आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने केंद्रीय बैंक की हालिया नीति बैठक के मिनट्स में कहा कि 202627 के लिए भारतीय इकोनॉमी की विकास दर का अनुमान अगस्त में लगाए गए 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया गया है, लेकिन बढ़ती महंगाई का दबाव इस अनुमान के लिए जोखिम पैदा कर रहा है. मल्होत्रा ​​ने कहा कि ग्लोबल लेवल पर जारी उथलपुथल के बीच, भारतीय इकोनॉमी ने उल्लेखनीय मजबूती दिखाई है. पूरे वर्ष 202627 के लिए विकास दर अब 7.1% रहने का अनुमान है, जो अगस्त के 6.7% के अनुमान से 40 bps अधिक है. हालांकि, महंगाई का दबाव बढ़ रहा है.

चार साल के बाद बढ़ाई थी ब्याज दरें

भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को 5 से 7 अक्टूबर के बीच हुई मौद्रिक नीति समिति की बैठक के मिनट्स जारी किए. गवर्नर के साथसाथ, MPC के अन्य पांच सदस्यों ने भी रेपो रेट को 25 bps बढ़ाकर 5.5% करने के पक्ष में वोट दिया. लगभग चार साल के अंतराल के बाद दर में बढ़ोतरी की गई है. देश की विकास दर उम्मीद से बेहतर बनी हुई है, महंगाई का जोखिम फिर से बढ़ रहा है, और वैश्विक ब्याज दर के माहौल के कारण भारत के लिए एक बड़ा पॉलिसी गैप बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है. फरवरी 2023 के बाद यह पहली बार है जब दरों में बढ़ोतरी की गई है . यह RBI के ‘दरकटौती चक्र’ से एक अलग रुख है.

सख्त पॉलिसी झेल सकती है इकोनॉमी

केंद्रीय बैंक को अब पूरा भरोसा है कि अर्थव्यवस्था विकास दर पर कोई बड़ा नकारात्मक असर पड़े बिना, कुछ हद तक मौद्रिक सख्ती को झेल सकती है. बुधवार को जारी MPC बैठक के मिनट्स के अनुसार, गवर्नर ने बताया कि महंगाई के व्यापक होने के संकेत बढ़ रहे हैं. अगस्त में CPI बास्केट में शामिल 37 प्रतिशत वस्तुओं में महंगाई 4 प्रतिशत से अधिक थी, जबकि मार्च में यह आंकड़ा केवल 20 प्रतिशत था.

आगे की क्या है उम्मीदें

जानकारों की मानें तो आने वाले दिनों में महंगाई की वजह से पॉलिसी रेट में इजाफा देखने को मिल सकता है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसका मतलब है दिसंबर पॉलिसी मीटिंग में एक बार फिर से 0.25 फीसदी रेपो रेट में बढ़ोतरी हो सकता है. कुछ ब्रोकरेज फर्मों ने फरवरी पॉलिसी में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है. इसका मतलब है कि लगातार तीन पॉलिसी मीट में .75 फीसदी की बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है.