
Share Market Crash Reason:12 फरवरी को शेयर बाजार में फिर से Anthropic AI का भूत हावी रहा. IT शेयरों में ऐसा भूचाल आया कि सेंसेक्स -558.72 अंक तक क्रैश हो गया. TCS, HCL, इंफोसिस, टेक महिंद्रा जैसे आईटी स्टॉक्स बुरी तरह से तबाह हो गए. टाटा की आईटी कंपनी TCS 166.25 (-5.71%) क्रैश होकर 2743.15 रुपये पर बंद हुई. इसी तरह से Infosys स्टॉक -85.20 (-5.79%) की गिरावट के साथ 1387.20 रुपये पर बंद हुआ. HCL -75.10 (-4.84%) की गिरावट के साथ 1476.10 रुपये पर बंद हुआ तो बाकी आईटी शेयरों का हाल भी लगभग ऐसा ही रहा. बाजार पर IT शेयरों की बिकवाली का ऐसा दवाब दिखा कि बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन आज घटकर 472.30 लाख करोड़ रुपये पर आ गया. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। बीएसई लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप आज करीब 2.69 लाख करोड़ रुपये तक घट गया.
क्यों क्रैश हो रहे हैं IT शेयर
शेयरों में आए इस भूचाल की बड़ी वजह अमेरिका का वो एआई टूल है, जिसमें दुनियाभर की आईटी कंपनियों की मुश्किल बढ़ा दी है. Anthropic AI Tool के लॉन्च होते ही अमेरिकी शेयर बाजारों में हलचल मच गई. बड़ी-बड़ी आईटी कंपनियां भी इस भूचाल से खुद को सिक्योर नहीं कर पाईं. ये तबाही अमेरिका से आगे बढ़ते हुए भारतीय शेयर बाजार भी पहुंच गया. दरअसल Anthropic AI के लॉन्च होने के बाद से इस बात का खतरा मंडराने लगा है कि आईटी कंपनियों का बिजनेस मॉडल पूरी तरह से खत्म हो जाएगा. आईटी कंपनियों से सब्सक्रिप्शन मॉडल पर खतरा मंडराने लगा है. Gold-Silver Price: अमेरिका में हलचल, भारत में औंधे मुंह गिरी चांदी, ₹1.60 लाख सस्ती, चेक करें 24, 22 और 18 कैरेट वाले सोने का आज का दाम
नए एआई टूल्स से कौन का खतरा
नए AI टूल्स ने यह डर पैदा कर दिया है कि आईटी सेक्टर के सर्विसेज और डेटा कंपनियों सब्सक्रिप्शन बेस्ड मॉडल खतरे में हैं. निवेशकों को डर सता रहा है कि ये AI उस काम को तेजी से और सस्ते में कर सकता है , जिसे आईटी कंपनियां अभी कर रही हैं. ऐसे में आईटी सेक्टरों की जरूरतें कम हो सकती है. जिसकी वजह से निवेशक आईटी शेयरों को बेचकर निकल रहे हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से होने वाले बदलाव को लेकर लगातार चिंताएं बढ़ी हुई है. IT सर्विस कंपनियों की कमाई पर असर पड़ने का डर ऐसा फैला कि आईटी शेयर क्रैश हो रहे हैं.
अमेरिका के मजबूत डेटा ने किया हैरान
अमेरिका में रोजगार को लेकर आए ताजा आंकड़े ने सबको हैरान किया, जहां उम्मीद की जा रही थी कि वहां जॉब्स क्राइसिस की स्थिति बनेगी, उसके उलट जनवरी 2026 में अमेरिका में नौकरियों की बढ़ोतरी में तेजी आई और बेरोजगारी दर घटकर 4.3% हो गई. उम्मीद ले बेहतर जॉब डेटा आने के बाद अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ, जिसने फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दर में कटौती की संभावना को कम कर दिया है. इन सारे फैक्टर्स ने आज आईटी सेक्टर्स पर दवाब को बढ़ा दिया है.






