
Husband Wife Extramarital Affair: हाल ही में मद्रास में एक पिता ने अपने बच्चे का DNA टेस्ट करवाने की अपील की है. अब सवाल ये उठ रहा है कि ऐसा क्यों करवाया? तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बता दें कि मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने एक बच्चे का DNA टेस्ट कराने से मना कर दिया है. बच्चे के पिता ने सवाल किया था कि क्या वो पिता है और उसने बच्चे का DNA अपने DNA से मैच करने की रिक्वेस्ट की थी. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। हाई कोर्ट ने कहा कि बच्चे की लीगल वैलिडिटी को चैलेंज करने का कोई मज़बूत आधार नहीं है. कोर्ट ने ये भी कहा कि ऐसा टेस्ट रेगुलर नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने पति पर ₹50,000 का जुर्माना भी लगाया. हाई कोर्ट ने पाया कि पति ने अपनी पत्नी को बेइज्जत करने और समाज में उसकी रेप्युटेशन को नुकसान पहुंचाने के लिए यह लीगल एक्शन शुरू किया था.
पत्नी की छवि करना चाहता था खराब
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जस्टिस शमीम अहमद ने अपने ऑर्डर में पति की क्रिमिनल रिवीजन पिटीशन को भी खारिज कर दिया है. पति ने एक पेंडिंग डोमेस्टिक वायलेंस केस में DNA टेस्ट का ऑर्डर देने से मना करने के मजिस्ट्रेट के फैसले को चैलेंज किया था. कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि बच्चे की पहचान और प्राइवेसी के अधिकार को सिर्फ इसलिए कुर्बान नहीं किया जा सकता क्योंकि माता-पिता अपनी बेवफाई के आरोपों को साबित करना चाहते हैं.
वहीं इसे लेकर हाई कोर्ट ने साफ कहा कि बच्चे को ये साबित करने के लिए मोहरे की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता कि मां पिता के प्रति बेवफा थी. हाई कोर्ट के इस फैसले ने इंडियन एविडेंस एक्ट, 2023 के सेक्शन 116 की अहमियत को फिर से बताया है. इस सेक्शन के मुताबिक, एक वैलिड शादी के दौरान पैदा हुआ बच्चा कानूनी तौर पर जायज़ माना जाता है.
आखिर क्यों हुआ दोनों के बीच झगड़ा
कपल ने 2008 में शादी की थी और उनका एक बेटा भी है. शादी के झगड़ों की वजह से, पत्नी ने 2013 में अपने पति के खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला दर्ज कराया है. 2023 में, पति ने ये भी साबित करने के लिए DNA टेस्ट के लिए अर्जी दी कि बच्चा बायोलॉजिकली उसका नहीं है. उसने दावा किया कि कंसीव करने से पहले और प्रेग्नेंसी के दौरान कपल के बीच कोई फिजिकल रिलेशन नहीं था. मजिस्ट्रेट ने 2023 को अर्जी खारिज कर दी.



