Wednesday, February 11, 2026
Ayurveda

थाइराइड का सबसे आसान अचूक उपाय जो सिर्फ 15 दिनों में अद्भुत परिणाम देगा, जरूर अपनाएँ और शेयर करे

थाइराइड का सबसे आसान अचूक उपाय जो सिर्फ 15 दिनों में अद्भुत परिणाम देगा, जरूर अपनाएँ और शेयर करे
थाइराइड का सबसे आसान अचूक उपाय जो सिर्फ 15 दिनों में अद्भुत परिणाम देगा, जरूर अपनाएँ और शेयर करे

थाइरॉइड आज के समय की एक आम लेकिन गंभीर समस्या बन चुकी है, जिसे अक्सर साइलेंट किलर भी कहा जाता है। गले में स्थित तितली के आकार की थाइरॉइड ग्रंथि हमारे शरीर की ऊर्जा, पाचन और मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करती है। यह एक तरह से “मास्टर ग्रंथि” की तरह काम करती है, क्योंकि इससे निकलने वाले हार्मोन यह तय करते हैं कि शरीर बनी हुई ऊर्जा को कब और कितना उपयोग करे। खानपान की अनियमितता, तनाव और गलत जीवनशैली के कारण जब यह ग्रंथि ठीक से काम नहीं करती, तो पूरे शरीर की कार्यप्रणाली बिगड़ने लगती है और कई तरह की बीमारियां जन्म ले लेती हैं।

थाइरॉइड की समस्या मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है—हाइपोथाइरॉइडिज्म और हाइपरथाइरॉइडिज्म। जब थाइरॉइड ग्रंथि से हार्मोन कम बनने लगते हैं, तो उसे हाइपोथाइरॉइडिज्म कहा जाता है, जबकि हार्मोन अधिक बनने पर हाइपरथाइरॉइडिज्म होता है। इस समस्या के लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं, जैसे लगातार थकान रहना, आलस, कब्ज, चिड़चिड़ापन, अधिक ठंड लगना, भूलने की आदत, वजन का असामान्य रूप से बढ़ना या घटना, तनाव और अवसाद। महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन के कारण पीरियड्स में गड़बड़ी और गर्भधारण में दिक्कत भी हो सकती है।

थाइरॉइड की गड़बड़ी का असर शरीर के कई हिस्सों पर दिखता है। हाइपोथाइरॉइड की स्थिति में वजन तेजी से बढ़ता है और कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी बढ़ सकता है, जबकि हाइपरथाइरॉइड में वजन और कोलेस्ट्रॉल दोनों कम हो जाते हैं। मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, गर्दन में सूजन, त्वचा का रूखा होना, बालों का झड़ना, भौंहों के बाल गिरना, लंबे समय तक कब्ज या बार-बार दस्त जैसी समस्याएं भी थाइरॉइड असंतुलन के संकेत हो सकते हैं। ऐसे में समय रहते सही इलाज और प्राकृतिक उपाय अपनाना बेहद जरूरी हो जाता है।

आयुर्वेद में थाइरॉइड के लिए कुछ आसान लेकिन प्रभावी घरेलू उपाय बताए गए हैं। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। आंवला चूर्ण और शहद का सेवन इनमें सबसे सरल और असरदार माना जाता है। सुबह खाली पेट एक चम्मच शुद्ध शहद में 10–15 ग्राम आंवला चूर्ण मिलाकर चाटें और यही प्रक्रिया रात में भोजन के दो घंटे बाद दोहराएं। कहा जाता है कि इसका असर 15 दिनों के भीतर महसूस होने लगता है। इसके अलावा अश्वगंधा थाइरॉइड की अनियमितता को संतुलित करने में मदद करता है और शरीर में ऊर्जा व कार्यक्षमता बढ़ाता है।

थाइरॉइड के लिए समुद्री घास, नींबू की पत्तियां, ग्रीन ओट्स और अखरोट भी लाभकारी माने जाते हैं। समुद्री घास से आयोडीन और जरूरी मिनरल्स मिलते हैं, नींबू की पत्तियों की चाय थाइरॉक्सिन हार्मोन की अधिकता को नियंत्रित करने में सहायक होती है, जबकि अखरोट में मौजूद सेलेनियम थाइरॉइड ग्रंथि के सही कामकाज के लिए बेहद जरूरी है। सेलेनियम को “थाइरॉइड सुपर न्यूट्रिएंट” भी कहा जाता है, जो रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है।

इसके साथ ही जीवनशैली में सुधार भी उतना ही जरूरी है। आयोडीन युक्त नमक का संतुलित सेवन, हरी पत्तेदार सब्जियों और धनिए की ताजा चटनी का उपयोग, नियमित योग और उज्जायी प्राणायाम थाइरॉइड को संतुलन में रखने में मदद कर सकते हैं। एक्युप्रेशर थेरेपी के अनुसार हाथ और पैरों के अंगूठे के नीचे स्थित बिंदुओं पर सही दिशा में दबाव देने से भी थाइरॉइड और पैराथाइरॉइड ग्रंथि के कार्य में सुधार आता है। यदि इन प्राकृतिक उपायों को सही तरीके से अपनाया जाए और साथ ही डॉक्टर की सलाह भी ली जाए, तो थाइरॉइड की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

me.sumitji@gmail.com

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