भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों को बल्क डिपॉजिट पर अलगअलग ब्याज दरें देने की अनुमति दी है, जो 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगी। बैंकों को अब अपनी वेबसाइट पर बल्क डिपॉजिट की ब्याज दरें प्रकाशित करनी होंगी और उच्च जोखिम वाले जमा पर अधिक ब्याज दे सकेंगे।

भारत के केंद्रीय बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बड़ा कदम उठाया है। RBI ने बैंकों को लिक्विडिटी कवरेज रेशियो फ्रेमवर्क के तहत, उनके खास रनऑफ रेट्स के आधार पर बल्क डिपॉजिट्स पर अलगअलग ब्याज दरें देने की इजाजत दी है। यानी अब बैंक अपने ग्राहकों को बल्क डिपॉजिट पर अलगअलग ब्याज दरें ऑफर कर सकते हैं।

लेकिन इसका फायदा आम रिटेल क्लाइंट्स को नहीं मिलेगा। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। बल्क डिपॉजिट की रकम थोड़ी बड़ी होती है। RBI द्वारा दी गई मंजूरी 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगी। आइए जानते हैं क्याक्या चीजें बदल जाएंगी।

1 अक्टूबर से बैंकों को करना होगा ये काम

30 जुलाई, 2026 को RBI ने ‘रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया दूसरा संशोधन निर्देश, 2026’ जारी किया। इसमें बैंकों द्वारा डिपॉजिट पर ब्याज दरें तय करने और उनके बारे में जानकारी देने के तरीके में तीन खास बदलाव किए गए हैं।

RBI के अनुसार बैंकों को 1 अक्टूबर से हर कामकाजी दिन सुबह 10:00 बजे तक अपनी ऑफिशियल वेबसाइट पर बल्क डिपॉजिट पर मिलने वाली ब्याज दरें प्रकाशित करनी होंगी। इसमें 10 मिनट तक की छूट भी दी गई है। यानी बैंकों को हर हाल में सुबह 10 बजकर 10 मिनट तक बल्क डिपॉजिट पर मिलने वाली ब्याज दरों को वेबसाइट पर छापना होग।

बैंक किसी भी डिपॉजिट पर जो भी दर ऑफ़र करता है, वह उसकी वेबसाइट पर पहले से दिखाई गई दर से बिल्कुल मेल खानी चाहिए। जमाकर्ता को ऐसी कोई दर ऑफर नहीं की जा सकती जो सार्वजनिक रूप से बताई गई दर से अलग हो। बैंकों को सभी ब्रांच और सभी ग्राहकों के लिए, एक ही तारीख पर जमा की गई एक जैसी रकम पर एक ही ब्याज दर देनी होगी। कोई बैंक एक ही दिन एक जैसी रकम जमा करने वाले एक ग्राहक को एक दर और दूसरे ग्राहक को अलग दर नहीं दे सकता।

तीसरा बदलाव ज्यादा टेक्निकल है और असल में इससे बैंकों को कम के बजाय ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी मिलती है। अब तक, बैंकों को जोखिम के अंतर के बावजूद सभी बल्क डिपॉजिट पर एक ही दर देनी पड़ती थी। नए नियम के तहत, बैंक उन डिपॉजिट पर ज्यादा ब्याज दर दे सकते हैं जिनमें पैसे निकालने का जोखिम ज्यादा होता है। यानी LCR की भाषा में, जिनका ‘रनऑफ रेट’ ज्यादा होता है।

क्या होता है बल्क डिपॉजिट

बल्क डिपॉजिट 3 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा की कोई भी एकमुश्त फिक्स्ड डिपॉजिट होती है। आम रिटेल ग्राहक आमतौर पर इनमें डील नहीं करते हैं।आमतौर पर बल्क डिपॉजिट आमतौर पर कंपनियां, बड़े बिज़नेस, ट्रस्ट और ज्यादा नेट वर्थ वाले लोग करते हैं, जो एक तय समय के लिए ब्याज दर के बदले बैंकों में बड़ी रकम जमा करते हैं।

क्यों किए गए बदलाव

ये बदलाव मई में आई उन मीडिया रिपोर्टों के बाद हुए हैं जिनमें कहा गया था कि भारत के सबसे बड़े प्राइवेट लेंडर, HDFC बैंक ने फाइनेंशियल ईयर 2024 और 2025 में महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम को लगभग 450 मिलियन रुपये का भुगतान किया था। इन भुगतानों को डिफरेंशियल इंटरेस्ट से जुड़े मार्केटिंग खर्च के तौर पर दर्ज किया गया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, MSRDC को 6.01% की ब्याज दर दी गई, जो रेगुलर सेविंग्स रेट से काफी ज़्यादा है। इससे ब्याज दरों में लगभग 2.5% का अंतर आया।