खेती की जमीन मशहूर हस्तियों को सिर्फ खुली जगह और वीकेंड पर शांति से समय बिताने का मौका ही नहीं देती, बल्कि इसमें खेती के अवसर, निवेश की संभावना, प्राइवेसी और प्रकृति से जुड़ाव भी मिलता है. अमीर खरीदारों के लिए, इन फायदों की वजह से घरों और अन्य निवेशों के साथसाथ खेती की जमीन भी एक आकर्षक विकल्प बन जाती है. भारत में कई जानीमानी हस्तियों के पास खेत या ग्रामीण इलाकों में संपत्तियां हैं. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर कौन कौन से सेलिब्रिटीज के पास खेती की जमीन है. साथ ही उन्हें टैक्स में किस तरह के फायदे मिलते हैं.

इन हस्तियों के पास है खेती की जमीन
- मुंबई के पास पनवेल में सलमान खान का ‘अर्पिता फार्म’ 150 एकड़ में फैला है. इस जगह पर धान के खेत, घोड़ों के अस्तबल और काफी हरियाली है. महाराष्ट्र में दिवंगत धर्मेंद्र की 100 एकड़ की संपत्ति पर सब्जियां, फलों के बाग और सस्टेनेबल खेती की व्यवस्था है.
- खबरों के मुताबिक, विराट कोहली और अनुष्का शर्मा ने अलीबाग में 5.1 एकड़ खेती की जमीन खरीदी है. आफाले गांव और नागवेश्वर मंदिर के पास खरीदी गई इस ज़मीन की कीमत 37.86 करोड़ रुपए है.
- शाहरुख खान की बेटी सुहाना खान के पास भी अलीबाग में खेती की जमीन और फार्महाउस हैं.
- अमिताभ बच्चन ने अलीबाग और अयोध्या में जमीन में निवेश किया है. कुछ मशहूर हस्तियों के लिए, खेती उन्हें अपनी जड़ों से फिर से जोड़ने का काम करती है.
- नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने उत्तर प्रदेश में अपने पैतृक शहर बुढ़ाना में 13.75 एकड़ जमीन खरीदी है.
- कुछ अन्य हस्तियों ने अनाज उगाने और अपनी जमीन को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया है. प्रकाश राज अनाज और पेड़ उगाते हैं, सस्टेनेबल खेती करते हैं और अपने खेत में उगाई गई उपज को बेचते हैं.
- आर. माधवन का तमिलनाडु स्थित फार्म नारियल की खेती और बंजर जमीन को फिर से उपजाऊ बनाने पर केंद्रित है. उनके इन प्रयासों से स्थानीय पक्षियों को भी बढ़ावा मिलता है और आसपास के पर्यावरण को मदद मिलती है.
- मुंबई और पुणे के बीच जैकी श्रॉफ की 44,000 वर्ग फुट की संपत्ति में ऑर्गेनिक बागवानी और एक मछली का तालाब है.
- आमिर खान के पास पंचगनी में दो एकड़ की एक ग्रामीण संपत्ति है. वरुण धवन ने भी प्रकृति से जुड़े कामों के लिए ग्रामीण इलाकों में एक फार्म प्रॉपर्टी खरीदी है.
टैक्स के फायदे
- टैक्स से मिलने वाले फायदे भी एक बड़ी वजह हैं, जिसकी वजह से भारत की अमीर हस्तियां खेती की जमीन में दिलचस्पी लेती हैं. यह आकर्षण सिर्फ शांतिपूर्ण वीकेंड, ऑर्गेनिक सब्जियों या बड़े निजी बगीचों तक ही सीमित नहीं है.
- खेती से होने वाली आय और कुछ मामलों में ज़मीन की बिक्री पर, अन्य निवेशों की तुलना में अलग तरह से टैक्स लगता है. जो लोग बड़ी संपत्ति संभाल रहे हैं, उनके लिए ये फायदे खेती की ज़मीन को एक आकर्षक निवेश बना देते हैं.
- पहला बड़ा फायदा खेती से सीधे होने वाली कमाई से जुड़ा है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। धारा 10 के तहत, कृषि आय को केंद्रीय आयकर से छूट प्राप्त है.
- इसमें खेतीबाड़ी से होने वाली आय शामिल है, जैसे कि फसलें उगाना और फलों के बागों की देखभाल करना. इसलिए, अमीर मालिक बिना किसी केंद्रीय आयकर के, खेती से होने वाली वास्तविक आय कमा सकते हैं.
- जिन मशहूर हस्तियों की आय के कई स्रोत हैं, उनके लिए यह आय का एक अतिरिक्त और आकर्षक जरिया बन जाता है. उनके खेतों में सब्जियां, फल या अन्य कृषि उत्पाद पैदा हो सकते हैं.
- यह कर लाभ केवल कृषि से होने वाली कमाई पर मिलता है, न कि उनकी एक्टिंग फीस या अन्य पेशेवर आय पर. सिर्फ कृषि भूमि खरीद लेने से, अन्य स्रोतों से होने वाली कमाई ‘कृषि आय’ में नहीं बदल जाती.
कैपिटल गेंस टैक्स से मुक्ति
- दूसरा बड़ा फायदा कुछ ग्रामीण कृषि भूमियों को बेचने से होने वाले मुनाफे पर मिलता है. पात्र ग्रामीण कृषि भूमि को ‘पूंजीगत संपत्ति’ नहीं माना जाता है.
- इसे बेचने से होने वाला मुनाफा ‘कैपिटल गेंस टैक्स’ के दायरे से बाहर रहता है. इससे ऐसी कृषि भूमि में निवेश करना, अन्य निवेशों की तुलना में काफी फायदेमंद हो जाता है, जिन पर बिक्री के समय टैक्स लगता है.
- हालांकि, किसी जमीन को ‘ग्रामीण’ मानने का फैसला वहां की आबादी और शहरी नगरपालिकाओं से उसकी दूरी के आधार पर किया जाता है. इसलिए, यह लाभ केवल उन्हीं जमीनों पर मिलता है जो इस श्रेणी की शर्तों को पूरा करती हैं, न कि हर उस जमीन पर जिसे ‘कृषि भूमि’ कहा जाता है.
- अमीर खरीदारों के लिए इसका आकर्षण जमीन की कीमत बढ़ने की संभावना और मिलने वाले कर लाभ में है. यह एक ऐसी कीमती संपत्ति है जिसकी कीमत समय के साथ बढ़ सकती है और इसे बेचने पर कर का फायदा भी मिल सकता है.
- धारा 54B कृषि भूमि से जुड़े टैक्स लाभ का एक और रास्ता देती है. इसके तहत, नई कृषि भूमि खरीदकर कुछ खास तरह के ‘पूंजीगत लाभ’ पर कर छूट पाई जा सकती है.
- इस तरह, दोबारा निवेश करना इस वित्तीय लाभ का एक अहम हिस्सा बन जाता है. इस छूट के साथ कुछ शर्तें जुड़ी होती हैं, इसलिए इसे अपने आप मिलने वाली छूट नहीं समझना चाहिए.



