कहते हैं कि राजनीति में न कोई स्थायी दोस्त होता है और न ही दुश्मन, लेकिन पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने जो कहा है, उससे तो यही लगता है कि उनकी “दोस्ती” काफी कड़वी रही है। संसद में गरजते हुए आसिफ साहब ने अमेरिका और पाकिस्तान के पुराने रिश्तों का जो कच्चा चिट्ठा खोला है, उसने सबको हैरान कर दिया है।
इस्तेमाल किया और फेंक दिया!
ख्वाजा आसिफ ने बहुत ही बेबाक और देसी अंदाज में अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि वाशिंगटन ने इस्लामाबाद को सिर्फ अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि अमेरिका ने पाकिस्तान के साथ “टॉयलेट पेपर से भी बदतर” सलूक किया—यानी काम निकल जाने के बाद उसे कूड़ेदान में फेंक दिया।
उनका इशारा साफ था कि जब-जब अमेरिका को अफगानिस्तान या सोवियत संघ के खिलाफ पाकिस्तान की जरूरत पड़ी, उसने हाथ बढ़ाया, लेकिन जैसे ही मकसद पूरा हुआ, पाकिस्तान को उसके हाल पर छोड़ दिया।
जिहाद के नाम पर बड़ा खेल
इस भाषण की सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि आसिफ ने पाकिस्तान के पुराने ‘नैरेटिव’ की धज्जियां उड़ा दीं। उन्होंने स्वीकार किया कि पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान की बीच हमेशा मिसगाइडेड वॉर रहा यानी अफगानिस्तान की जंग कभी ‘मजहब के लिए थी ही नहीं।
उन्होंने ये भी कहा कि लोगों को ‘जिहाद’ के नाम पर उकसाया गया और लड़ने के लिए भेजा गया, जबकि असल में वह सिर्फ अमेरिकी हितों की रक्षा थी। उन्होंने माना कि उस दौर में पाकिस्तान के सिलेबस तक को बदल दिया गया ताकि इन लड़ाइयों को जायज ठहराया जा सके। आज भी देश उस कट्टरपंथी सोच का खामियाजा भुगत रहा है।
ज़िया और मुशर्रफ पर फूटा गुस्सा
आसिफ ने पिछली सरकारों, खासकर जनरल ज़िया-उल-हक और परवेज मुशर्रफ को इस बर्बादी का जिम्मेदार ठहराया। उनके मुताबिक 1980 के दौर में सोवियत संघ के खिलाफ लड़ाई पाकिस्तान की नहीं थी, लेकिन अमेरिका के कहने पर देश को आग में झोंक दिया गया।
साथ ही 9/11 के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका के लिए हालात जो सही करने के लिए पलटी ली और साल 1999 के बाद मुशर्रफ ने फिर वही गलती की। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। कल तक जिन तालिबान को पाकिस्तान पाल रहा था, अमेरिका के एक फोन पर उनके खिलाफ जंग छेड़ दी।
रक्षा मंत्री ने बड़े भावुक लहजे में कहा कि दूसरों की लड़ाई लड़ने के चक्कर में पाकिस्तान आज हिंसा, कट्टरवाद और आर्थिक कंगाली के दलदल में फंसा है। उन्होंने दो-टूक कहा कि ये ऐसी गलतियां थीं जिन्हें अब सुधारा नहीं जा सकता। पाकिस्तान सिर्फ एक ‘मोहरा’ बनकर रह गया और असली खिलाड़ी (अमेरिका) अपना खेल खत्म करके घर लौट गया।


