Himachal Pradesh Blueberry Farming: हिमाचल प्रदेश में अब ब्लूबेरी की व्यावसायिक खेती को बढ़ाया जाएगा. इसके पौधे उपलब्ध करवाए जाएंगे. बागवानी विभाग को बागवानों को ब्लूबेरी के पौधे उपलब्ध कराने काम सौंपा गया है. शुरुआत में पांच लाख तैयार पौधों में से 25 हजार पौधे ही बांटे जाएंगे. दरअसल, जलवायु परिवर्तन और मौसम की मार से सेब उत्पादन और बागवानों की आमदनी पर संकट बढ़ा है.

इसको देखते हुए हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार ब्लूबेरी को बेहतर आमदनी के विक्लप के रूप में देख रही है, क्योंकि ये उच्च बाजार मूल्य वाली फसल है. ब्लूबेरी की खेती सेब की तरह खुले खेतों में मुमकिन है. इसके लिए पालीहाउस और नियंत्रित माध्यम में मिट्टी या उगाने वाले सब्सट्रेट की उचित अम्लीयता बनाए रखना जरूरी है.
पालीहाउस बनाने पर 70 प्रतिशत से अधिक अनुदान
राज्य में पात्र बागवानों को निर्धारित शर्तों के तहत पालीहाउस बनाने पर 70 प्रतिशत से अधिक अनुदान का प्रावधान है. बागवान सीमित क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के जरिये इस उच्च मूल्य वाली फसल तैयार कर सकते हैं. बागवानी विभाग की ओर से ब्लूबेरी की 12 उन्नत किस्मों के करीब पांच लाख पौधे प्रदेश में तैयार किए गए हैं. बागवानों को शुरुआती फेज में 25000 पौधे बांटे जाने की योजना है.
ब्लूबेरी के प्रदर्शन बाग बनाए गए
पालमपुर, नौणी, शिलारू, क्वागधार और नम्होल में एकएक एकड़ क्षेत्र में ब्लूबेरी के प्रदर्शन बाग भी बनाए गए हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। एक पौधे की कीमत करीब 600 रुपये है. पौधे ग्रो बैग में उपलब्ध करवाए जाएंगे. एक ग्रो बैग में एक पौधा लगाया जाएगा. तीन पौधों 1500 से 2000 रुपये में आएंगे. 500 वर्गमीटर के पालीहाउस में करीब 500 पौधे लगाए जा सकते हैं.
ब्लूबेरी की गुणवत्ता और बाजार की परिस्थितियों के आधार पर इसकी कीमत 800 से 2000 रुपये प्रति किलोग्राम तक मिल सकती है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसकी मांग है. इसमें एंथोसायनिन, फाइबर और विटामिन सहित कई पोषक तत्व हैं. इसमें एंटीआक्सिडेंट गुण भी हैं.



