कर्नाटक के बांदीपुर टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की लगातार हो रही मौत और शिकार की घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी है. कुछ दिन पहले ही यहां बाघ के शिकार का मामला सामने आया था. इसके बाद कराडिकल्लू पहाड़ी के पास एक हाथी का शव मिला था, जिसके दांत गायब थे. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। अब चामराजनगर के बांदीपुर वन क्षेत्र में एक और हाथी की मौत का मामला सामने आया है. करीब 35 साल की गर्भवती जंगली हथिनी मृत मिली है.

यह घटना चामराजनगर जिले के गुंडलुपेट तालुका स्थित बांदीपुर टाइगर रिजर्व के गोपालस्वामी बेट्टा वन क्षेत्र की है. जंगल की सीमा से करीब 150 मीटर दूर एक निजी जमीन पर हथिनी का शव मिला. इसकी सूचना मिलने के बाद बांदीपुर के वन अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की.
मृत हथिनी की उम्र करीब 35 साल थी. पशु चिकित्सक डॉ. मिर्जा वसीम ने मौके पर पहुंचकर शव का पोस्टमॉर्टम किया. इस दौरान पता चला कि हथिनी गर्भवती थी और उसके पेट में बच्चा पल रहा था. हालांकि, शुरुआती जानकारी में हाथी के बच्चे की उम्र को लेकर अलगअलग बातें सामने आई हैं. इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है.
दो जंगली हाथियों की लड़ाई में मौत की आशंका
वन विभाग के कर्मचारियों को शुरुआती जांच में आशंका है कि दो जंगली हाथियों के बीच हुई लड़ाई में गर्भवती हथिनी की मौत हुई होगी. हालांकि, अभी मौत की असली वजह स्पष्ट नहीं है. अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह पता चल सकेगा कि हथिनी की मौत किन परिस्थितियों में हुई.
पहले बाघ का शिकार, फिर हाथी के दांत गायब मिलने से बढ़ी चिंता
बांदीपुर में पिछले कुछ दिनों के दौरान वन्यजीवों से जुड़ी कई घटनाएं सामने आई हैं. कुछ दिन पहले ही बांदीपुर के मद्दूर वन क्षेत्र के होंगल्ली बीट में एक बाघ के शिकार का मामला सामने आया था. बताया गया कि बाघ तार के फंदे में फंस गया था.
इस मामले में मध्यप्रदेश के कटनी जिले के बावरिया गैंग की भूमिका होने का संदेह जताया गया था. इससे पहले 2009 में कोल्लेगल के गुंडाल बांध के पास भी स्टील के फंदे का इस्तेमाल कर बाघ का शिकार किया गया था. उस मामले में भी बावरिया गैंग के कुछ सदस्यों को गिरफ्तार किया गया था.
इसके बाद कराडिकल्लू पहाड़ी के पास एक हाथी का शव मिला था. जांच के दौरान पता चला कि हाथी के दांत गायब थे. इससे आशंका जताई गई कि हाथी का शिकार कर उसके दांत निकाल लिए गए होंगे. लगातार सामने आ रही इन घटनाओं के बाद यह सवाल भी उठा कि कहीं इनके पीछे एक ही गिरोह का हाथ तो नहीं है.
हालांकि, अभी तक किसी भी मामले में बावरिया गैंग का कनेक्शन साबित नहीं हुआ है. लगातार हो रही इन घटनाओं ने बांदीपुर टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की सुरक्षा और जंगल में वन विभाग की गश्त व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं.



