सोने की कीमतों में गिरावट के बीच अब एक नई वैज्ञानिक खोज ने सबका ध्यान खींचा है. अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को की स्टार्टअप कंपनी मैराथन फ्यूजन ने दावा किया है कि उसने पारे यानी मरकरी को असली और स्थिर सोने में बदलने में सफलता हासिल की है. कंपनी ने 21 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर यह जानकारी दी थी. हालांकि, कंपनी ने अब तक यह नहीं बताया है कि उसके प्रयोग में कितना सोना बना और इसके वैज्ञानिक आंकड़े भी सार्वजनिक नहीं किए हैं.

इस दावे के बाद एक पुराना सवाल फिर चर्चा में आ गया है. क्या वैज्ञानिक प्रयोगशाला में सोना बना सकते हैं? अगर ऐसा बड़े पैमाने पर संभव हुआ, तो क्या सोने की कीमतें गिर सकती हैं?
Last month, we demonstrated highrate alchemy: turning mercury into real, stable gold, beating CERNs record by a factor of 10.
Last week, we enriched isotopes in the worlds most powerful plasma centrifuge, beating the Soviet record that stood for 40 years.
Now, were building a fusion reactor in San Francisco to achieve record power density.
— Marathon Fusion October 21, 2026
पारे से सोना कैसे बनाया जा सकता है?
मैराथन फ्यूजन जिस तकनीक की बात कर रही है, उसे न्यूक्लियर ट्रांसम्यूटेशन यानी परमाणु नाभिक में बदलाव करना कहा जाता है. इस प्रक्रिया में एक तत्व के परमाणु के नाभिक में बदलाव करके उसे दूसरे तत्व में बदला जाता है. कंपनी के प्रस्ताव के मुताबिक, फ्यूजन रिएक्शन से निकलने वाले बहुत ज्यादा ऊर्जा वाले न्यूट्रॉन का इस्तेमाल पारे के एक खास प्रकार, मर्करी198, को मर्करी197 में बदलने के लिए किया जा सकता है. इसके बाद मर्करी197 रेडियोधर्मी क्षय की प्रक्रिया से गुजरकर स्थिर सोना197 बन सकता है. हालांकि, इस प्रक्रिया में रेडियोएक्टिव पदार्थ भी बन सकते हैं. इसलिए सोना बनाने के अलावा उसे सुरक्षित और इस्तेमाल योग्य बनाना भी एक बड़ी चुनौती है.
इससे पहले यूरोप की CERN प्रयोगशाला में भी वैज्ञानिक परमाणु टकराव के जरिए सोने के नाभिक बना चुके हैं. 2015 से 2018 के बीच लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर में सीसे के परमाणुओं के नाभिकों को टकराकर अनुमानित 86 अरब सोने के नाभिक बनाए गए थे. इनका कुल वजन करीब 29 पिकोग्राम था. यह मात्रा बेहद कम थी और ये नाभिक एक सेकंड के बहुत छोटे हिस्से में टूट गए थे. मैराथन फ्यूजन का दावा इससे अलग है. कंपनी फ्यूजन से निकलने वाले न्यूट्रॉन की मदद से बड़े पैमाने पर सोना बनाने की संभावना पर काम कर रही है.
क्या लैब में बना सोना बाजार में बिक सकेगा?
फिलहाल इस सवाल का जवाब देना जल्दबाजी होगी. कंपनी ने न तो अपने प्रयोग में बने सोने की मात्रा बताई है और न ही प्रयोग के आंकड़े जारी किए हैं. इसलिए अभी यह तय नहीं है कि तकनीक व्यावसायिक स्तर पर कितनी सफल हो सकती है. कंपनी के 2025 के एक रिसर्च पेपर में अनुमान लगाया गया था कि व्यावसायिक स्तर का प्लांट सालाना करीब दो टन सोना बना सकता है, लेकिन यह केवल एक अनुमान है, किसी बड़े प्लांट में हासिल किया गया वास्तविक उत्पादन नहीं. दूसरी ओर दुनिया की सोने की खदानों ने 2025 में करीब 3,672 टन सोने का उत्पादन किया था. वहीं, 2026 की दूसरी तिमाही तक दुनिया में खनन से निकाला गया और जमीन के ऊपर मौजूद सोना करीब 2,22,600 टन आंका गया था. इस तुलना से साफ है कि अगर भविष्य में लैब में सोना बनाना संभव भी हो जाता है, तो मौजूदा खनन उत्पादन के मुकाबले इसकी मात्रा कितनी होगी, यह तकनीक की वास्तविक क्षमता पर निर्भर करेगा.
क्या लैब में बने सोने से कीमतें गिर सकती हैं?
ET की रिपोर्ट में मल्टीकॉइन कैपिटल के संस्थापक और मुख्य निवेश अधिकारी तुषार जैन ने कहा कि इस प्रयोग की तुलना लैब में बनाए जाने वाले हीरों से की जा सकती है, लेकिन सवाल ये है कि जब लैब में बने हीरों ने हीरों के बाजार को प्रभावित किया, तो क्या लैब में बना सोना भी भविष्य में सोने की कीमतों पर असर डाल सकता है? हालांकि, दोनों के बीच एक बड़ा अंतर है. लैब में हीरे बनाने की तकनीक व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल हो रही है, जबकि सोने के मामले में बड़े पैमाने पर उत्पादन, लागत और रेडियोधर्मिता जैसी चुनौतियां अभी बाकी हैं. इसलिए यह कहना अभी सही नहीं होगा कि लैब में सोना बनने से सोने की कीमतें गिर जाएंगी. ऐसा असर तभी संभव होगा, जब यह तकनीक कम लागत में सुरक्षित और बड़े पैमाने पर सोना बनाने में सफल हो.
सोने की कीमतों में पहले से गिरावट
लैब में सोना बनाने के दावे से पहले भी सोने की कीमतों में उतारचढ़ाव देखने को मिला है. सोना 1 जनवरी 2026 के स्तर से करीब 5.56% नीचे कारोबार कर रहा था. जनवरी के आखिर में यह साल की शुरुआत के स्तर से लगभग 25% ऊपर पहुंच गया था, लेकिन बाद में इसकी कीमतों में गिरावट आई. मार्केट अकाउंट बुल थ्योरी के मुताबिक, सोने की कीमतों में गिरावट से इसका बाजार मूल्य करीब 406 अरब डॉलर कम हुआ. इसी अवधि में चांदी की कीमतों में भी लगभग 3% की गिरावट आई. दोनों धातुओं के कुल बाजार मूल्य में कमी 500 अरब डॉलर से अधिक बताई गई. कुल मिलाकर, फिलहाल सोने में निवेश करने वालों के लिए बाजार की मौजूदा चाल ज्यादा महत्वपूर्ण है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। मैराथन फ्यूजन का दावा वैज्ञानिक रूप से दिलचस्प जरूर है, लेकिन लैब में बना सोना अभी इतना बड़ा खतरा नहीं है कि उससे बाजार में सोने की कीमतों में तत्काल भारी गिरावट आने लगे.



