
उम्र गुज़र गई, पर माँ के हाथों का वो ममता भरा स्वाद आज भी वैसा ही है!
92 साल का लंबा सफर, हाथों में झुर्रियां, लेकिन ममता में आज भी वही जवानी… वक्त बदल गया, दौर बदल गया, पर इस माँ की रसोई का दस्तूर नहीं बदला।
पिछले 60 सालों से ये हाथ बिना थके, बिना रुके अपने बेटे के लिए खाना बना रहे हैं, वही पुराने हाथ, वही बेपनाह प्यार और वही बरसों पुराना बेमिसाल स्वाद। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं।
आज बेटा भी 60 साल का हो चुका है, दुनिया के लिए शायद वह बूढ़ा हो गया हो, मगर इस 92 साल की माँ के लिए वह आज भी वही छोटा सा बच्चा है।
चेहरे की लकीरें गवाही देती हैं कि शरीर अब थकने लगा है, लेकिन अपने बच्चे को खिलाने का जज्बा आज भी उतना ही अडिग और ताज़ा है। यह रिश्ता हमें सिखाता है कि दुनिया में हर चीज़ की एक एक्सपायरी डेट होती है, मगर एक माँ का प्यार न कभी बूढ़ा होता है और न कभी फीका पड़ता है।
माँ की रसोई महज़ पेट नहीं भरती, बल्कि रूह को वो सुकून देती है, जो दुनिया के किसी भी आलीशान होटल के खाने में मिल ही नहीं सकता।






