Tuesday, February 17, 2026
Crime

‘मेरी बच्ची है, मैं जो चाहे करूं…’, मुजफ्फरपुर में बेटी के स्कूल बैग में ईंटें भरीं, फिर पीटते हुए ले गई मां!

‘मेरी बच्ची है, मैं जो चाहे करूं…’, मुजफ्फरपुर में बेटी के स्कूल बैग में ईंटें भरीं, फिर पीटते हुए ले गई मां!
‘मेरी बच्ची है, मैं जो चाहे करूं…’, मुजफ्फरपुर में बेटी के स्कूल बैग में ईंटें भरीं, फिर पीटते हुए ले गई मां!

मुजफ्फरपुर शहर से मानवता को झकझोर देने वाला एक वीडियो सामने आया है. मिठनपुरा चौक इलाके का बताया जा रहा यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक स्कूली बच्ची के साथ उसकी मां द्वारा की जा रही कथित क्रूरता ने लोगों को आक्रोशित कर दिया है.

वीडियो में साफ दिख रहा है कि स्कूल यूनिफॉर्म पहने एक मासूम बच्ची भारी बैग ढोते हुए सड़क पर चलने की कोशिश कर रही है. बोझ इतना अधिक है कि वह बार-बार लड़खड़ाती है, रुकती है और रो पड़ती है. राहगीरों को जब बच्ची की हालत पर शक हुआ तो उन्होंने हस्तक्षेप किया. बैग खुलवाने पर उसमें किताब-कॉपी के साथ चार ईंटें मिलीं. ये देख मौके पर मौजूद लोग सन्न रह गए.

बताया जा रहा है कि बच्ची के साथ चल रही महिला उसकी मां है. वीडियो में महिला बच्ची को डांटते, झिड़कते और थप्पड़ मारते हुए नजर आ रही है. जब लोगों ने इसका विरोध किया तो महिला ने साफ-साफ लफ्जों में कहा- मेरी बच्ची है, मैं जो चाहे करूं जिसे फोन करना है कर लीजिए. विरोध बढ़ने पर उसने बच्ची को बीच सड़क पर थप्पड़ जड़ दिया. गाल पकड़कर रोती बच्ची को देखकर भी उसका दिल तक नहीं पसीजा.

बच्ची को घसीटते हुए ले गई

घटना के दौरान सड़क पर भीड़ जमा हो गई. कुछ लोगों ने समझाने की कोशिश की, तो कुछ ने बच्ची को ढांढस बंधाया. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। जब लोगों ने पूछा कि इतनी कठोर सजा क्यों दी जा रही है, तो महिला ने कहा- यही समाधान है. विरोध करने वालों से वह उलझ पड़ी और अंततः बच्ची को घसीटते हुए वहां से ले गई.

लोगों मे की कार्रवाई की मांग

वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर आक्रोश फैल गया. लोग इसे स्पष्ट रूप से बाल उत्पीड़न का मामला बताते हुए प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. कई लोगों ने सवाल उठाया है कि सार्वजनिक स्थान पर एक मासूम के साथ इस तरह की हिंसा कैसे बर्दाश्त की जा सकती है?

यह घटना केवल एक परिवार का मामला नहीं, बल्कि समाज के लिए चेतावनी है. अनुशासन और क्रूरता के बीच की रेखा जब मिट जाती है, तब मासूमियत कुचल जाती है. अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि बच्ची की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर उचित कार्रवाई हो, ताकि यह स्पष्ट संदेश जाए कि बच्चों पर बोझ जिम्मेदारियों का होता है, ईंटों का नहीं.

me.sumitji@gmail.com

Leave a Reply