बागपत में एक 6 साल की मासूम बच्ची के साथ पड़ोस के दो छात्रों ने ऐसी हैवानियत की जिसे सुनकर रूह कांप जाए। आठ दिनों तक चले इस खौफनाक खेल का राज तब खुला जब मासूम की हालत गंभीर हो गई।

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से मानवता को शर्मसार करने वाली एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने बच्चों की सुरक्षा और समाज की परवरिश पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बागपत कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में नर्सरी में पढ़ने वाली महज 6 साल की मासूम बच्ची के साथ पड़ोस में ही रहने वाले दो किशोरों ने दरिंदगी की सारी हदें पार कर दीं। यह हैवानियत एक-दो दिन नहीं, बल्कि पिछले आठ दिनों से लगातार जारी थी। मासूम बच्ची डर और सहम के कारण कुछ बोल नहीं पाई, लेकिन जब उसकी शारीरिक स्थिति बिगड़ने लगी, तब जाकर इस खौफनाक वारदात का पर्दाफाश हुआ। घटना की जानकारी मिलते ही पूरे इलाके में आक्रोश और गम का माहौल है।
खेल-खेल में मासूम को बनाया शिकार
पीड़िता के पिता द्वारा दी गई तहरीर के अनुसार, उनकी छह वर्षीय बेटी गांव के ही एक निजी स्कूल में नर्सरी की छात्रा है। मासूम अक्सर पड़ोस के बच्चों के साथ घर के बाहर खेलती रहती थी। इसी का फायदा उठाकर पड़ोस में रहने वाले कक्षा 7 और कक्षा 9 के दो छात्रों ने घिनौनी साजिश रची। करीब आठ दिन पहले, ये दोनों किशोर मासूम को बहला-फुसलाकर अपने घर (घेरे) में ले गए। वहां उन्होंने बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) किया। आरोपियों ने मासूम को इस कदर डरा दिया था कि उसने घर पर कुछ नहीं बताया। इसका फायदा उठाकर आरोपी पिछले एक सप्ताह से लगातार मासूम को अपनी हवस का शिकार बना रहे थे।
पेट दर्द और हालत बिगड़ने पर टूटी चुप्पी
सोमवार की देर शाम जब बच्ची के पेट में असहनीय दर्द हुआ और उसकी हालत बिगड़ने लगी, तब मां ने घबराकर उससे पूछताछ की। मां के दुलार और बार-बार पूछने पर मासूम फूट-फूटकर रो पड़ी और उसने आठ दिनों से झेली जा रही उस दरिंदगी का राज खोल दिया जिसे सुनकर परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। बच्ची ने बताया कि पड़ोस के ‘भैया’ उसे साथ ले जाते थे और उसके साथ ‘गंदा काम’ करते थे। मासूम की आपबीती सुनकर परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और वे तुरंत उसे लेकर कोतवाली पहुंचे।
पुलिस की कार्रवाई और मेडिकल परीक्षण
घटना की गंभीरता को देखते हुए बागपत पुलिस ने बिना देरी किए त्वरित कार्रवाई शुरू की। कोतवाली प्रभारी बृजेश कुमार ने बताया कि पिता की तहरीर के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दोनों आरोपी बाल अपचारियों (Minor accused) को उनके घर से हिरासत में ले लिया है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि पीड़ित छात्रा को मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा गया है और उसकी सुरक्षा व इलाज के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। चूंकि आरोपी नाबालिग हैं, इसलिए नियमानुसार उन्हें बाल सुधार गृह भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अपराधी की कोई उम्र नहीं होती और अब वक्त आ गया है कि समाज बच्चों को ‘गुड टच’ और ‘बैड टच’ के प्रति और अधिक जागरूक करे।





