PSU Bank Privatisation: सरकार चार PSU बैंकों में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 75% तक लाने पर विचार कर रही है. इनमें सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक शामिल हैं. इस कदम का मकसद शेयर बाजार के नियमों के मुताबिक इन बैंकों में आम निवेशकों की हिस्सेदारी कम से कम 25% करना है. इसके साथ ही सरकार सरकारी बैंकों के विलय की अगली योजना पर भी काम कर रही है. इस योजना के तहत दो और बैंकों को निजीकरण के लिए चुना जा सकता है. हालांकि, अभी इस बारे में अंतिम फैसला नहीं हुआ है.

चार सरकारी बैंकों में हिस्सेदारी बेचने की तैयारी
इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार की पहली प्राथमिकता अगले एक साल में इन चार बैंकों में आम निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ाने की है. इसके लिए बैंक अपनी जरूरत के हिसाब से शेयर बाजार से पैसा जुटा सकते हैं. वहीं, सरकार भी बाजार की स्थिति को देखते हुए ऑफर फॉर सेल के जरिए अपनी हिस्सेदारी बेच सकती है. OFS के तहत सरकार अपने कुछ शेयर निवेशकों को बेचती है.
शेयर बाजार के नियमों के मुताबिक, लिस्टेड कंपनियों में कम से कम 25% हिस्सेदारी आम निवेशकों के पास होनी चाहिए. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। सरकार ने सरकारी कंपनियों समेत वित्तीय संस्थानों को इस नियम से अगस्त 2026 तक छूट दी थी. अधिकारियों के मुताबिक, इस छूट को आगे बढ़ाने की अधिसूचना भी जारी होने की उम्मीद है. सरकार का मानना है कि बाजार में इन बैंकों के ज्यादा शेयर उपलब्ध होने से उनकी वैल्यूएशन बेहतर हो सकती है.
दो बैंकों के निजीकरण पर भी चल रहा मंथन
सरकार सिर्फ चार बैंकों में अपनी हिस्सेदारी घटाने तक सीमित नहीं रहना चाहती. सरकारी बैंकों के अगले दौर के विलय की योजना भी तैयार की जा रही है. इसमें दो और बैंकों को निजीकरण के लिए चुने जाने की संभावना है. इससे पहले नीति आयोग ने कथित तौर पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन ओवरसीज बैंक को निजीकरण के संभावित उम्मीदवारों के रूप में चुना था. हालांकि, इन बैंकों के निजीकरण पर अभी कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है.
केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 202122 के बजट में IDBI बैंक के अलावा दो सरकारी बैंकों और एक जनरल इंश्योरेंस कंपनी के निजीकरण की घोषणा की थी. अब सरकार उसी दिशा में आगे की योजना पर काम कर रही है. अधिकारियों के मुताबिक, बैंकों का निजीकरण करने के लिए कानून में बदलाव भी जरूरी होगा. इसमें बैंकिंग कंपनी अधिनियम से जुड़े बदलाव शामिल हो सकते हैं.
देश में सिर्फ 34 बड़े सरकारी बैंक रखने का लक्ष्य
केंद्र सरकार की लंबी अवधि की योजना देश में तीन से चार बड़े सरकारी बैंक रखने की है. इसके लिए सरकारी बैंकों के विलय पर विचार किया जा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, किन बैंकों का विलय होगा, इसका फैसला कई बातों को ध्यान में रखकर किया जाएगा. इनमें बैंकों की तकनीकी व्यवस्था, अलगअलग इलाकों में उनकी मौजूदगी और कारोबार का तरीका शामिल है. सरकार चाहती है कि बैंकों की तरफ से भी विलय को लेकर सुझाव आएं. इसके बाद तय किया जा सकेगा कि किन बैंकों को एक साथ लाना बेहतर होगा.



