
जब पूरी दुनिया पीठ फेर ले, तब जो हाथ थाम ले वही असली ‘मसीहा’ है!
बॉलीवुड के वो कलाकार जिन्होंने दशकों तक हमारे चेहरों पर मुस्कान बिखेरी, आज खुद दर्द के समंदर में हैं। चेक बाउंस मामले में फंसे राजपाल यादव ने सरेंडर से पहले टूटते हुए कहा था— “मेरे पास पैसे नहीं हैं, यहाँ कोई किसी का दोस्त नहीं होता, सब अकेले हैं।”
लेकिन जहाँ उम्मीद खत्म होती है, वहीं से सोनू सूद की इंसानियत शुरू होती है। सोनू ने न सिर्फ़ राजपाल को अपनी अगली फिल्म का हिस्सा बनाया, बल्कि पूरी इंडस्ट्री को आईना भी दिखाया।
सोनू सूद ने एक बहुत गहरी बात कही— “यह कोई दान नहीं, बल्कि सम्मान है।” उनका मानना है कि बुरा दौर किसी की काबिलियत की वजह से नहीं, बल्कि खराब समय की वजह से आता है। काम के बदले दी जाने वाली यह मदद सिर्फ़ पैसे नहीं, बल्कि एक कलाकार का आत्म-सम्मान है।
सोनू ने साबित कर दिया कि फ़िल्मी दुनिया सिर्फ़ एक ‘इंडस्ट्री’ नहीं, एक परिवार भी हो सकती है, बशर्ते वहाँ सोनू जैसा बड़े दिल वाला कोई सदस्य मौजूद हो। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं।
यह कहानी हमें सिखाती है कि वक़्त कभी भी बदल सकता है, लेकिन जो लोग बुरे वक़्त में साथ खड़े होते हैं, वही इतिहास में अमर होते हैं।




