इजराइल में 27 अक्टूबर यानी कल वोटिंग है. संसद की 120 सीटों के लिए लोग मतदान करेंगे. इजराइल की संसद का नाम ‘नेसेट’ है, जो सुनने में बाकी देशों की संसदों के नाम से काफी अलग है. इस नाम के पीछे हजारों साल पुरानी कहानी है. ‘नेसेट’ हिब्रू भाषा का शब्द है, जिसका मतलब है सभा या जमावड़ा. यह शब्द हिब्रू के ‘हिख्निस’ से जुड़ा है, और इसी से मिलताजुलता शब्द ‘किनुस’ है जो लोगों के एकत्र होने के लिए इस्तेमाल होता है. यहां तक कि सिनेगॉग को हिब्रू में ‘बेत नेसेट’ कहते हैं, यानी मिलनेजुटने का घर.

आधुनिक नेसेट का नाम एक प्राचीन संस्था से लिया गया है. ‘नेसेट’ शब्द प्राचीन ‘नेसेट हगदोला’ यानी ‘ग्रेट असेंबली’ से निकला है. यहूदी परंपरा के अनुसार यह 120 विद्वानों, ज्ञानियों और पैगंबरों की एक सभा थी. माना जाता है कि इसे पांचवीं सदी ईसा पूर्व में यरुशलम में एज्रा और नहेमायाह ने बुलाया था. यह वह दौर था जब यहूदी लोग बेबीलोन से लौटकर दोबारा बस रहे थे.

आखिर 120 सांसद ही क्यों?

यही संख्या नेसेट की सबसे दिलचस्प कड़ी है. आधुनिक इजराइल के संस्थापकों ने उस प्राचीन सभा से प्रेरणा लेकर अपनी संसद को नेसेट नाम दिया और इसमें भी 120 सदस्य रखे. यानी संसद की मौजूदा सीटों की संख्या का सीधा रिश्ता उसी पुरानी परंपरा से है. इस वजह से बहुमत के लिए 61 सीटें चाहिए, जो चुनावी खबरों में बारबार सुनाई देता है.

‘नेसेट’ शब्द प्राचीन ‘नेसेट हगदोला’ यानी ‘ग्रेट असेंबली’ से निकला है. फोटो: Getty Images

आधुनिक नेसेट कब बनी?

14 फरवरी 1949 को यरुशलम में जूइश एजेंसी की इमारत में संविधान सभा की पहली बैठक हुई. दो दिन बाद, 16 फरवरी 1949 को ‘नेसेट’ नाम मंजूर किया गया और सदस्यों की संख्या 120 तय की गई। शुरुआती दिनों में संसद की बैठकें तेल अवीव में हुईं. यरुशलम में मौजूदा मुख्य इमारत 1966 में बनी.

क्या दोनों नेसेट एक जैसी?

नहीं. नाम और संख्या में समानता के बावजूद दोनों के काम करने का तरीका बिल्कुल अलग है. प्राचीन नेसेट पूरी तरह धार्मिक और गैरनिर्वाचित संस्था थी और दोनों के बीच संगठन के स्तर पर कोई निरंतरता नहीं है. उसके सदस्य पैगंबर और बुजुर्ग थे, जबकि आज के सांसद राष्ट्रीय चुनाव में पार्टियों को मिले वोटों के आधार पर चुने जाते हैं. इतिहासकारों के बीच प्राचीन असेंबली के अस्तित्व और घटनाक्रम को लेकर बहस भी रही है.

16 फरवरी 1949 को इजराइल की संसद के लिए ‘नेसेट’ नाम मंजूर किया गया. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। फोटो: Getty Images

आज कैसे चुनी जाती है नेसेट?

नेसेट के 120 सदस्य पूरे देश को एक ही चुनाव क्षेत्र मानकर चुने जाते हैं और उनका कार्यकाल चार साल का होता है. भारत की तरह इजराइल में मतदाता सीधे प्रधानमंत्री को नहीं चुनते, बल्कि पार्टी की सूची को वोट दिया जाता है. पार्टियों को मिले वोटों के अनुपात में उन्हें सीटें दी जाती हैं. सरकार बनाने के लिए नेसेट में कम से कम 61 सदस्यों का समर्थन जरूरी होता है. इसी वजह से वहां आमतौर पर किसी एक पार्टी को अकेले बहुमत नहीं मिलता और गठबंधन सरकार बनती है.

जब किसी एक पार्टी को अकेले बहुमत नहीं मिलता, तो उसे दूसरे दलों से हाथ मिलाना पड़ता है. गठबंधन में शामिल पार्टियों को नीतियों, मंत्रालयों और सत्ता की साझेदारी पर आपसी सहमति बनानी होती है. इस व्यवस्था का फायदा यह है कि छोटे दलों को भी संसद में आवाज मिल जाती है, लेकिन इसी वजह से सरकार बनाना मुश्किल भी हो जाता है. सबसे ज्यादा सीटें जीतने वाली पार्टी की सरकार बनना तय नहीं होता, क्योंकि बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए उसे सहयोगियों का समर्थन जुटाना ही पड़ता है.