रूस ने अमेरिका पर भारत और अन्य देशों को रूसी तेल खरीदने से रोकने का आरोप लगाया है और कहा है कि वाशिंगटन वैश्विक आर्थिक प्रभुत्व के अपने उद्देश्य को पूरा करने के लिए टैरिफ, प्रतिबंध और प्रत्यक्ष निषेध सहित कई तरह के ‘दबावपूर्ण’ उपायों का इस्तेमाल कर रहा है।
विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने रूसी तेल कंपनियों पर प्रतिबंध लगाकर प्रतिस्पर्धियों को दबाने के लिए अमेरिका पर ‘अनुचित तरीकों’ का इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया।
लावरोव ने सोमवार को ‘टीवी ब्रिक्स’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘(अमेरिका) भारत और अन्य ब्रिक्स सदस्यों जैसे प्रमुख रणनीतिक साझेदारों के साथ हमारे व्यापार, निवेश सहयोग और सैन्य-तकनीकी संबंधों को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहा है।’’
उन्होंने कहा कि पश्चिमी देश अपनी पहले की प्रभुत्वशाली स्थिति छोड़ने को तैयार नहीं हैं। उनके अनुसार, (अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड) ट्रंप प्रशासन के आने के बाद प्रतिस्पर्धियों को दबाने की यह कोशिश और अधिक स्पष्ट एवं खुलकर सामने आ गई।
लावरोव ने कहा कि रूस ने पिछले साल राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उनके अमेरिकी समकक्ष ट्रंप के बीच अलास्का में हुई वार्ता के दौरान यूक्रेन पर अमेरिका के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें बताया गया था कि यूक्रेन मुद्दे का समाधान होना चाहिए।
एंकरेज में, हमने अमेरिका के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। सीधे शब्दों में कहें तो, उन्होंने प्रस्ताव रखा और हम सहमत हो गए- समस्या का समाधान होना चाहिए।’’
उन्होंने आगे कहा, ‘‘उनके प्रस्तावों को स्वीकार करके, हमने मूल रूप से यूक्रेनी मुद्दे को हल करने और व्यापक, विस्तृत और पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग की दिशा में आगे बढ़ने का कार्य पूरा कर लिया है।’’
उन्होंने, ‘‘लेकिन व्यावहारिक तौर पर स्थिति इसके विपरीत है: नये प्रतिबंध लगाए जाते हैं, संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि का उल्लंघन करते हुए अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में टैंकरों पर हमले किए जाते हैं, और भारत तथा अन्य साझेदारों को सस्ती रूसी ऊर्जा खरीदने से हतोत्साहित किया जाता है, जबकि यूरोप ने लंबे समय से ऐसी खरीद पर रोक लगा रखी है, जिससे उन्हें अमेरिकी द्रवीकृत प्राकृतिक गैस काफी अधिक कीमतों पर खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
इस प्रकार, आर्थिक क्षेत्र में अमेरिका ने प्रभावी रूप से आर्थिक वर्चस्व का लक्ष्य घोषित कर दिया हैं।’’
लावरोव ने कहा कि अमेरिका महाद्वीपों में फैले सभी प्रमुख देशों की ऊर्जा आपूर्ति के रास्तों को अपने नियंत्रण में रखना चाहता है। इसके तहत यूरोप में नॉर्ड स्ट्रीम पाइपलाइन, यूक्रेन की गैस परिवहन व्यवस्था और तुर्कस्ट्रीम पाइपलाइन पर भी उसकी निगरानी रहती है।




