई गंभीर बीमारियां भी फैलती हैं।
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