Critical Technology : भारत अब उन अहम तकनीकों की पहचान कर रहा है, जिनमें देश को पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनने की जरूरत है. सरकारी थिंक टैंक नीति आयोग अलगअलग सेक्टरों से जुड़ी ऐसी ‘क्रिटिकल टेक्नोलॉजी’ की एक खास लिस्ट को अंतिम रूप दे रहा है. इस फाइनल लिस्ट पर सरकार के सबसे ऊंचे स्तर पर चर्चा चल रही है. उम्मीद है कि ये लिस्ट अगले महीने तक सामने आ जाएगी.

ET की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें 6G आर्किटेक्चर, 6G हार्डवेयर, डिफेंस यानी रक्षा उपकरण, जीनोमिक सीक्वेंसिंग के अलावा इलेक्ट्रिक गाड़ियों के पावरट्रेन जैसी तकनीकें मुख्य रूप से शामिल हैं. सरकार का मकसद साफ है कि देश के भीतर ही इन तकनीकों को बनाने की क्षमता विकसित की जाए.

अगर भविष्य में किसी वजह से अचानक इन तकनीकों की विदेशी सप्लाई रुकती है या उन तक पहुंच बंद होती है, तो भारत को कोई नुकसान न उठाना पड़े. इसके लिए प्राथमिकता के आधार पर निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा. साथ ही रिसर्च के जरिए घरेलू उपलब्धता बढ़ाने का एक पूरा रोडमैप तैयार किया जाएगा.

सरकारी कंपनियां देंगी खरीदारी की गारंटी

दुनिया के कई बड़े देशों के पास पहले से ही अपनी क्रिटिकल टेक्नोलॉजी की लिस्ट मौजूद है. अमेरिका, यूरोपीय संघ , कनाडा, चीन, ऑस्ट्रेलिया से लेकर ब्रिटेन तक ने इसके लिए अलग से फंडिंग की व्यवस्था की है. इन देशों ने आत्मनिर्भर बनने के लिए खास रणनीतियां बनाई हैं, ताकि ग्लोबल सप्लाई में आने वाले किसी भी अचानक झटके से खुद को बचाया जा सके.

इसी तर्ज पर भारत में भी एक मजबूत प्लान पर विचार किया जा रहा है. इसके तहत शुरुआती सालों में या जब तक बाजार में खुद मांग नहीं बढ़ जाती, तब तक सरकारी कंपनियों के जरिए इन उत्पादों की एक तय मात्रा में खरीदारी की गारंटी दी जा सकती है. इसके अलावा, रिसर्च फंड का एक खास हिस्सा भी इन सेक्टरों के लिए अलग रखा जा सकता है. इससे कंपनियों को नई खोज करने, रिसर्च को आगे बढ़ाने के साथसाथ इन तकनीकों को विकसित करने का बढ़ावा मिलेगा.

पुरानी योजनाओं के बावजूद क्यों पड़ी जरूरत?

अधिकारियों का कहना है कि इनमें से ज्यादातर सेक्टरों में स्वदेशी क्षमता को मजबूत करने का काम पहले से ही चल रहा है. हालांकि, सरकार के समर्थन के साथ ठोस आंकड़ों पर आधारित इस लिस्ट के आने से प्राइवेट सेक्टर का निवेश खींचने में काफी मदद मिलेगी.

भारत में नए उभरते सेक्टरों में इनोवेशन के अलावा निवेश को बढ़ावा देने के लिए पहले से ही आधा दर्जन से ज्यादा योजनाएं चल रही हैं. लेकिन सरकार को लगता है कि अब एक सटीक निशाने वाली रणनीति की जरूरत है, क्योंकि इन योजनाओं की शुरुआती रफ्तार अभी धीमी है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। साथ ही इनका असर भी कुछ ही सेक्टरों तक सीमित रहा है.

रिसर्च के लिए 1 लाख करोड़ रुपये का फंड

प्राइवेट सेक्टर में रिसर्च एंड डेवलपमेंट को सहारा देने के लिए सरकार ने पहले ही बड़े कदम उठाए हैं. इसके लिए ‘अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन’ के साथसाथ 1 लाख करोड़ रुपये का ‘रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन फंड’ बनाया गया है.

नवंबर 2025 में इस फंड के ऐलान के करीब एक साल बाद, हाल ही में सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने RDIF के तहत कुल 7,131 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता के साथ 14 अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड को मंजूरी दी है. इसके साथ ही पांच फोकस्ड रिसर्च ऑर्गनाइजेशन को भी हरी झंडी दिखाई गई है. ये कदम देश में नई तकनीक का मजबूत इकोसिस्टम तैयार करने में अहम भूमिका निभाएगा.