कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के हाई लेवल पर बने रहने के कारण, भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक लगातार पांचवें सत्र में गिरावट के साथ खुले. सोमवार को बाजार खुलने के कुछ ही मिनटों के भीतर निफ्टी 50 सूचकांक 22,524 पर नीचे खुला और 22,387 के निचले स्तर तक आ गया. बीएसई सेंसेक्स 72,990 पर नीचे खुला और 72,514 के निचले स्तर तक पहुंच गया. हालांकि, निचले स्तरों पर खरीदारी होने के बाद दोनों सूचकांकों में जोरदार रिकवरी देखने को मिली. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इस गिरावट के दौरान, सुबह के सत्र में रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर एनएसई पर 1,174.50 रुपए प्रति शेयर के निचले स्तर तक आ गए थे. हालांकि, जल्द ही निफ्टी और सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में खरीदारी लौटी और वे हरे निशान में आ गए.

रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर खरीदने के 3 मुख्य कारण
शेयर बाजार के जानकारों के अनुसार, दलाल स्ट्रीट पर कमजोर रुझानों के चलते रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के शेयरों पर दबाव है. उनका कहना है कि कंपनी के फंडामेंटल बहुत मजबूत हैं. मध्य पूर्व में चल रहे संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच, बेहतरीन तेल रिफाइनर कंपनियों की जरूरत है, और RIL इस कैटेगिरी में बिल्कुल फिट बैठती है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मुकेश अंबानी के साथ हुई मुलाकात को इसी नजरिए से देखा जाना चाहिए.
जानकारों ने बताया कि रिलायंस के ‘जियो प्लेटफॉर्म्स’ की वैल्यू अनलॉक होने से भी RIL को फायदा मिलेगा, क्योंकि कंपनी की शेयर पूंजी का लगभग दोतिहाई हिस्सा उसी के पास है. भारतीय शेयर बाजार में मौजूदा गिरावट के बीच रिलायंस के शेयर खरीदने के तीसरे कारण की ओर इशारा करते हुए, विशेषज्ञों ने कहा कि अमेरिकाईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं, लेकिन डीजल की कीमतों में और भी ज्यादा उछाल आया है. RIL डीजल का निर्यात करती है, इसलिए उम्मीद है कि उसे इसका भी फायदा मिलेगा.
मार्को रुबियो की मुकेश अंबानी से मुलाकात
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और मुकेश अंबानी की मुलाकात के संदर्भ में, ‘अविनाश मेंटर रिसर्च’ के फाउंडर अविनाश गोरक्षकर ने मिंट की रिपोर्ट में कहा कि हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि मार्को रुबियो और मुकेश अंबानी की इस मुलाकात में रिफाइनिंग कारोबार पर चर्चा हो सकती है.
दरअसल, लंबे समय से चल रहे अमेरिकाईरान संघर्ष के कारण मध्य पूर्व में कई रिफाइनरियां बंद हो गई हैं. वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन के बाद, वहां कच्चे तेल का उत्पादन मौजूदा 1 मिलियन बैरल प्रतिदिन से बढ़कर लगभग 2.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंचने की उम्मीद है. हालांकि, वेनेजुएला का कच्चा तेल काफी गाढ़ा होता है, जिसे केवल कुछ ही रिफाइनरियां प्रोसेस कर सकती हैं.
रिलायंस इंडस्ट्रीज उनमें से एक है. रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले से ही रूस से आयातित ‘यूराल क्रूड ऑयल’ को रिफाइन कर रही है, जो काफी हद तक वेनेजुएला के कच्चे तेल जैसा ही है. गोरक्षकर ने कहा कि बाजार, रूस की तरह ही वेनेजुएला के कच्चे तेल के लिए भी RIL को एक तरह की छूट दे रहा है. इससे RIL का रिफाइनिंग कारोबार और मजबूत होगा, जिससे कंपनी की बैलेंस शीट और भी बेहतर हो जाएगी.
निर्यात कारोबार को बढ़ावा
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के पीछे छिपे एक अहम पहलू की ओर इशारा करते हुए, SEBIरजिस्टर्ड बाजार विशेषज्ञ अनुज गुप्ता ने मिंट की रिपोर्ट में कहा कि जब अमेरिकाईरान युद्ध शुरू हुआ था, तब ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 72 डॉलर प्रति बैरल थी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीजल की कीमत लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल थी.
आज, अमेरिकाईरान युद्ध के लगभग आठ महीने बाद, ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़कर लगभग 115 डॉलर प्रति बैरल हो गई हैं, जबकि डीजल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं. इस तरह, कच्चे तेल और डीजल की कीमतों के बीच का अंतर 38 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल हो गया है. इससे तेल विपणन कंपनियों और तेल रिफाइनरियों के कारोबार में भारी उछाल आया है, लेकिन कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के शोर में इस पर कोई बात नहीं कर रहा है.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और डीजल की कीमतों के बीच आए इस बड़े अंतर से रिलायंस इंडस्ट्रीज को कैसे फायदा हो सकता है, इस पर उन्होंने कहा कि बाजारों के लिए 100 डॉलर प्रति बैरल की कीमत अब एक ‘नया सामान्य’ बन गई है, और RIL अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीजल का एक बड़ा निर्यातक है. उन्होंने बताया कि रूसयूक्रेन युद्ध के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज के डीजल और रिफाइंड ईंधन निर्यात कारोबार में बड़ा बदलाव आया है. कंपनी ने अब सस्ते रूसी कच्चे तेल से मिलने वाले शुरुआती मुनाफे के बजाय, पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों, अमेरिका के साथ राजनयिक संबंधों और बदलते वैश्विक व्यापार मार्गों के बीच अपना रास्ता बनाना शुरू कर दिया है.
2022 में रूसयूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद, जामनगर में स्थित रिलायंस की दो रिफाइनरियों ने भारी छूट पर मिल रहे रूसी ‘यूराल’ कच्चे तेल का फायदा उठाया. उन्होंने अपनी रिफाइनरियों में होने वाले मेंटेनेंस के काम को टाल दिया ताकि उत्पादन को अधिकतम किया जा सके और ऊर्जा की कमी से जूझ रहे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में डीजल, जेट ईंधन और गैसोलीन का निर्यात बढ़ाया जा सके.
रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स के ‘वैल्यू अनलॉक’ से मिलने वाला फायदा
अविनाश गोरक्षकर ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि बाजार को RIL के लिए ‘वैल्यू अनलॉक’ से फायदा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स में इसकी लगभग एकतिहाई हिस्सेदारी है. इसलिए, RIL के शेयरों में आई इस तेजी का कारण जियो प्लेटफॉर्म्स IPO के सब्सक्रिप्शन की शुरुआत को माना जा सकता है.
जियो प्लेटफॉर्म्स IPO को रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों से कैसे जोड़ा जा सकता है, इस पर अविनाश गोरक्षकर ने कहा कि RIL से ‘वैल्यू अनलॉक’ होने के बाद भी, इन दोनों कंपनियों की बैलेंस शीट आपस में जुड़ी रहेंगी, क्योंकि RIL के पास अभी भी दोतिहाई हिस्सेदारी है. कंपनी का अच्छा वित्तीय प्रदर्शन RIL की बैलेंस शीट में दिखता रहेगा.
‘वैल्यू अनलॉक’ से आई इस तेजी के आगे भी जारी रहने की उम्मीद जताते हुए, अविनाश गोरक्षकर ने कहा, “बाजार का अनुमान है कि ‘वैल्यू अनलॉक’ के कारण RIL के शेयरों में प्रति शेयर लगभग ₹350 से ₹500 तक की बढ़ोतरी हो सकती है. हालांकि, यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि जियो प्लेटफॉर्म्स IPO की लिस्टिंग कैसी होती है.”
जियो प्लेटफॉर्म्स IPO की लिस्टिंग कीमत के बारे में बात करते हुए, अविनाश गोरक्षकर ने कहा कि बाजार को उम्मीद है कि जियो प्लेटफॉर्म्स IPO की लिस्टिंग कीमत 1350 से 1400 रुपए के बीच हो सकती है, जो बाजार के मूड पर निर्भर करेगा. माना जा रहा है कि यह प्रीमियम RIL के शेयरों में जुड़ जाएगा. जियो प्लेटफॉर्म्स IPO का प्राइस बैंड 1,065 से 1,119 रुपए है.
इसलिए, जियो प्लेटफॉर्म्स IPO की 1350 से 1400 रुपए की लिस्टिंग कीमत का मतलब है कि शॉर्टटर्म से मीडियमटर्म में रिलायंस के शेयरों में प्रति शेयर 250 से 300 रुपए की बढ़ोतरी हो सकती है. हालांकि, चालू वित्त वर्ष के अंत तक, RIL के शेयर की कीमत 1,550 से 1,700 रुपए के बीच रहने की उम्मीद है, जो इस बात पर निर्भर करेगा कि मौजूदा वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही में बाजार का मूड कैसा रहता है.
रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों के लिए प्राइस टारगेट
रिलायंस के शेयरों के टेक्निकल चार्ट का विश्लेषण करते हुए, केसी सिक्योरिटीज में रिसर्च और बिजनेस डेवलपमेंट के उपाध्यक्ष महेश एम. ओझा ने मिंट की रिपोर्ट में कहा कि रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों का 1,145 रुपए के स्तर पर एक मजबूत आधार बना है. यह स्टॉक 1,200 रुपए के स्तर को पार कर चुका है और अब 1,265 रुपए के शॉर्टटर्म टारगेट की ओर बढ़ रहा है. मौजूदा शेयरधारक और नए खरीदार 1,145 रुपए पर एक सख्त स्टॉपलॉस लगाकर, शॉर्टटर्म के लिए 1,265 रुपए, 1,290 रुपए और 1,350 रुपए के टारगेट के साथ इसमें निवेश कर सकते हैं.



