Wednesday, February 11, 2026
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अजित पवार को लेकर जा रहा प्लेन कैसे हुआ क्रैश? अब तक ये पता चला!..!

अजित पवार को लेकर जा रहा प्लेन कैसे हुआ क्रैश? अब तक ये पता चला!..
अजित पवार को लेकर जा रहा प्लेन कैसे हुआ क्रैश? अब तक ये पता चला!..

नई दिल्ली: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार समेत पांच लोगों की बुधवार सुबह प्लेन क्रैश में हुई मौत मामले की जांच एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने शुरू कर दी है। हैदराबाद में हो रहे विंग्स इंडिया शो से एएआईबी के डीजी सीधे घटनास्थल पहुंचे। हादसे की जगह फाेरेंसिक टीम भी पहुंची। हादसे से पहले क्या हुआ था? इसकी काफी हद तक जानकारी ब्लैक बॉक्स से मिलेगी। हादसे के बारे में कई सारे सवाल सामने आ रहे हैं।

नागर विमानन मंत्रालय का कहना है कि जांच के बाद ही पता लग सकेगा कि प्लेन क्रैश होने के क्या कारण रहे। प्लेन में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के अलावा कैप्टन सुमित कपूर, को-पायलट शांभवी पाठक, अजित पवार के पीएसओ विदिप जाघव और फ्लाइट अटेंडेंट पिंकी माली थे। सभी की हादसे में मौत हो गई।

क्रैश से पहले पायलट को दिखाई नहीं दिया था बारामती एयरपोर्ट का रनवे नंबर-11
हादसे से पहले पायलट को एयरपोर्ट का रनवे नंबर-11 दिखाई नहीं दिया था। इसकी जानकारी पायलट ने एटीसी को भी दी थी। पायलट ने एक बार लैंड करने की कोशिश भी की थी। लेकिन कामयाबी नहीं मिली। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। जिसके बाद पायलट दोबारा प्लेन को लैंड कराने की कोशिश कर रहे थे। उसी दौरान प्लेन क्रैश हो गया। दोनों पायलटों को अच्छा खास अनुभव था। जिसमें हादसे में मारे गए कैप्टन सुमित कपूर को 15 हजार घंटे और को-पायलट शांभवी पाठक को 1500 घंटे से अधिक का फ्लाइंग एक्सपीरियंस था। कैप्टन सुमित को लेकर जानकारों को कोई शक नहीं है कि उनकी तरफ से कोई गलती हुई होगी।

पायलट की गलती, प्लेन के इंजन फेल होना, तकनीकी खामी, जीपीएस स्पूफिंग या फिर कोई साजिश
प्लेन क्रैश को लेकर कई थ्योरी सामने आ रही है। जिसमें पायलट की गलती या चूक से प्लेन क्रैश हुआ, प्लेन के इंजन फेल हुए, कोई तकनीकी खामी आई, जीपीएस स्पूफिंग जैसा कोई साइबर अटैक हुआ या फिर कोई साजिश? अधिकारियों का कहना है कि जब तक जांच पूरी ना हो जाए। तब तक कुछ नहीं कहा जा सकता।

जांच के लिए अभी सारे विकल्प खुले हैं। हर एंगल को ध्यान में रखते हुए जांच की जाएगी। क्योंकि, प्लेन लैंडिंग के वक्त पहले पायलट ने रनवे दिखाई ना देने की बात कही थी। जबकि यहां विजिबिलिटी अच्छी थी। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर पायलट को रनवे क्यों नहीं दिखाई दे रहा था। क्या, प्लेन के अपने इंटरनल सिस्टम में कोई खराबी आई या फिर कोई साइबर अटैक हुआ?

प्लेन रनवे नंबर-11 पर लैंड ही नहीं हुआ
फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट असोसिएशन (FIP) के प्रेजिडेंट सीएस रंधावा का कहना है कि सबसे बड़ी बात यह है कि जब प्लेन क्रैश हुआ। उस वक्त वह यहां के रनवे नंबर-11 को अप्रोच नहीं कर रहा था। मतलब साफ है कि उस वक्त भी पायलटों को रनवे की स्थिति क्लीयर नहीं थी।

ऐसे में लगता है कि पायलट को विजिबिलिटी संबंधी कोई समस्या या फिर प्लेन का रेडार रनवे को अप्रोच ही नहीं कर पाया था। नतीजा, प्लेन रनवे के पास ही खेत में पड़े पत्थरों से टकराया गया और उसमें ब्लास्ट हो गया। अब सवाल यह है कि आखिर पायलट को लैंडिंग के वक्त भी रनवे ठीक से दिखाई क्यों नहीं दे रहा था? या फिर वह कन्फर्म था कि वह रनवे पर ही लैंड कर रहा है, जबकि वहां रनवे था ही नहीं।

बारामती में एटीसी टावर में नहीं बल्कि मोबाइल वैन से चलता है
बारामती एयरपोर्ट पर कोई एटीसी टावर नहीं है। यहां एटीसी टावर के नाम पर एक मोबाइल वैन है। जिसमें रेडार लगे हुए हैं। यह एटीसी मोबाइल वैन पुणे एटीसी के संपर्क में रहती है। जो की प्लेन के लैंड और टेक ऑफ के वक्त पुणे एटीसी से कॉर्डिनेट करते हुए यहां हवाई जहाजों को ऑपरेट करती है। ऐसे में यह भी संभव है कि यह मोबाइल एटीसी वैन में बैठे एटीसी अधिकारी प्लेन के लैंडिंग के दौरान चीजों को ठीक से समझ ही नहीं पाए हों और प्लेन को लैंड करने के आदेश दे दिए गए हों।

15 साल पुराना था यह प्लेन
यह छोटा प्लेन वीएसआर वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का लीयरजेट-45 प्लेन था। जिसे कनाडा की बॉम्बारडिया एयरोस्पेस ने बनाया था। इसका रजिस्ट्रेशन नंबर वीटी-एसएसके है। डीजीसीए के मुताबिक, यह प्लेन 2020 में बना था। अंतिम बार इसका रिनिवल तीन अप्रैल 2023 को हुआ था। जो की 20 अप्रैल 2028 तक वैलिड था। इस कंपनी के बेड़े में शामिल 17 बिजनेस जेट में सात लेयरजेट-45, पांच एंबरेयर 135 बीजे, चार किंग एयर बी-200 और एक पिलाटस पीसी-12 प्लेन हैं। इस प्लेन का अंतिम सेफ्टी ऑडिट फरवरी 2025 में हुआ था। जिसमें पहले स्तर पर कोई खामी ना मिलने का दावा किया गया है।

19 हजार फीट पर पहुंचने के बाद 2600 फुट पर टूट गया था एटीसी से संपर्क
यह प्लेन अपनी लास्ट फ्लाइंग के दौरान अधिकतम 19 हजार फीट की उंचाई तक उड़ा था। इसके बाद जब यह बारामती एयरपोर्ट पर एक बार गो-अराउंड करने के बाद दूसरी बार लैंड करने का प्रयास कर रहा था। तब 2600 फुट की हाइट पर इसका संपर्क एटीसी से टूट गया था। इसके बाद प्लेन क्रैश हो गया।

डीजीसीए का कहना है कि इस प्लेन के पायलट ने बुधवार सुबह 8:18 बजे बारामती से संपर्क किया। इसके बाद पुणे अप्रोच ने प्लेन को लैंड करने की परमिशन दे दी। उन्हें पायलट के विवेकानुसार दिखाई दे रहे मौसम संबंधी परिस्थितियों में उतरने की सलाह दी गई। चालक दल ने हवाओं और दृश्यता के बारे में पूछताछ की थी। जिसमें उन्हें बताया गया कि हवाएं शांत हैं और दृश्यता लगभग 3000 मीटर है।

अंतिम बार पायलट ने क्या कहा था
पायलट ने एटीसी से अंतिम बार कहा था कि उन्हें रनवे अभी दिखाई नहीं दे रहा है, रनवे दिखाई देने पर सूचित करेंगे। इसके कुछ सेकंड बाद ही पायलट ने सूचना दी कि उन्हें रनवे दिखाई दे रहा है। इसके बाद सुबह 8:43 बजे प्लेन को रनवे नंबर-11 पर लैंड करने की अनुमति दे दी गई। लेकिन पायलट की तरफ से कोई रीडबैक यानी एटीसी को जवाब दिया गया। फिर एक मिनट बाद ही 8:44 बजे एटीसी ने रनवे 11 के थ्रेशहोल्ड के पास प्लेन क्रैश हो गया।

me.sumitji@gmail.com

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