इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के बाद ज्यादातर लोग यह मान लेते हैं कि उनका काम खत्म हो गया है. कई बार लोग फॉर्म16, बैंक स्टेटमेंट, निवेश के दस्तावेज और अन्य टैक्स रिकॉर्ड डिलीट कर देते हैं या संभालकर नहीं रखते. लेकिन टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि यह लापरवाही भविष्य में भारी पड़ सकती है. आयकर विभाग कई साल बाद भी किसी लेनदेन, टैक्स छूट, कैपिटल गेन या अन्य दावों की जांच के लिए दस्तावेज मांग सकता है. ऐसे में सही रिकॉर्ड सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है.

क्या सिर्फ डिजिटल कॉपी रखना काफी है?

आज के समय में अधिकांश टैक्स दस्तावेज ऑनलाइन उपलब्ध होते हैं. फॉर्म16, फॉर्म 26AS, एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट , बैंक स्टेटमेंट और निवेश से जुड़े दस्तावेज आसानी से डिजिटल रूप में डाउनलोड किए जा सकते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य टैक्सपेयर्स के लिए इन दस्तावेजों की साफ और सुरक्षित डिजिटल कॉपी रखना पर्याप्त माना जाता है, बशर्ते जरूरत पड़ने पर उन्हें आसानी से निकाला जा सके.

हालांकि, कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों की मूल हार्ड कॉपी भी संभालकर रखनी चाहिए. इनमें प्रॉपर्टी खरीदने के कागजात, गिफ्ट डीड, लोन एग्रीमेंट, विरासत से जुड़े दस्तावेज और ऐसे रिकॉर्ड शामिल हैं जो किसी संपत्ति के मालिकाना हक या उसकी खरीद लागत को साबित करते हैं. ऐसे मामलों में डिजिटल कॉपी के साथ ओरिजिनल दस्तावेज भी सुरक्षित रखना बेहतर माना जाता है.

आय के स्रोत के हिसाब से रखें जरूरी रिकॉर्ड

विशेषज्ञों के मुताबिक, किन दस्तावेजों को सुरक्षित रखना है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी आय किस स्रोत से आती है. अगर आप नौकरीपेशा हैं और ITR1 दाखिल करते हैं, तो फॉर्म16, सैलरी स्लिप, बैंक स्टेटमेंट, ब्याज प्रमाणपत्र, निवेश के प्रमाण और टैक्स छूट से जुड़े दस्तावेज संभालकर रखें.

अगर आपने शेयर, म्यूचुअल फंड या प्रॉपर्टी बेचने से कैपिटल गेन कमाया है और ITR2 दाखिल किया है, तो खरीदबिक्री के दस्तावेज, डिमैट स्टेटमेंट, कॉन्ट्रैक्ट नोट, ब्रोकर स्टेटमेंट, स्टांप ड्यूटी और कैपिटल गेन छूट से जुड़े सभी रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखें.वहीं, बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम वाले टैक्सपेयर्स को अकाउंट बुक्स, इनवॉइस, खर्च के बिल, GST रिकॉर्ड, बैंक स्टेटमेंट, लोन दस्तावेज और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड संभालकर रखने चाहिए.

हर टैक्सपेयर के पास होने चाहिए ये दस्तावेज

विशेषज्ञों के अनुसार कुछ दस्तावेज ऐसे हैं जो लगभग हर टैक्सपेयर को सुरक्षित रखने चाहिए. इनमें ITR की रसीद , फाइल किया गया ITR, फॉर्म16 या 16A, फॉर्म26AS, AIS, टैक्स भुगतान की चालान रसीद, बैंक स्टेटमेंट, LIC, ELSS और हेल्थ इंश्योरेंस जैसे निवेश के प्रमाण, होम लोन ब्याज प्रमाणपत्र तथा जरूरत के अनुसार प्रॉपर्टी और बिजनेस से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं.

कितने साल तक रखें टैक्स रिकॉर्ड?

टैक्स विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि संबंधित असेसमेंट ईयर खत्म होने के बाद कम से कम आठ साल तक ITR और उससे जुड़े सभी दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए. अगर किसी टैक्स मामले की जांच, अपील या पुनर्मूल्यांकन चल रहा है, तो रिकॉर्ड तब तक सुरक्षित रखें जब तक मामला पूरी तरह खत्म न हो जाए.

वहीं, प्रॉपर्टी, विरासत में मिली संपत्ति या गैरसूचीबद्ध शेयर जैसे दीर्घकालिक निवेशों से जुड़े दस्तावेज संपत्ति बेचने तक और उसके बाद भी कई वर्षों तक संभालकर रखना समझदारी है.

भविष्य की परेशानी से बचाएंगे व्यवस्थित रिकॉर्ड

आयकर विभाग जरूरत पड़ने पर स्क्रूटनी, AIS और फॉर्म26AS में दर्ज जानकारी के मिलान, कैपिटल गेन की जांच, टैक्स छूट के सत्यापन या बड़े वित्तीय लेनदेन की जांच के दौरान दस्तावेज मांग सकता है. ऐसे में अगर आपके रिकॉर्ड व्यवस्थित होंगे तो नोटिस का जवाब देना आसान होगा और अनावश्यक परेशानी से भी बचा जा सकेगा.

यही वजह है कि टैक्स विशेषज्ञ ITR फाइल करने के बाद सभी जरूरी दस्तावेजों को व्यवस्थित तरीके से डिजिटल और जहां जरूरी हो, वहां हार्ड कॉपी में भी सुरक्षित रखने की सलाह देते हैं. यह आदत भविष्य में समय, मेहनत और कानूनी परेशानियों से बचाने में अहम भूमिका निभा सकती है.