दिवाली नजदीक आते ही फ्लाइट के टिकटों की कीमतों में बेतहाशा रूप से बढ़ोतरी हुई है. ध्यान देने वाली बात ये है कि फेस्टिव सीजन खत्म होने के बाद भी टिकटों के सस्ते होने की उम्मीद कम है. लेकिन त्योहारों के बाद यात्रियों की संख्या कम होने से कुछ रूट पर किराये में थोड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन बड़ी गिरावट की उम्मीद फिलहाल कम है.

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ICRA के मुताबिक, किराये में बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह विमान ईंधन की बढ़ती कीमतें, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण एयरलाइंस की बढ़ी हुई लागत है. आने वाले समय में हवाई किराया महंगा ही रह सकता है. किराये में स्थायी राहत के लिए विमान ईंधन की कीमतों में कमी और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में आ रही बाधाओं का दूर होना जरूरी है.

कई रूट पर हवाई किराया में 68% तक बढ़ा

ET की रिपोर्ट के मुताबिक, 1 सितंबर से 10 नवंबर के बीच यात्रा के लिए औसत एकतरफा हवाई किराये में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले बड़ी बढ़ोतरी हुई. दिल्लीहैदराबाद रूट पर किराया 68% बढ़ा है. मुंबईकोलकाता रूट पर 51% की बढ़ोतरी हुई. दिल्लीगोवा रूट पर किराया 39% बढ़ा और मुंबईबेंगलुरु रूट पर 37% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. इन आंकड़ों से साफ है कि यात्रियों को कई प्रमुख रूट पर पहले के मुकाबले ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं.

इन 3 वजहों से महंगा हुआ हवाई सफर

1. हवाई किराये बढ़ने की सबसे बड़ी वजहों में एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतें शामिल हैं. 1 अक्टूबर से घरेलू ATF की कीमत में करीब 16 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई, जिसके बाद इसकी कीमत लगभग 137 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई. ICRA के मुताबिक, अक्टूबर में घरेलू विमान ईंधन की कीमत पिछले साल के मुकाबले 46.2% ज्यादा थी. एयरलाइंस के कुल ऑपरेशन खर्च में ईंधन की हिस्सेदारी करीब 3040% होती है. इसकी भरपाई के लिए एयरलाइंस यात्रियों से एक्स्ट्रा चार्ज भी वसूल रही हैं.

2. इसके अलावा फ्लाइट टिकट महंगे होने की एक और वजह डॉलर के मुकाबले रुपए का कमजोर होना है. एयरलाइंस के करीब 3550% खर्च डॉलर में होते हैं. इनमें विमान ईंधन, विमान किराया और रखरखाव जैसे खर्च शामिल हैं. रुपया कमजोर होने पर इन सर्विस के लिए कंपनियों को ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते हैं.

3. साथ ही पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के ऑपरेशन पर असर पड़ा है. हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध, उड़ानों के लंबे वैकल्पिक रास्ते और उपलब्ध उड़ानों में कटौती से एयरलाइंस का खर्च बढ़ा है. इससे यात्रियों के लिए उपलब्ध सीटों पर भी असर पड़ सकता है. एविएशन एनालिटिक्स कंपनी OAG के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर से दिसंबर के बीच भारत की घरेलू उड़ानों का शेड्यूल पिछले साल की तुलना में 5% कम था, जबकि सीटों की उपलब्धता में 1.2% की गिरावट दर्ज की गई.

क्या यात्रियों की घटती संख्या से सस्ते होंगे टिकट?

ICRA के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में भारत में घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या पिछले साल के मुकाबले 1.9% घटी है. वहीं, भारतीय एयरलाइंस से अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या में 19.3% की गिरावट आई. एजेंसी का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में घरेलू हवाई यातायात 36% बढ़ सकता है, जबकि भारतीय एयरलाइंस का अंतरराष्ट्रीय यात्री यातायात 36% घट सकता है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। फेस्टिव सीजन के बाद यात्रियों की संख्या कम होने से कुछ रूट पर किराये घट सकते हैं, लेकिन अगर फ्यूल महंगा बना रहता है और उड़ानों की उपलब्धता पर दबाव जारी रहता है, तो किराये में बड़ी राहत मिलना मुश्किल होगा.

क्या सरकार के नए नियमों से सस्ते होंगे हवाई टिकट?

केंद्र सरकार हवाई किराये में अचानक और मनमानी बढ़ोतरी को काबू में करने के लिए नए नियम तैयार कर रही है. मगर इनका मकसद टिकटों की कीमत तय करना नहीं है. नई व्यावस्था के तहत एयरलाइंस को अपने किराये का स्ट्रक्चर एक महीने पहले नागर विमानन महानिदेशालय को देना होगा और अपनी वेबसाइट पर भी दिखाना होगा. DGCA इन किरायों की निगरानी करेगा. इधर, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से 16 नवंबर तक अंतिम नियम पेश करने को कहा है .हालांकि, इन नियमों से सामान्य दिनों या त्योहारों के दौरान टिकट सस्ते होने की गारंटी नहीं है.