
Valentine Day 2026: प्यार का शब्द केवल ढाई अक्षर का होता है, लेकिन इसका खूमार ऐसा कि यह पूरा जीवन बदल दे. प्यार न सरहदें देखता है, ना मजहब की दीवार आने से रोकता है. मोहब्बत में पड़े किसी भी व्यक्ति को क्या पता कब शाम हुई और कब सुबह. इस पवित्र त्योहार को मानाने का एक खास दिन है 14 फरवरी, जिसको दुनिया में वैलेनटाइन डे के तौर पर जाना जाता है. इस खास दिन प्रेमी-प्रेमिका अपने अपने मोहब्बत का इजहार करते हैं, तो दूसरी ओर वह एक दूसरे से तमाम वादे करते हैं. इश्क को अक्सर लोग एक जादू करार देते हैं, लेकिन विज्ञान की दृष्टि में कुछ अलग राय है. आइए आपको इसके बारे में बताते हैं…
आम तौर पर आपने सुना होगा कि हर वैलेंटाइन डे पर दिल की धड़कनें तेज़, पेट में गुदगुदी और हवा में प्यार घुलने की बात की जाती है. हालांकि, विज्ञान में राय थोड़ी अलग है. मोहब्बत का एहसास भले आपको जादुई लगे, लेकिन असल में इसकी शुरुआत दिमाग के अंदर होने वाली रासायनिक प्रक्रिया से होती है. सामान्य भाषा में कहें, तो प्यार एक जादू कम और विज्ञान अधिक है.
क्या है शोधकर्ताओं की राय?
रिपोर्ट्स के अनुसार, शोधकर्ताओं का मानना है कि प्यार में पड़ना भाग्य (Luck) से कम और डोपामाइन, ऑक्सीटोसिन और कुछ अन्य सक्रिय हार्मोनों से अधिक जुड़ा हुआ है. यह मनुष्य को साथी की ओर लगाव महसूस कराता है. विज्ञान का मानना है कि प्रेम लोगों को साथी खोजने, रिश्ते बनाने और परिवार बसाने में मदद करता है. भले आपको सुनने में यह उतना आकर्षक न लगे, लेकिन यह आश्चर्यजनक रूप से प्रभावी है.
विज्ञान के अनुसार, जब भी आप किसी को पसंद करते हैं, तो आपके दिमाग का रिवॉर्ड सिस्टम सक्रिय हो जाता है. इसके वजह से अचानक वह व्यक्ति आपको किसी भी चीज से अधिक महत्वपूर्ण लगता है, कभी-कभी खाने या नींद से भी ज्यादा दिलचस्प बन जाता है.
व्यक्ति के दिमाग से कैसे होती है प्यार की शुरुआत?
शोधकर्ताओं के अनुसार, इस केमिकल प्रक्रिया का मुख्य घटक डोपामाइन है, जिसे अक्सर मस्तिष्क के खुशी का संदेशवाहक कहा जाता है. बता दें कि यही वह रसायन है, जो आनंद, प्रेरणा और यहां तक कि लत से भी जुड़ा होता है. यही वजह है कि किसी भी खास व्यक्ति को देखना या उसके बारे में सोचना एक सुखद अनुभव होता है. वहीं, इसके बाद नॉरएपिनेफ्रिन का नंबर है, जो उत्तेजना को बढ़ाने में सहायक होता है. इस हार्नोन के कारण दिल की धड़कन तेज होती है, हथेलियों में पसीना आता है किसी पर क्रश होने पर अक्सर महसूस होने वाली घबराहट के लिए जिम्मेदार होता है. सामान्य भाषा में समझें, तो शुरुआती रोमांस की झिझक आपकी गलती नहीं है, बल्कि यह केमिस्ट्री का कमाल है.
क्या होता है प्यार का हार्मोन?
मोहब्बत की इस पूरी प्रक्रिया में इसके बाद नंबर आता है ऑक्सीटोसिन, जिसे आमतौर पर “प्यार का हार्मोन” कहा जाता है. सामान्य तौर पर गले लगाने या हाथ पकड़ने जैसी शारीरिक स्नेह के दौरान स्रावित होता है. इसके अलावा विश्वास बनाने में मदद करता है. यह वह केमिकल है, जो माता-पिता और बच्चों के बीच के बंधन को मजबूत करता है, यही कारण है कि वैज्ञानिक इसे लंबे समय तक संबंधों के लिए आवश्यक मानते हैं.
प्यार के तीन स्टेप्स
गौरतलब है कि वैज्ञानिक अक्सर प्यार को तीन स्टेप में होने वाली प्रक्रिया के तौर पर वर्णित करते हैं. इसमें सबसे पहला चरण इच्छा जागृत होने की है, जो टेस्टोस्टेरोन और एक्ट्रोजन जैसे हार्मोनों द्वारा संचालित होती हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसके बाद आकर्षण महसूस होता है, जो डोपामाइन और नॉरएपिनेफ्रिन द्वारा संचालित होता है. अंत में लगाव विकसित होता है, जो ऑक्सीटोसिन और अन्य बंधनकारी रसायनों से जुड़ा होता है. वैज्ञानिक मानते हैं कि प्यार केवल एक जादू नहीं, बल्कि एक रसायन विज्ञान भी है.






