
गोरख मुंडी (Sphaeranthus indicus) आयुर्वेद की एक अत्यंत प्रभावशाली और बहुगुणी औषधीय जड़ी-बूटी मानी जाती है, जिसे कई जगह श्रावणी, महामुण्डी, अरुणा, तपस्विनी और नीलकदम्बिका जैसे नामों से भी जाना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार यह एक रसायन है, यानी ऐसी औषधि जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाकर लंबे समय तक जवान बनाए रखती है। गोरख मुंडी का उपयोग अजीर्ण, दमा, टीबी, अतिसार, मिर्गी, आंखों के रोग, त्वचा रोग, पेट के कीड़े, असमय बाल सफेद होना, मानसिक कमजोरी और याददाश्त की कमी जैसी समस्याओं में किया जाता रहा है। इसकी गंध तीखी होती है और यह धान के खेतों व नम स्थानों पर वर्षा के बाद उगने वाली एक वर्षीय वनस्पति है, जिसके मूल, पत्ते, फूल और फल सभी औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं।
गोरख मुंडी को बुद्धिवर्धक माना गया है और यह आंखों की रोशनी बढ़ाने में विशेष रूप से लाभकारी बताई जाती है। आयुर्वेदिक अनुभवों के अनुसार इसके ताजे फलों या घुंडी का नियमित सेवन करने से आंखों की कमजोरी, लालिमा और थकान की समस्या लंबे समय तक नहीं होती। यह वात और रक्त विकारों में उपयोगी है, मूत्र मार्ग को शुद्ध करती है और मूत्र, गर्भाशय व स्त्री रोगों में भी लाभ देती है। इसके सेवन से शरीर में पसीने और मूत्र में हल्की गंध आ सकती है, जो इसके शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने का संकेत माना जाता है।
गोरख मुंडी का उपयोग कई तरह से किया जाता है। इसके पत्तों का लेप नारू रोग और त्वचा समस्याओं में लाभ देता है। सौंठ के साथ इसका चूर्ण वात रोगों में उपयोगी माना गया है। घी और शहद के साथ सेवन करने से जोड़ों के दर्द, कमजोरी और थकान में राहत मिलती है। इसका काढ़ा पथरी, पीलिया और लीवर संबंधी समस्याओं में सहायक बताया गया है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। नीम की छाल के साथ प्रयोग करने पर कुष्ठ जैसे पुराने रोगों में भी आयुर्वेदिक ग्रंथों में लाभ वर्णित है। गोरख मुंडी को आवाज को मधुर करने, बालों को समय से पहले सफेद होने से बचाने और शरीर में स्फूर्ति बढ़ाने वाली औषधि माना गया है।
आयुर्वेद में गोरख मुंडी से औषधि बनाने की विधि भी विस्तार से बताई गई है। इसकी जड़ या पूरे पौधे को छाया में सुखाकर चूर्ण बनाया जाता है और दूध, घी, शहद या गुड़ के साथ प्रयोग किया जाता है। बाजार में आमतौर पर इसका फल ही उपलब्ध होता है, जिससे गोलियां बनाकर लंबे समय तक सेवन किया जाता है। नियमित और सही विधि से लिया जाए तो यह आंखों को शक्ति देता है, दिमाग तेज करता है, थकान दूर करता है, यौन कमजोरी, बवासीर, गुर्दे के रोग, सिरदर्द और त्वचा समस्याओं में भी सहायक माना जाता है।
हालांकि यह एक सुरक्षित आयुर्वेदिक औषधि मानी जाती है, फिर भी इसका प्रभाव धीरे-धीरे दिखता है, इसलिए धैर्य और नियमितता जरूरी है। पाचन शक्ति बढ़ाने वाली होने के कारण भोजन समय पर करना चाहिए और चाय जैसी चीजों से परहेज रखना बेहतर होता है। किसी गंभीर बीमारी, गर्भावस्था या लंबे समय से चल रही दवाओं की स्थिति में आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहता है। सही तरीके से अपनाने पर गोरख मुंडी को आयुर्वेद में सैकड़ों रोगों का रामबाण और दीर्घायु देने वाली जड़ी-बूटी माना गया है।






