
भारत का वो बाजार, जहां नालियों के कचरे से निकलता है सोना, दूर-दूर से इसे ढूंढ़ने आते हैं लोग!
Last Updated:October 31, 2026, 16:03 IST
भारत के एक ऐसा बाजार जहां लोग नालियों की गाद और कचरे से सोने के बारीक कण निकालते हैं. गहनों की कटिंग और पॉलिशिंग के दौरान निकली सोने की धूल नालियों और घरों की मिट्टी तक पहुंच जाती है. इस अनोखे कारोबार में दूसरे राज्य के लोग भी सोने की तलाश में आते हैं.
भारत के इस बाजार के नालियों से निकलता है सोना(फोटो: Ai generated image)
आमतौर पर जब किसी गली या बाजार की नाली में कचरा जमा होता है, तो लोग उससे दूर रहना ही पसंद करते हैं. गंदी बदबू और कीचड़ देखकर शायद ही कोई वहां रुकना चाहे. लेकिन क्या हो अगर आपको पता चले कि इसी गंदगी में सोना भी छिपा हो सकता है? जाहिर है, आप हैरान रह जाएंगे. बिहार के आरा शहर में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिलता है. यहां लोग नालियों की गाद और कचरे में सोने के छोटे-छोटे कण तलाशते हैं. दिलचस्प बात यह है कि इस काम के लिए सिर्फ आसपास के लोग ही नहीं, बल्कि राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से भी लोग पहुंचते हैं. उनके लिए यहां का कचरा बेकार नहीं, बल्कि कमाई का एक संभावित जरिया है.
आरा के बाजारों की नालियों में कैसे पहुंचता है सोना?
आरा शहर के गुदरी बाजार और जगजीवन मार्केट में सोने-चांदी के गहनों का कारोबार बड़े पैमाने पर होता है. यहां कई दुकानें और कारीगर आभूषण बनाने से लेकर उनकी कटिंग, घिसाई और पॉलिशिंग तक का काम करते हैं. गहने तैयार करने की इस प्रक्रिया में सोने के बेहद छोटे कण निकलते हैं. कई बार ये कण इतने बारीक होते हैं कि सामान्य आंखों से इन्हें पहचानना भी मुश्किल होता है. जब कारीगर दुकानों की सफाई करते हैं, तो सोने के ये कण फर्श पर जमा धूल और बुरादे के साथ मिल जाते हैं. इसके बाद सफाई के दौरान पानी के साथ बहकर इनमें से कुछ कण नालियों तक पहुंच जाते हैं. धीरे-धीरे नालियों की गाद में सोने के बारीक कण जमा होने लगते हैं. यही वजह है कि इन बाजारों की नालियां कुछ लोगों के लिए खास बन गई हैं. जहां आम लोग कचरा देखते हैं, वहीं ये लोग उसमें सोने की संभावना तलाशते हैं.
नालियों की गाद छानने के लिए दूर-दूर से आते हैं लोग
इस अनोखे काम में स्थानीय लोगों के साथ दूसरे राज्यों से आए लोग भी शामिल हैं. राजस्थान और मध्य प्रदेश से आने वाले कुछ लोग भी आरा के इन बाजारों में नालियों की गाद और कचरा इकट्ठा करने पहुंचते हैं. उन्हें उम्मीद रहती है कि मिट्टी और गंदगी के बीच उन्हें सोने के कीमती कण मिल जाएंगे. इसके लिए पहले नालियों से गाद और कचरा निकाला जाता है. फिर उसे अलग-अलग तरीकों से साफ किया जाता है. छानने, धोने और पारंपरिक तरीकों की मदद से मिट्टी से सोने के बारीक कण अलग करने की कोशिश होती है. इस काम में काफी धैर्य और मेहनत लगती है. कई बार घंटों की मशक्कत के बाद भी कुछ खास हाथ नहीं लगता, जबकि कभी-कभी थोड़ी-सी गाद से भी सोने के कण मिल जाते हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। यानी इस काम में मेहनत तो तय है, लेकिन कमाई की कोई गारंटी नहीं. कितनी मात्रा में सोना मिलेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि इकट्ठा की गई मिट्टी में कितने कण मौजूद हैं.
घरों की धूल और झाड़ू का कचरा भी नहीं जाता बेकार
आरा के इस कारोबार का एक और दिलचस्प पहलू है, जिसके बारे में जानकर आप चौंक सकते हैं. यहां सिर्फ दुकानों की नालियों और कचरे पर ही लोगों की नजर नहीं रहती, बल्कि घरों से निकलने वाली धूल और बुरादे को भी संभालकर रखा जाता है. बताया जाता है कि कुछ घरों में महिलाएं सालभर झाड़ू लगाने के बाद जमा हुई धूल और बुरादे को फेंकने के बजाय एक जगह इकट्ठा करती रहती हैं. खासकर दिवाली के आसपास जब घरों की अच्छी तरह सफाई की जाती है, तो इस जमा कचरे की बोली लगाई जाती है. कुछ खरीदार इसे पैसे देकर खरीद लेते हैं. इसकी वजह है कि आभूषण बनाने और उनसे जुड़े कामों के दौरान सोने के बेहद छोटे कण घरों की धूल में भी पहुंच सकते हैं.
सोने की उम्मीद में होती है घंटों मेहनत
इस पूरे कारोबार में सबसे खास बात यह है कि यहां सोने का एक-एक कण कीमती माना जाता है. आभूषणों की कटिंग और घिसाई के दौरान निकलने वाली धूल तक को संभालकर रखा जाता है. दुकानदारों से लेकर घरों में रहने वाली महिलाओं तक, कई लोग जानते हैं कि जिस धूल को दूसरे लोग बेकार समझकर फेंक देते हैं, उसमें भी कुछ कीमती कण छिपे हो सकते हैं. हालांकि, नालियों की गाद से सोना निकालना कोई आसान काम नहीं है. इसमें समय, मेहनत और धैर्य तीनों की जरूरत पड़ती है. कई बार दिनभर कीचड़ और मिट्टी छानने के बाद भी हाथ खाली रह जाते हैं. फिर भी कुछ लोगों को उम्मीद रहती है कि अगली बार उनकी मेहनत रंग लाएगी. आरा के गुदरी बाजार और जगजीवन मार्केट का यह कारोबार दिखाता है कि सोने की कीमत सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं है. यहां तो उसकी तलाश नालियों की गाद, दुकानों की धूल और घरों के कचरे तक में की जाती है. यही वजह है कि इस शहर की गलियों में कचरे के बीच सोने के कण तलाशने का यह अनोखा सिलसिला आज भी लोगों को आकर्षित करता है.



