
नई दिल्ली: देश के कई बड़े कॉर्पोरेट अधिकारी इनकम टैक्स विभाग के रडार पर आ गए हैं। ये वो अधिकारी हैं जिनकी सालाना कमाई 50 लाख रुपये से ज्यादा है। इन पर अपनी इनकम कम दिखाने और गलत तरीके से टैक्स छूट का फायदा उठाने का आरोप है। टैक्स विभाग ने ऐसे कई टॉप एग्जीक्यूटिव्स को नोटिस भेजे हैं। इनमें बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों के CEO और MDs भी शामिल हैं। विभाग ने उन्हें चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने अपनी गलतियों को नहीं सुधारा, तो उन पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
आयकर विभाग ने इन अधिकारियों को विदेशी संपत्ति और कमाई का खुलासा न करने, स्टॉक से होने वाली कमाई को कम बताने और हाउसिंग व ट्रैवल अलाउंस जैसे भत्तों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के आरोप में नोटिस भेजे हैं। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इकनॉमिक टाइम्स के अनुसार इन सब तरीकों से वे अपनी टैक्स देनदारी को कम करने की कोशिश कर रहे थे।
किन सेक्टर्स के अधिकारी निशाने पर?
टैक्स विभाग ने हॉस्पिटैलिटी, आईटी, एफएमसीजी, इंजीनियरिंग, कंस्ट्रक्शन और ऑटोमोबाइल जैसे कई बड़े सेक्टर्स के अधिकारियों को नोटिस भेजे हैं। कई स्टार्टअप्स के बड़े लीडर्स भी अब टैक्स विभाग की जांच के दायरे में आ गए हैं।
अधिकारियों ने बताया कि ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने धार्मिक संस्थानों, चैरिटेबल ट्रस्टों या एजुकेशनल संस्थानों में दान देने के नाम पर टैक्स में छूट का फायदा उठाया, जबकि असल में ऐसा कोई दान हुआ ही नहीं था।
क्रिप्टोकरेंसी में मोटी सैलरी
एक सीनियर अधिकारी ने बताया, ‘हमारे पास दो दर्जन से ज्यादा ऐसे मामले हैं जहां अधिकारियों ने महंगी प्रॉपर्टी खरीदीं। 50 से ज्यादा ऐसे लोग हैं जिन्हें विदेशी क्लाइंट्स से क्रिप्टोकरेंसी में मोटी सैलरी मिली। कुछ ने तो ऐसी राजनीतिक पार्टियों को भी भारी चंदा दिया है जो न तो मान्यता प्राप्त हैं और न ही चुनाव लड़ रही हैं।’
कैसे हुआ खुलासा?
यह सब तब सामने आया जब इनकम टैक्स विभाग ने इस साल हाई-इनकम वाले लोगों के इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) की गहन जांच की। अपने ‘Nudge’ (Non-intrusive Usage of Data to Guide and Enable) अभियान के तहत विभाग ने कई अधिकारियों से अपने ITR को रिवाइज करने के लिए कहा है।
एक ही CA, एक ही दान
एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। जिन लोगों के चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) एक ही थे, वे सभी एक ही संस्थानों को दान दे रहे थे। इस पर टैक्स विभाग ऐसे चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के खिलाफ भी अलग से कार्रवाई कर रहा है।
यह कार्रवाई सरकार के टैक्स नियमों का पालन कराने और डेटा-आधारित प्रवर्तन को मजबूत करने के बड़े अभियान का हिस्सा है। हाल के सालों में, विभाग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके घोषित आय, टीडीएस रेकॉर्ड और तीसरे पक्ष के वित्तीय डेटा के बीच की विसंगतियों को पकड़ा है।



