
देश की कानून व्यवस्था के रक्षक जब खुद ही मर्यादा की सीमा लांघने लगें तो समाज का विश्वास डगमगाना लाजमी है. सोमवार को कर्नाटक से आई एक खबर ने पूरे देश के पुलिस बेड़े को शर्मसार कर दिया है. कर्नाटक के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और नागरिक अधिकार प्रवर्तन निदेशालय के प्रमुख, डीजीपी के. रामचंद्र राव का एक आपत्तिजनक वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया है. यह मामला केवल एक व्यक्तिगत चूक नहीं, बल्कि उस पॉवर करप्शन की ओर इशारा करता है जहां सरकारी दफ्तरों को ‘अय्याशी का अड्डा’ बना दिया जाता है. यह पहला मामला देश में नहीं हुआ है, जब एक आईपीएस अधिकारी को सरकार ने निलंबित किया है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इससे पहले भी यूपी-बिहार और पंजाब सहित देश के कई राज्यों में आईपीएस अधिकारियों को रंगरेलियां मनाते पकड़े जाने पर संस्पेंड किया जा चुका है.
19 जनवरी 2026 को सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से प्रसारित हुआ, जिसमें डीजीपी के. रामचंद्र राव को कथित तौर पर अपनी वर्दी में, अपने ही कार्यालय के भीतर एक महिला ही नहीं कई महिलाओं के के साथ अनुचित और आपत्तिजनक स्थिति में देखा गया. वायरल क्लिप में अधिकारी को कार्यालय की कुर्सी पर बैठकर एक महिला को चूमते और गले लगाते हुए दिखाया गया है. सूत्रों के अनुसार, वह महिला अक्सर किसी न किसी काम के सिलसिले में डीजीपी कार्यालय आती रहती थी.
कौन हैं रामचंद्र राव?
हालांकि, राव ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए वीडियो को ‘डॉक्टर्ड’ और ‘फर्जी’ बताया है. उन्होंने दावा किया कि यह उन्हें बदनाम करने की एक गहरी साजिश है. लेकिन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच के आदेश दिए और राव को निलंबित कर दिया गया. गौरतलब है कि रामचंद्र राव पहले से ही अपनी सौतेली बेटी और कन्नड़ अभिनेत्री रान्या राव से जुड़े सोने की तस्करी के मामले के कारण विवादों में थे.
एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर ने छीनी नौकरी
आईपीएस अधिकारियों के अनैतिक संबंधों का यह कोई पहला मामला नहीं है. राजस्थान कैडर के 2009 बैच के आईपीएस अधिकारी पंकज चौधरी को साल 2019 में केंद्र सरकार ने सेवा से बर्खास्त कर दिया था. उन पर आरोप था कि उन्होंने अपनी पहली पत्नी के रहते हुए एक दूसरी महिला के साथ संबंध बनाए और उनसे उनका एक बच्चा भी था. जांच में उन्हें गंभीर कदाचार का दोषी पाया गया और अखिल भारतीय सेवा नियमावली के उल्लंघन के आधार पर उन्हें घर भेज दिया गया.
जब डीजीपी पर लगा था छेड़छाड़ का दाग
पंजाब पुलिस के सबसे चर्चित चेहरों में से एक पूर्व डीजीपी के.पी.एस. गिल, जो आतंकवाद के खात्मे के लिए जाने जाते थे, उनका दामन भी एक महिला के साथ बदसलूकी के दाग से अछूता नहीं रहा. साल 1996 में उन्हें एक महिला आईएएस अधिकारी की ‘मर्यादा भंग’ करने (आउटरेजिंग द मॉडस्टी) के आरोप में दोषी ठहराया गया था. इस मामले ने उस समय देश के शीर्ष अधिकारियों के व्यक्तिगत आचरण पर बड़े सवाल खड़े किए थे.
महाराष्ट्र और यूपी में आया था ये मामला
महाराष्ट्र में भी कई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों डीजीपी और एडीजीपी रैंक के बीच आपस में या अधीनस्थ महिला अधिकारियों के साथ प्रेम प्रसंगों और अनैतिक संबंधों की खबरें मीडिया में सुर्खियां बटोर चुकी हैं, जिससे बल की छवि धूमिल हुई. साल 2018 में बेंगलुरु ग्रामीण के तत्कालीन एसपी भीमाशंकर गुलेड का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह वर्दी में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की पत्नी के साथ आपत्तिजनक स्थिति में नजर आए थे.
ओडिशा की एक घटना ने बटोरी थी सुर्खियां
हाल ही ओडिशा की एक घटना ने लोगों को ध्यान खींचा था. जगतसिंहपुर के एक पुलिस अधिकारी और महिला होमगार्ड के बीच प्रेम प्रसंग और उसके बाद हुए विवाद ने काफी तूल पकड़ा था. इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सत्ता का नशा और नैतिक पतन किसी भी रैंक के अधिकारी को अपनी चपेट में ले सकता है. रामचंद्र राव के मामले में भाजपा और विपक्षी दलों ने इसे अक्षम्य अपराध बताया है और कहा है कि ऐसे कृत्यों से पुलिस विभाग पर जनता का भरोसा टूटता है. जब एक शीर्ष स्तर का अधिकारी अपने कार्यालय में, जो न्याय और सुरक्षा का प्रतीक होना चाहिए, ऐसी हरकतों में लिप्त पाया जाता है, तो यह पूरी व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाता है.
फिलहाल, कर्नाटक सरकार वीडियो की सत्यता की जांच फॉरेंसिक लैब (FSL) के जरिए करवा रही है. यदि यह साबित होता है कि वीडियो सही है, तो रामचंद्र राव पर कड़ी कानूनी और विभागीय कार्रवाई होना तय है. लेकिन सवाल वही बना हुआ है वर्दी की गरिमा कब तक ऐसे ‘रंगमिजाज’ अधिकारियों के हाथों तार-तार होती रहेगी?



