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देवरिया : उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. शादी का झांसा देकर युवती से शारीरिक संबंध बनाने के एक आरोपी को नियमों को ताक पर रखकर छह दिनों तक सलेमपुर थाने में बैठाए रखने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है. हाईकोर्ट की सख्ती के बाद देवरिया के एसपी अभिजीत आर शंकर ने बुधवार रात कार्रवाई करते हुए सलेमपुर के कोतवाल विनोद कुमार सिंह और मामले के विवेचक दरोगा दीप नारायण को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है. कोर्ट ने 23 अक्टूबर को विवेचक को सीसीटीवी फुटेज और तमाम दस्तावेजों के साथ तलब किया है.

किराये के कमरे में युवती को रखने का था मामला, मां पहुंची हाईकोर्ट

जानकारी के मुताबिक, सलेमपुर उपनगर में एक युवक पर किराये के कमरे में युवती को रखकर शादी का झांसा देने और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगा था. सलेमपुर पुलिस ने इस मामले में मुकदमा दर्ज किया और आरोपी की गिरफ्तारी दिखाते हुए 2 सितंबर को उसका चालान कर दिया. इधर, आरोपी की मां ने पुलिस की इस कार्रवाई के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और रिट याचिका दाखिल कर दी. मां ने कोर्ट में सीधा आरोप लगाया कि पुलिस ने उसके बेटे को गैरकानूनी तरीके से छह दिनों तक कोतवाली में बैठाए रखा और बाद में गिरफ्तारी दिखाई.

सीसीटीवी फुटेज ने खोल दी पोल, कभी ऑफिस तो कभी कोतवाल के कक्ष में दिखा आरोपी

हाईकोर्ट द्वारा मामले का संज्ञान लेने और विवेचक को 23 अक्टूबर को तलब किए जाने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया. एसपी अभिजीत आर शंकर ने खुद इस पूरे प्रकरण की जांच कराई. जब कोतवाली के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए तो मां के आरोप सही साबित हुए.

जांच में सामने आया कि 28 अगस्त से लेकर 2 सितंबर तक आरोपी सलेमपुर कोतवाली में ही मौजूद था. सीसीटीवी फुटेज में वह कभी थाने के कार्यालय में तो कभी खुद प्रभारी निरीक्षक के कक्ष में बैठा दिखाई दिया. कानूनी जानकारों के मुताबिक, किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लेने के बाद अधिकतम 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना अनिवार्य होता है. मामला पूरी तरह साफ होने पर एसपी ने कोतवाल विनोद कुमार सिंह और विवेचक दीप नारायण को निलंबित कर दिया. उनकी जगह राहुल सिंह को सलेमपुर कोतवाली की कमान सौंपी गई है.

पहले भी थानों में अवैध हिरासत को लेकर हो चुकी है देवरिया पुलिस की किरकिरी

देवरिया जिले में पुलिसकर्मियों की ऐसी लापरवाही का यह पहला मामला नहीं है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। कुछ महीने पहले ही सेना के एक जवान ने भलुअनी थाना पुलिस पर थाने में रखकर प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. तब हाईकोर्ट के सीसीटीवी फुटेज मांगने पर पुलिस अधिकारियों ने जनरेटर और लाइट खराब होने का बहाना बनाकर फुटेज न होने का दावा किया था.

इसी तरह गौरीबाजार थाने में भी हत्या के एक आरोपी को कई दिनों तक अवैध रूप से बैठाए रखने का मामला हाईकोर्ट पहुंचा था, जिसमें कोर्ट ने सख्त फैसला सुनाते हुए थानेदार के वेतन से पीड़ित पक्ष को मुआवजा देने का निर्देश दिया था. अब सलेमपुर कोतवाली के इस नए कांड ने एक बार फिर विभाग की फजीहत करा दी है.