Wednesday, February 11, 2026
GK

कभी सोचाˈ है बाइक या स्कूटर पर टोल टैक्स क्यों नहीं देना पड़ता? जानिए इसके पीछे की असली वजहˌ

कभी सोचाˈ है बाइक या स्कूटर पर टोल टैक्स क्यों नहीं देना पड़ता? जानिए इसके पीछे की असली वजहˌ
कभी सोचाˈ है बाइक या स्कूटर पर टोल टैक्स क्यों नहीं देना पड़ता? जानिए इसके पीछे की असली वजहˌ

क्या आपने कभी सोचा है कि कार और ट्रकों को टोल प्लाजा पर रुकना पड़ता है, पर बाइक और स्कूटर को क्यों नहीं? यह सिर्फ सुविधा की बात नहीं है, बल्कि इसके पीछे कानूनी वजह है। भारत में दोपहिया वाहनों को टोल टैक्स से पूरी तरह छूट दी गई है। यह छूट क्यों मिली है, इसके कारण बहुत ही महत्वपूर्ण हैं, जिनके बारे में आपको जानना चाहिए।

टू-व्हीलर के लिए टोल टैक्स में छूट

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम 2008 के नियम 4(4) के अनुसार, दोपहिया (बाइक/स्कूटर) और तिपहिया वाहनों को टोल टैक्स में पूरी तरह से छूट प्राप्त है। इस कानूनी नियम के तहत, देश के सभी राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) पर दोपहिया वाहनों को टोल प्लाजा पर कोई शुल्क नहीं देना पड़ता है।

टू-व्हीलर से टोल क्यों नहीं लिया जाता?

टोल टैक्स असल में सड़क बनाने, उसकी मरम्मत और रखरखाव पर हुए खर्च को वसूलने के लिए लिया जाता है। चूँकि दो पहिया वाहन हल्के होते हैं और सड़क पर कम जगह घेरते हैं, इसलिए ये ट्रक या बस जैसे भारी वाहनों के मुकाबले सड़क को बहुत कम या न के बराबर नुकसान पहुँचाते हैं। यही वजह है कि सरकार दो पहिया वाहनों से टोल वसूलना सही या आवश्यक नहीं मानती।

भारत में दोपहिया वाहन ज्यादातर मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए परिवहन का सबसे किफायती और आम साधन है. इन वाहनों पर टोल टैक्स लगा देने से लाखों दैनिक यात्रियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ जाएगा।

टू-व्हीलर से टोल वसूलने पर क्या होगा ?

ज़रा सोचिए, अगर हर मोटरसाइकिल (बाइक) चलाने वाले को टोल बूथ पर रुककर टोल भरना पड़े तो क्या होगा? ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। अगर लाखों दोपहिया वाहनों से रोज़ टोल वसूला जाए, तो टोल प्लाजा पर भारी जाम लग जाएगा। इससे यातायात में बहुत ज़्यादा भीड़भाड़ होगी और वहाँ से गाड़ियों की आवाजाही बहुत धीमी हो जाएगी।

जब आप बाइक या स्कूटर खरीदते हैं, तो आप वाहन पंजीकरण के समय ही रोड टैक्स का भुगतान कर देते हैं। यह टैक्स सड़कों और राजमार्गों के इस्तेमाल की लागत को अप्रत्यक्ष रूप से कवर करता है, इसलिए बाद में टोल देने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इसके अलावा, प्रशासनिक दृष्टिकोण से, इतनी बड़ी संख्या में दोपहिया वाहनों से टोल वसूलने में लगने वाला कर्मचारी, बुनियादी ढाँचा और समय का खर्च, मिलने वाले छोटे राजस्व से कहीं ज्यादा महंगा साबित होगा।

me.sumitji@gmail.com

Leave a Reply