Friday, February 20, 2026
IndiaPoliticsTrending

बीवी को पीटना गैरकानूनी नहीं! बस हड्डी नहीं टूटनी चाहिए, तालिबान के इस कानून से पाकिस्तान में पसरा सन्नाटा

पाकिस्तान की हर बेगम इन दिनों खौफ में है। डर सिर्फ तालिबान का नहीं बल्कि खौफ नए तालिबानी कानून का है। सुनने में आपको यह कोई पुरानी खबर लग रही होगी कि अफगानिस्तान में तालीबानियों के राज में यह भला कौन सी नई बात है। पहले भी ऐसी खबरें आई हैं जिसमें महिलाओं को सरेआम कोड़े मारने, पत्थर से मारने और यहां तक कि सिर कलम करने जैसी घटनाएं खुलेआम होती हैं। ऐसी सजाओं से भला कौन खौफ नहीं खाएगा। लेकिन अफगानी बेगमों का यह खौफ ऐसी सख्त अमानवीय सजाओं तक सीमित नहीं बल्कि डर है हर रोज पीटे जाने का। अफगानिस्तान में काला कानून बीवी को पीटना गैरकानूनी नहीं। 90 पेज का तालीबानी फरमान बीवियों को पीटो बस जख्म ना दिखे। यानी तालीबानियों का अफगानिस्तान एक ऐसा मुल्क हो गया है जहां एक छोटी सी शर्त पूरी कर ली तो औरतों को पीटना कानूनी अपराध नहीं।

इस नए फरमान ने घरेलू हिंसा को एक अलग तरह से लीगल कर दिया है। अब इस देश में मर्दों को खुलेआम अपनी बीवियों पर हाथ उठाने की इजाजत मिल गई है। बस एक छोटी सी शर्त रखी गई है। तालीबान के नए कानून के मुताबिक एक पति अपनी पत्नी और बच्चों को शारीरिक सजा दे सकता है। इसमें चौंकाने वाली शर्त यह है कि मारपीट तब तक कानूनी है जब तक कि उससे हड्डी ना टूटे या कोई खुला घाव ना हो। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। अगर पति बहुत ज्यादा ताकत का इस्तेमाल करता है और महिला की हड्डी टूट जाती है तब जाकर पति को अधिकतम 15 दिन की जेल हो सकती है।  इसके लिए भी पत्नी को अदालत में अपनी चोट साबित करनी होगी। अगर कोई शादीशुदा महिला अपने पति की इजाजत के बिना अपने रिश्तेदारों से मिलने जाती है तो उसे 3 महीने तक की जेल हो सकती है। 

तालिबानियों के सत्ता में आने से पहले अफगानिस्तान में घरेलू हिंसा से बचाव के लिए महिलाओं के लिए सख्त कानून थे। 2009 में बनाए गए इस कानून को एलिमिनेशन ऑफ वायलेंस अगेंस्ट वुमेन नाम दिया गया था। लेकिन तालिबान सरकार ने 17 साल पुराने कानून को रद्द कर दिया है। और विडंबना देखिए कि जिस अफगानिस्तान में महिलाओं को अकेले बाहर जाने की इजाजत नहीं वो पति की हिंसा के बाद कोर्ट कैसे जाएगी। यहां भी उसे अपने किसी रिश्तेदार को साथ ले जाना होगा और अगर चोट लगी है तो अदालत में उसे दिखाना होगा। लेकिन दूसरे तालीबानी कानूनों की वजह से कोई भी महिला ना तो भीड़ में बुर्का उतार सकती है ना कपड़े हटा सकती है तो फिर उन्हें हिंसा के बदले न्याय कैसे मिलेगा?
me.sumitji@gmail.com

Leave a Reply