Wednesday, February 11, 2026
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18 राज्य,ˈ 72 शहर और ₹30,000 करोड़… ट्रेन में मूंगफली बेचने वाले को कैसे आया स्टांप घोटाले का आइडिया! पूरी कहानीˌ

18 राज्य,ˈ 72 शहर और ₹30,000 करोड़… ट्रेन में मूंगफली बेचने वाले को कैसे आया स्टांप घोटाले का आइडिया! पूरी कहानीˌ
18 राज्य,ˈ 72 शहर और ₹30,000 करोड़… ट्रेन में मूंगफली बेचने वाले को कैसे आया स्टांप घोटाले का आइडिया! पूरी कहानीˌ

Story Of Telgi Scam 2003: एक ऐसा व्यक्ति जिसने 30000 करोड़ के घोटाले को अंजाम देकर देश की अर्थव्यवस्था को ही हिला दिया था, जब भी देश के सबसे बड़े स्कैम की चर्चा होती है, इस व्यक्ति और स्कैम का नाम सबसे ऊपर आता है. करोड़ों रुपये के इस घोटाले ने सरकार से लेकर अफसरों और सरकारी महकमे तक की नींद उड़ा दी थी. हम बात कर रहे हैं 2003 में हुई नकली स्टांप पेपर का घोटाला (stamp paper scam) के बारे में. लोग इसे नकली स्टैप पेपर, स्कैम 2003 या तेलगी स्कैम के नाम से जानते हैं. इस घोटाले को अब्दुल करीम तेलगी ने अंजाम दिया था.


तो चलिए आपको बताते हैं देश के सबसे बड़े स्कैम में से एक तेलगी नकलीस्टांप पेपर घोटाले ( Stamp Paper Scam 2003) की पूरी कहानी…

कौन था अब्दुल करीम तेलगी?
तेलगी का जन्म 1961 में कर्नाटक के एक छोटे से पंचायत शहर खानापुर में हुआ था, जो महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित है. तेलगी के पिता रेलवे में काम करते थे. छोटी उम्र में ही तेलगी के पिता की मृत्यु हो गई, पिता की मृत्यु के बाद तेलगी को ट्रेनों में खाने-पीने का सामान बेचने सहित छोटे-मोटे काम करने के लिए मजबूर होना पड़ा. जब इन सब से काम नहीं चला तो वह पैसा कमाने सऊदी अरब चला गया. लोगों को सऊदी अरब भेजने के लिए वो नकली डॉक्यूमेंट्स और स्टांप पेपर्स बनाया करता था. यहीं से उसे फेक स्टांप पेपर बनाने की लत लग गई. अपने गलत कामों की वजह से वो साल 1993 में इमिग्रेशन अथॉरिटी के हाथ लग गया. जालसाजी के लिए उसे जेल की हवा खानी पड़ी, लेकिन जेल तो मानो उसके लिए लॉटरी बन गई.जेल में उसकी मुलाकात कोलकाता के रहने वाले राम रतन सोनी से हुई. सोनी एक सरकारी स्टांप वेंडर थे. दोनों ने जेल में बैठे-बैठे बड़े स्कैम की साजिश रच दी.

जेल में मिला क्राइम का साथी
जेल से वापस लौटने पर उसने नकली पासपोर्ट बनाने में अपना हाथ आजमाया और फिर नकली स्टांप पेपर बनाना शुरू कर दिया. साल 1994 में सोनी के साथ काम करते हुए तेलगी ने अपनी पहचान के दम पर स्टांप वेंडर का लाइसेंस ले लिया. इसके बाद दोनों ने मिलकर कई जाली स्टांप पेपर्स तैयार किए. भारत में कानूनी दस्तावेजों को प्रमाणित करने के लिए स्टांप पेपर का उपयोग किया जाता है और सरकार उन्हें पंजीकृत विक्रेताओं के माध्यम से बेचती है. इनकी लागत 10 रुपये, 100 रुपये, 500 रुपये आदि होती है. स्टांप का पैसा सरकार के खाते में जाता है.

70 शहरों में नकली स्टांप पेपर बेचे
1992 हर्षद मेहता स्कैम के चलते स्टैप पेपर की कमी हो गई थी. ये मौका तेलगी के लिए किस्मत चमकाने वाला हो गया. तेलगी ने फर्जी स्टांप से पैसा कमाना शुरू कर दिया. हालांकि साल 1995 में दोनों की दोस्ती टूट गई और सोनी तेलगी से अलग हो गया. फर्जी स्टांप बनाने के चक्कर में तेलगी का स्टांप लाइसेंस भी कैंसिल हो गया. लाइसेंस भले कैंसिल हो गया तो, लेकिन तेलगी जानता था कि उसे फर्जी स्टांप से पैसा कैसे कमाना है. साल 1996 में तेलगी ने 300 एमबीए को नौकरी पर रखा और मिंट रोड पर अपनी प्रेस खोली. तेलगी ने नासिक के इंडियन सिक्योरिटी प्रेस के पुराने और खारिज हो चुकी मशीनें खरीदी और महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान समेत देश के 70 शहरों में नकली स्टांप पेपर बेचे.

कैसे पकड़ा गया तेलगी…
इस कांड का खुलासा हुआ साल 2000 में, जब बेंगलुरु से दो लोगों को फर्जी स्टांप पेपर के साथ गिरफ्तार किया गया. इन स्टांप पेपर्स का लिंक तेलगी से जोड़ा गया. साल 2001 में तेलगी को अजमेर से गिरफ्तार कर लिया गया. जनता के बढ़ते दबाव के कारण, महाराष्ट्र सरकार ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया. आगे की जांच में तेलगी के घोटाले के विस्तार का पता चला. बाद में कई राज्यों में कई मामले दर्ज होने के बाद, यह सामने आया कि तेलगी ने घोटाला करते समय कथित तौर पर सरकारी अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर ली थी. जांच के दौरान कई पुलिस अधिकारियों और राजनेताओं के नाम सामने आए थे. हालांकि उन नामों को कभी पब्लिक नहीं किया गया.

54 लोगों को गिरफ्तार किया गया
एसआईटी ने इस मामले में 2003 में पहली बड़ी गिरफ्तारी की थी. गिरफ्तार हुए व्यक्ति थे महाराष्ट्र के धुले से विधायक अनिल गोटे. दूसरी बड़ी गिरफ्तारी 1 दिसंबर, 2003 को सेवानिवृत्ति के ठीक एक दिन बाद आयुक्त आरएस शर्मा की हुई. उन पर तेलगी को बचाने का आरोप था. एसआईटी ने 54 लोगों को गिरफ्तार किया जिनमें दो विधायक – गोटे और कृष्णा यादव भी शामिल थे, जिन्हें आरोप सामने आने के बाद तेलुगु देशम पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था. 2004 में जांच को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपने हाथ में ले लिया, जिसने उसी साल अगस्त में तेलगी के खिलाफ एक लंबा आरोप पत्र दायर किया.

30 साल की कैद और 202 करोड़ रुपये
2007 में तेलगी को घोटाले का दोषी ठहराया गया और 30 साल की कैद और 202 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया. यह महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम और धारा 120 (आपराधिक साजिश) के तहत था. कोर्ट ने इस मामले में 43 अन्य आरोपियों को भी सजा सुनाई. अधिकांश आरोपी फर्जी स्टांप पेपर बेचने के लिए तेलगी द्वारा नियुक्त किए गए व्यक्ति थे. फैसले से पहले कथित तौर पर अपनी पत्नी शाहिदा की सलाह के बाद, तेलगी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया था.

तेलगी की मौत
तेलगी को मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर और एड्स जैसी गंभीर बीमारियों ने जकड़ रखा था. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। साल 2017 में मल्टिपल ऑर्गन फेल्योर की वजह से उसकी मौत हो गई.

me.sumitji@gmail.com

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