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Kochi Mercedes Crash: केरल के कोच्चि में नाबालिग बेटे की मर्सिडीज कार से कुचलकर एक स्कूटर सवार की मौत के मामले में अतिरिक्त जिला जज की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पुलिस ने सोमवार को जज के खिलाफ सबूत मिटाने की कोशिश करने के आरोप में नया केस दर्ज किया है। इससे पहले जज के खिलाफ गैर इरादतन हत्या और लापरवाही से गाड़ी चलाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में लापरवाही बरतने पर चार पुलिसकर्मियों को भी सस्पेंड कर दिया गया है।

25 अक्टूबर को मर्सिडीज ने स्कूटर में मारी थी टक्कर

यह घटना 25 अक्टूबर की है जब अतिरिक्त जिला जज के 17 वर्षीय बेटे ने अपनी मर्सिडीज-बेंज कार से एक स्कूटर को टक्कर मार दी थी। हादसे में स्कूटर सवार जयबालकृष्णन की मौके पर ही मौत हो गई थी। मंजली निवासी जयबालकृष्णन चिट्टूर इलाके में सड़क किनारे खाने का ठेला लगाते थे। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने जज के नाबालिग बेटे को मौके पर ही पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था।

थाने पहुंचकर पुलिसकर्मी से डिलीट करवाई बेटे की फोटो

चेरानल्लूर पुलिस के मुताबिक मृतक जयबालकृष्णन के परिवार ने रविवार को पुलिस में एक नई शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि हादसे के बाद जज काफी देर तक घटनास्थल पर रहे और मामले से जुड़े सबूत मिटाने की कोशिश की।

परिवार का यह भी आरोप है कि हादसे के बाद जज चेरानल्लूर पुलिस थाने पहुंचे थे। वहां उन्होंने एक पुलिस अधिकारी पर दबाव डालकर अपने बेटे की वह तस्वीर फोन से डिलीट करवा दी जिसे मृतक के परिवार के एक सदस्य ने खींचा था।

4 पुलिसकर्मी सस्पेंड, जज को हो सकती है 3 साल की सजा

कोच्चि की पुलिस कमिश्नर आर. निशांतिनी ने पीड़ित परिवार की शिकायत मिलने की पुष्टि की है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने जज के खिलाफ सबूत मिटाने की कोशिश की धाराओं में केस दर्ज किया है। इस अपराध में दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की जेल, 5 हजार रुपये जुर्माना या दोनों सजाएं हो सकती हैं।

इस प्रकरण में चार पुलिसकर्मियों को भी सस्पेंड किया गया है। हालांकि, पुलिस ने निलंबन का आधिकारिक कारण नहीं बताया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक शुरुआत में आरोपियों पर हल्की धाराएं लगाने और थाने में फोटो डिलीट करवाने के मामले में यह कार्रवाई की गई है।

नाबालिग बेटे की जमानत रद्द कराने कोर्ट पहुंची पुलिस

पुलिस कमिश्नर ने पीड़ित परिवार से बात कर उन्हें निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। मामले में मुख्यमंत्री और गृह मंत्री स्तर से भी पीड़ित परिवार से बातचीत की गई है। हादसे के बाद पकड़े गए जज के बेटे को शुरुआत में थाने से जमानत दे दी गई थी। बाद में किशोर न्याय बोर्ड (JJB) ने भी कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड न होने के आधार पर उसकी जमानत मंजूर कर ली थी। अब पुलिस ने नाबालिग आरोपी की जमानत रद्द कराने के लिए विशेष अदालत में अर्जी दाखिल की है।