राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के मीडिया सलाहकार महेंद्र भारद्वाज कोटा से श्रीगंगानगर जाने वाली ट्रेन 22981 के बाथरूम में करीब 1 घंटा फंसे रहे। उन्होंने इस घटना का खुद वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड किया।

ट्रेन का टॉयलेट इस्तेमाल करने से अक्सर लोग बचते हैं, क्योंकि वह गंदा बहुत होता है। हालांकि जब बहुत ज्यादा मजबूरी हो तो उसका इस्तेमाल करना पड़ता है। ट्रेन के टॉयलेट से जुड़ा एक ऐसा मामला राजस्थान से सामने आया है जिसे जानने के बाद आप भी टॉयलेट का इस्तेमाल करने से पहले हजार बार सोचेंगे। दरअसल, राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के मीडिया सलाहकार महेंद्र भारद्वाज कोटा से श्रीगंगानगर जा रही ट्रेन के बाथरूम में करीब एक घंटे तक फंसे रहे। बाथरूम का दरवाजा तोड़कर उन्हें बाहर निकाला गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है जिसे खुद महेंद्र भारद्वाज ने शूट किया है।
‘बाथरूम में फोन जरूर लेकर जाएं’
जानकारी के मुताबिक, महेंद्र भारद्वाज लगभग 58 मिनट तक ट्रेन के टॉयलेट में फंसे रहे। वह कोटा से जयपुर जाने के लिए इस ट्रेन मे सवार हुए थे। बाथरुम में फंसने का कारण गेट की कुंडी का अटकना बताया जा रहा है। बार-बार कोशिश के बाद गेट नहीं खुल रहा था। महेंद्र भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर अपलोड किए वीडियो में बाया है कि वह इस दौरान चिल्लाए कि गेट तोड़ो, दम घुटने लगा है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। बाद में जब गेट तोड़ा गया तो वे बाहर आ सके। उन्होने सोशल मीडिया पर सलाह तक दी कि ट्रेन के बाथरुम में मोबाइल अवश्य ले जाएं वरना मेरी तरह एक बड़ी मुसीबत में फंस सकते हैं।
‘मैं मदद के लिए चिल्लाया पर मदद नहीं मिली’
महेंद्र भारद्वाज ने वीडियो शेयर करते हुए बताया है कि वह 30 जनवरी को कोटा से जयपुर जाने के लिए इस ट्रेन में सवार हुए थे। सवाईमाधोपुर से थोड़ा आगे वह ट्रेन के टॉयलेट में गए। जब वह वापस आने के लिए बाथरूम के गेट को खोलने लगे तो वह नहीं खोल पाए। महेंद्र भारद्वाज ने कहा, “मैंने तमाम कोशिशें की पर सारी असफल रहीं। इस दौरान बदबू के मारे दम घुटने लगा। मैं कई बार चिल्लाया भी, लेकिन किसी को मेरी आवज नहीं सुनाई दी। रेलवे के किसी अधिकारी के नंबर भी मेरे पास नहीं थे।”
रेलवे की हेल्पलाइन से नहीं मिली कोई मदद
महेंद्र भारद्वाज ने बताया कि फिर मैंने मेरे भाई और बेटे को फोन लगाया। तब जाकर वह लोग मदद करने के लिए। उन्होंने दरवाजे को तोड़ा और मुझे बाहर निकाला। दरवाजा तोड़ने से पहले रेलवे हेल्पलाइन को कॉल किया, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। दरवाजे को तोड़ने के लिए भी काफी मशक्कत करनी पड़ी। दरवाजा तोड़ते वक्त उन्होंने कहा कि जल्दी दरवाजा तोड़ दो नहीं तो मैं दुम घुटने की वजह से मर जाऊंगा।






